NSE IPO पर आया बड़ा अपडेट, जल्द मिल सकता है रेगुलेटरी से ग्रीन सिग्नल; SEBI चेयरमैन ने दिए संकेत
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित IPO का रास्ता अब साफ होता दिख रहा है. SEBI जल्द ही NSE को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर सकता है, जिससे डार्क फाइबर केस के चलते अटकी लिस्टिंग प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है. साथ ही SEBI ने T+0 सेटलमेंट, म्यूचुअल फंड एक्सपेंस रेशियो, बॉन्ड डेरिवेटिव्स, AI और KYC सुधारों को लेकर भी अहम संकेत दिए हैं.
NSE IPO and SEBI Chairman: भारत के सबसे बड़े शेयर बाजार इंडेक्स नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO का रास्ता अब साफ होता नजर आ रहा है. सालों से अटके इस बहुप्रतीक्षित लिस्टिंग को लेकर बाजार नियामक SEBI जल्द ही बड़ी राहत दे सकता है. इससे NSE की लिस्टिंग से जुड़ी लंबी कानूनी और रेगुलेटरी अनिश्चितता खत्म होने की उम्मीद है. आइए विस्तार में बताते हैं कि एनएसई के आईपीओ पर क्या है अपडेट.
NSE IPO को मिल सकता है SEBI का ग्रीन सिग्नल
SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि NSE को जल्द ही नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया जा सकता है. उन्होंने संकेत दिया कि यह मंजूरी संभवतः इसी महीने के अंत तक मिल सकती है. इसके बाद IPO की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना NSE के हाथ में होगा.
क्यों अटका था NSE का IPO?
NSE का IPO लंबे समय से डार्क फाइबर केस के चलते फंसा हुआ था. इस मामले में आरोप लगे थे कि 2010 से 2014 के बीच कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स को को-लोकेशन सर्वर तक तेज प्राइवेट कनेक्शन के जरिए तरजीही पहुंच दी गई, जिससे उन्हें ट्रेडिंग में अनुचित फायदा मिला. SEBI ने अप्रैल 2019 में NSE को 62.58 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई लौटाने का आदेश दिया था और कुछ सीनियर अधिकारियों पर बाजार से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाने पर रोक लगा दी थी. इसके अलावा 2022 में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया, जिसे बाद में SAT ने रद्द कर दिया. इसके खिलाफ SEBI ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जहां मामला अब भी विचाराधीन है.
सामान्य कंपनियों से अलग नियम
स्टॉक एक्सचेंज, डिपॉजिटरी और क्लियरिंग कॉरपोरेशन जैसी मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर संस्थाओं को IPO से पहले SEBI से NOC लेना जरूरी होता है. यह अतिरिक्त प्रक्रिया इसलिए रखी जाती है क्योंकि ये संस्थान देश के वित्तीय सिस्टम की रीढ़ माने जाते हैं.
अनलिस्टेड मार्केट में NSE की ताकत
InCred के आंकड़ों के मुताबिक, NSE का अनलिस्टेड शेयर करीब 2,045 रुपये पर ट्रेड कर रहा है, जिससे इसका अनुमानित मार्केट कैप 5.06 लाख करोड़ रुपये बैठता है. यह लिस्टेड कंपटीटर BSE (लगभग 1.09 लाख करोड़ रुपये) से करीब पांच गुना ज्यादा है. मार्केट हिस्सेदारी की बात करें तो NSE का इक्विटी कैश सेगमेंट में 92.7 फीसदी और इक्विटी ऑप्शंस में 74.3 फीसदी का दबदबा है.
T+0 सेटलमेंट पर ठंडा रिस्पॉन्स
इससे इतर, SEBI चेयरमैन ने कई दूसरे मामलों को लेकर भी अहम जानकारियां दी है. इनमें से एक T+0 है. सेबी चेयरमैन ने यह माना कि T+0 सेटलमेंट सिस्टम को लेकर बाजार में खास उत्साह नहीं दिखा है. भारत पहले ही जनवरी 2023 में सभी शेयरों के लिए T+1 सेटलमेंट अपनाने वाला दुनिया का पहला देश बन चुका है. मार्च 2024 में SEBI ने 25 शेयरों के लिए वैकल्पिक T+0 सेटलमेंट शुरू किया था और दिसंबर 2024 में इसे चरणबद्ध तरीके से टॉप 500 शेयरों तक बढ़ाने का ऐलान किया गया. हालांकि पांडे के मुताबिक, इससे जुड़ी दिक्कतें ज्यादा हैं और फायदे सीमित नजर आते हैं.
म्यूचुअल फंड एक्सपेंस रेशियो में बदलाव
म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी एक अहम अपडेट है. SEBI जल्द ही परफॉर्मेंस-लिंक्ड एक्सपेंस रेशियो से जुड़ा नया फ्रेमवर्क लागू करने जा रहा है. इस पर नोटिफिकेशन एक-दो दिन में जारी हो सकता है. हालांकि फंड हाउस इसे लागू करने में गणना और फीस की अनिश्चितता को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं.
कॉरपोरेट बॉन्ड और AI पर फोकस
SEBI कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार को गहराई देने के लिए बॉन्ड डेरिवेटिव्स लाने पर भी विचार कर रहा है. इसके साथ ही म्युनिसिपल बॉन्ड्स को बढ़ावा देने के लिए रेगुलेटरी सुधार और जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. निवेशकों की सुरक्षा के लिए SEBI अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का भी तेजी से इस्तेमाल कर रहा है. ‘SEBI सुदर्शन सिस्टम’ सोशल मीडिया पर फर्जी सलाहकारों की पहचान में मदद कर रहा है. इसके अलावा साइबर ऑडिट रिपोर्ट्स का विश्लेषण करने के लिए भी AI टूल्स विकसित किए जा रहे हैं.
KYC प्रक्रिया होगी आसान
SEBI निवेशकों के लिए KYC प्रक्रिया को भी सरल बनाने की तैयारी में है. बार-बार डॉक्यूमेंट जमा करने की जरूरत कम होगी और re-KYC को ज्यादा सुगम बनाया जाएगा. इस पर जल्द ही पब्लिक कंसल्टेशन भी शुरू किया जाएगा.
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