CBDT ने TDS सर्टिफिकेट जारी करने की तारीख बढ़ाई, टैक्सपेयर्स को मिली बड़ी राहत; जानें नई डेडलाइन
CBDT ने TDS सर्टिफिकेट जारी करने की समयसीमा बढ़ाकर टैक्सपेयर्स और डिडक्टर्स को बड़ी राहत दी है. ई-फाइलिंग पोर्टल पर तकनीकी समस्याओं के चलते यह फैसला लिया गया, जिससे कई लोग समय पर सर्टिफिकेट जारी नहीं कर पा रहे थे. अब दिसंबर 2025 तिमाही के लिए TDS सर्टिफिकेट की नई अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई है.
TDS Certificate Deadline Extension: आयकर से जुड़े एक महत्वपूर्ण अपडेट में सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्स (CBDT) ने TDS सर्टिफिकेट जारी करने की समयसीमा बढ़ा दी है. यह फैसला ई-फाइलिंग पोर्टल पर आई तकनीकी समस्याओं के चलते लिया गया है, जिससे बड़ी संख्या में डिडक्टर्स समय पर सर्टिफिकेट जारी नहीं कर पा रहे थे. अब दिसंबर 2025 तिमाही (Q3) के लिए TDS सर्टिफिकेट जारी करने की नई अंतिम तिथि 31 मार्च 2026 तय की गई है.
तकनीकी गड़बड़ी बनी बड़ी वजह
CBDT ने अपने सर्कुलर में माना है कि ई-फाइलिंग पोर्टल पर लगातार तकनीकी गड़बड़ियां सामने आ रही थीं, जिसके कारण नियोक्ता, बैंक और अन्य डिडक्टर्स निर्धारित समय सीमा के भीतर TDS सर्टिफिकेट जनरेट और जारी नहीं कर पा रहे थे. इस समस्या को देखते हुए विभाग ने समयसीमा बढ़ाने का निर्णय लिया, ताकि संबंधित पक्षों को राहत मिल सके और कंप्लायंस में किसी तरह की परेशानी न हो.
31 मार्च तक मिलेगा समय
नई व्यवस्था के तहत, जो भी TDS सर्टिफिकेट 31 मार्च 2026 तक जारी किए जाएंगे, उन्हें समय पर जारी माना जाएगा. यानी डिडक्टर को किसी तरह की देरी का दंड नहीं झेलना पड़ेगा. यह राहत खासतौर पर उन संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण है, जो तकनीकी कारणों से समयसीमा का पालन नहीं कर पाए थे.
क्या होता है TDS सर्टिफिकेट
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 203 के तहत, जो भी व्यक्ति या संस्था स्रोत पर कर कटौती (TDS) करती है, उसे संबंधित करदाता को TDS सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होता है. इस सर्टिफिकेट में कटौती करने वाले का नाम, टीएएन, कटे हुए कर की राशि और दर जैसी जानकारी होती है. यह दस्तावेज करदाताओं के लिए बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इसी के आधार पर वे अपने आयकर रिटर्न में टैक्स क्रेडिट क्लेम करते हैं.
टैक्सपेयर्स के लिए क्यों है अहम
TDS सर्टिफिकेट की मदद से टैक्सपेयर्स यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उनके खाते से काटा गया कर सही तरीके से दर्ज हुआ है या नहीं. इसके आधार पर वे यह भी तय कर पाते हैं कि उन्हें अतिरिक्त टैक्स जमा करना है या रिफंड मिल सकता है. खासकर पेंशनभोगी, सैलरीड कर्मचारी और बैंक एफडी धारकों के लिए यह दस्तावेज बेहद महत्वपूर्ण होता है.
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