NSE IPO से PSU बीमा कंपनियों की चमकेगी किस्मत! ₹12,000 करोड़ की वैल्यू खुलने की उम्मीद
अभी तक NSE अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए इन कंपनियों की हिस्सेदारी कम वैल्यू पर दिखाई जाती है. IPO के बाद मार्केट वैल्यू के हिसाब से इनकी हिस्सेदारी का मूल्य बढ़ेगा, जिससे बैलेंस शीट मजबूत होगी. ICRA के मुताबिक इन तीनों कंपनियों को 1.5 सॉल्वेंसी रेशियो तक पहुंचने के लिए 15200 से 17000 करोड़ रुपये की जरूरत है. सरकार भी करीब 5000 करोड़ रुपये का कैपिटल डालने पर विचार कर रही है.

NSE IPO : देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के आने वाले IPO से सरकारी जनरल इंश्योरेंस कंपनियों की वित्तीय हालत में बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की लिस्टिंग से तीन सरकारी बीमा कंपनियों के लिए करीब 11500 से 12000 करोड़ रुपये का वैल्यू अनलॉक होने की उम्मीद है. इस रकम से इन कंपनियों के सॉल्वेंसी रेशियो में काफी सुधार हो सकता है.
किन कंपनियों को मिलेगा फायदा
National Insurance Company, Oriental Insurance Company और United India Insurance Company के पास NSE के करीब 7.5 करोड़ शेयर हैं. अगर प्रति शेयर करीब 1500 रुपये का वैल्यू माना जाए, तो हर कंपनी के हिस्से में लगभग 4500 करोड़ रुपये का फायदा आ सकता है.
सॉल्वेंसी रेशियो में होगा सुधार
इस रकम से इन कंपनियों के सॉल्वेंसी रेशियो में करीब 1 फीसदी तक सुधार हो सकता है. अभी ये कंपनियां रेगुलेटरी जरूरत 1.5 गुना से नीचे चल रही हैं. मार्च 2025 तक National Insurance का सॉल्वेंसी रेशियो -0.67, Oriental Insurance का -1.03 और United India Insurance का -0.65 था, जो उनकी कमजोर बैलेंस शीट को दिखाता है.
लिस्टिंग से कैसे होगा फायदा
अभी तक NSE अनलिस्टेड कंपनी है, इसलिए इन कंपनियों की हिस्सेदारी कम वैल्यू पर दिखाई जाती है. IPO के बाद मार्केट वैल्यू के हिसाब से इनकी हिस्सेदारी का मूल्य बढ़ेगा, जिससे बैलेंस शीट मजबूत होगी.
कैपिटल की जरूरत अब भी बनी रहेगी
ICRA के मुताबिक इन तीनों कंपनियों को 1.5 सॉल्वेंसी रेशियो तक पहुंचने के लिए 15200 से 17000 करोड़ रुपये की जरूरत है. सरकार भी करीब 5000 करोड़ रुपये का कैपिटल डालने पर विचार कर रही है. NSE का IPO, जो करीब 20000 करोड़ रुपये का हो सकता है, पूरी तरह ऑफर फॉर सेल रहेगा, यानी कंपनी नया शेयर जारी नहीं करेगी बल्कि मौजूदा निवेशक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे.
IPO से जुड़ा नियम
इस प्रक्रिया में शामिल मौजूदा शेयरहोल्डर्स IPO में निवेशकों के रूप में भाग नहीं ले सकेंगे. इसके अलावा, IPO से पहले मौजूद सभी शेयरों पर 6 महीने का लॉक-इन पीरियड लागू रहेगा, यानी लिस्टिंग के तुरंत बाद इन शेयरों की बिक्री संभव नहीं होगी.
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