NRI छात्रों और प्रोफेशनलों के लिए टैक्स नियम सख्त, जानें क्या होगा असर
बजट 2025 में NRIs, छात्रों और युवा पेशेवरों के लिए टैक्स नियम कड़े कर दिए गए हैं. अब विदेशी इनकम की रिपोर्टिंग, NRI टैक्स रेजिडेंसी पर सख्त निगरानी होगी. इससे विदेश में कमाने वाले भारतीयों को अधिक टैक्स अनुपालन करना होगा, जिससे डबल टैक्सेशन और वित्तीय जटिलताएं बढ़ सकती हैं.
NRI Tax Rules: बजट 2025 में NRIs के लिए टैक्स नियम सख्त कर दिए गए हैं, जिससे विदेश में पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र और युवा प्रोफेशनल प्रभावित होंगे. सरकार ने विदेशी इनकम की निगरानी, NRI टैक्स रेजिडेंसी की परिभाषा को कड़ा करने और टैक्स संधियों (DTAA) में बदलाव का संकेत दिया है. बजट 2025 में NRI टैक्स नियम सख्त होने से विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए फाइनेंशियल मैनेजमेंट जटिल हो सकता है. टैक्स ट्रांसपेरेंसी को बढ़ाने के नाम पर सरकार ने विदेशी इनकम की रिपोर्टिंग और टैक्स देनदारियों बढ़ा दिए हैं.
क्या होगा बदलावों का असर
- विदेश में कमाई पर सख्त जांच – अब भारत सरकार विदेशी इनकमकी रिपोर्टिंग के लिए अन्य देशों के साथ डेटा साझा करेगी. इससे छात्रों और प्रोफेशनलों को अपनी विदेशी कमाई को भारत में भी घोषित करना पड़ सकता है.
- NRI टैक्स स्टेटस पर असर – पहले NRIs को तभी भारतीय इनकमपर टैक्स देना पड़ता था, जब वे एक साल में 182 दिन से अधिक भारत में रहते थे. बजट 2020 में इसे 120 दिन कर दिया गया था और अब इसे और सख्त किया जा सकता है.
- टैक्स संधियों (DTAA) में बदलाव – भारत, अमेरिका, यूके, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ अपने टैक्स समझौतों को बदल सकता है, जिससे विदेशी कमाई पर टैक्स बढ़ सकता है.
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छात्रों और प्रोफेशनलों को क्या करना चाहिए?
- विदेशी आय, बैंक खातों और निवेशों की सही रिपोर्टिंग करें ताकि पेनल्टी और कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके.
- भारत पैसे भेजने पर टैक्स जांच बढ़ सकती है, इसलिए LRS (Liberalized Remittance Scheme) के नियमों का पालन करें.
- भारत लौटते समय टैक्स प्लानिंग करें, क्योंकि विदेशी संपत्ति और निवेश घोषित नहीं करने पर ब्लैक मनी एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है.
क्या छात्रों को चिंता करनी चाहिए?
छात्रों को अभी तुरंत असर महसूस नहीं होगा, लेकिन अगर वे विदेश में नौकरी करना या स्थायी निवास (PR) लेना चाहते हैं, तो उन्हें टैक्स प्लानिंग करनी होगी. भारत लौटने वाले लोगों को भी अपने विदेशी निवेश और टैक्स स्थिति का ध्यान रखना होगा.
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