Zepto IPO में पैसा लगाने से पहले जान लें रिस्क फैक्टर्स, रेवेन्यू के बढ़ने की गारंटी नहीं; ED की रडार पर भी है कंपनी
Zepto IPO: कंपनी ने अपने अपडेटेड 'ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस' में बताया कि जुलाई 2021 में शुरू होने के बाद से हर फाइनेंशियल ईयर में उसे नुकसान हुआ है. कामकाज से जुड़ी निर्भरताएं कंपनी के रिस्क प्रोफाइल का एक अहम हिस्सा हैं.
Zepto IPO: क्विक कॉमर्स यूनिकॉर्न जेप्टो ने अपने आने वाले इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए कुछ मुख्य जोखिम बताए हैं. इनमें भारी ऑपरेटिंग नुकसान का इतिहास, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से प्रमोटरों को हाल ही में मिले समन और कंज्यूमर प्रोटेक्शन को लेकर रेगुलेटरी जांच का बढ़ना शामिल है.
नेगेटिव कैश फ्लो
बेंगलुरु हेडक्वार्टर वाली इस कंपनी ने सोमवार को अपने अपडेटेड ‘ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस’ में बताया कि जुलाई 2021 में शुरू होने के बाद से हर फाइनेंशियल ईयर में उसे नुकसान हुआ है. साथ ही, कंपनी ने चेतावनी दी है कि अपने कामकाज का विस्तार करने के दौरान उसे आगे भी नेगेटिव कैश फ्लो का सामना करना पड़ सकता है.
रेवेन्यू बढ़ने की गारंटी नहीं
ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, कंपनी ने कहा है कि हम अपने यूजर बेस और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने, अपने प्लेटफॉर्म पर नए प्रोडक्ट कैटेगरी जोड़ने, अपने प्राइवेट लेबल का विस्तार करने, सप्लाई चेन ऑपरेशन को बढ़ाने, डार्क स्टोर की संख्या बढ़ाने और अपने प्लेटफॉर्म की ब्रांडिंग और विजिबिलिटी को बेहतर बनाने जैसे कामों में निवेश करते रहेंगे, जिससे हमें नुकसान और नेगेटिव कैश फ्लो का सामना करना पड़ सकता है. जेप्टो ने कहा, ‘इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि ऐसे निवेश से भविष्य में हमारा रेवेन्यू बढ़ पाएगा.’
धीमी हो सकती है रेवेन्यू में इजाफे की रफ्तार
इसके अलावा, कंपनी ने कहा कि मांग में कमी, सीमित प्रोडक्ट कैटेगरी जो ग्राहकों की जरूरतों को पूरी तरह से पूरा नहीं करती हैं, या बढ़ते कॉम्पिटिशन के कारण प्लेटफॉर्म पर शामिल होने वालों की संख्या में कम बढ़ोतरी, साथ ही रेगुलेटरी और कंप्लायंस से जुड़ी बढ़ती लागत जैसे कारणों से उसके रेवेन्यू में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी हो सकती है.
जेप्टो का नेट लॉस
डॉक्यूमेंट से पता चला कि जेप्टो का नेट लॉस पिछले फाइनेंशियल ईयर के 4,699.71 करोड़ रुपये से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 5,905.19 करोड़ रुपये हो गया, जबकि इस फ़ाइनेंशियल ईयर के दौरान कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू दोगुने से अधिक हो गया- FY25 में 11,109.94 करोड़ रुपये के मुकाबले FY26 में यह 22,623.58 करोड़ रुपये तक पहुंच गया.
31 मार्च 2026 को खत्म हुई तिमाही के लिए, ज़ेप्टो ने अपना नेट लॉस कम करके 1,538.67 करोड़ रुपये कर दिया, जो Q4 FY25 में 1,831.91 करोड़ रुपये था. तिमाही रेवेन्यू 75.26 फीसदी बढ़कर 7,497.64 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल इसी अवधि में 4,278.06 करोड़ रुपये था.
कानूनी रिस्क
डॉक्यूमेंट में एक अहम कानूनी रिस्क का जिक्र है, जो 8 अप्रैल 2026 को डायरेक्टरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ED) द्वारा प्रमोटरों – आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा – को जारी किए गए समन से जुड़ा है. इन निर्देशों में फाउंडर्स से विदेशी निवेश, शेयरहोल्डिंग पैटर्न और उनके बिजनेस मॉडल से जुड़े डॉक्यूमेंट और जानकारी पेश करने के लिए कहा गया था.
जेप्टो ने कहा कि हालांकि, इस अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस-I की तारीख तक, अपना जवाब देने के बाद से हमें ED से कोई और जानकारी नहीं मिली है, लेकिन हम यह गारंटी नहीं दे सकते कि भविष्य में कोई पूछताछ नहीं होगी या ये मामले जांच, कानूनी कार्यवाही या किसी भी संभावित जुर्माने का एक्शन हो सकता है.
डार्क पैटर्न
जेप्टो ने अपने प्लेटफॉर्म पर ‘डार्क पैटर्न’ (यानी धोखा देने वाले डिजाइन पैटर्न) के कथित इस्तेमाल को लेकर सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) के साथ चल रही चुनौतियों के बारे में भी विस्तार से बताया. इन पैटर्न्स में बास्केट स्नीकिंग, गुमराह करने वाले विज्ञापन और ड्रिप प्राइसिंग शामिल हैं.
रेगुलेटर ने डार्क पैटर्न से जुड़े नियमों का पालन न करने पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था. कंपनी ने इस आदेश के खिलाफ नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) में अपील की है.
कंपनी ने बताया कि इस मामले में अंतरिम रोक (स्टे) मिल गई है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि अगर कोई बुरा नतीजा निकलता है या कानूनों की व्याख्या में बदलाव होता है, तो इससे उसके कामकाज और बिजनेस की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है.
कामकाज से जुड़ी निर्भरताएं
कामकाज से जुड़ी निर्भरताएं कंपनी के रिस्क प्रोफाइल का एक अहम हिस्सा हैं. जेप्टो ने बताया है कि उसका डिलीवरी मॉडल काफी हद तक उसके डार्क स्टोर नेटवर्क की लोकेशन, साइज और डेंसिटी पर निर्भर करता है.
जेप्टो ने कहा, ‘अगर हम अपने डार्क स्टोर नेटवर्क को कम लागत में मैनेज और उसका विस्तार नहीं कर पाते हैं, तो इसका हमारे बिजनेस, आर्थिक स्थिति, कैश फ्लो और कामकाज के नतीजों पर बुरा असर पड़ सकता है.’
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
Latest Stories
सिर्फ 5 साल पुरानी डायपर कंपनी, कमाई में बंपर उछाल, अब ₹1000 करोड़ का IPO लाने की तैयारी; FirstCry से सीधा नाता
भारत की दूसरी सबसे बड़ी बीयर कंपनी Carlsberg ला रही है IPO, 6650 करोड़ के इश्यू की तैयारी
वेल्डर से इंजीनियर तक के पास दौलत बनाने का मौका, SpaceX का IPO लिख रहा अनोखी कहानी; कर्मचारी बनेंगे करोड़पति
