होम लोन में नहीं कवर होते घर के हादसे, गाजियाबाद-दिल्ली AC ब्लास्ट से लें सबक, जानें क्या होता होम इंश्योरेंस

AC अब खतरे की वजह भी बनता जा रहा है. हाल के दिनों में AC ब्लास्ट के कई मामले सामने आए हैं. गाजियाबाद और दिल्ली के विवेक विहार में हुए हादसों ने लोगों को डरा दिया है. इन घटनाओं में आग लगने से कई घर जल गए और लोगों का लाखों रुपए का नुकसान हुआ. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर आपके घर में आग लग जाए तो आप अपने नुकसान की भरपाई कैसे करेंगे.

होम लोन में नहीं कवर होते घर के हादसे Image Credit: Canva/Money9 live

How to Get Home Insurance: देशभर में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है. लोग गर्मी से राहत पाने के लिए AC का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन यही AC अब खतरे की वजह भी बनता जा रहा है. हाल के दिनों में AC ब्लास्ट के कई मामले सामने आए हैं. गाजियाबाद और दिल्ली के विवेक विहार में हुए हादसों ने लोगों को डरा दिया है. इन घटनाओं में आग लगने से कई घर जल गए और लोगों का लाखों रुपए का नुकसान हुआ.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि अगर आपके घर में आग लग जाए तो आप अपने नुकसान की भरपाई कैसे करेंगे. क्या इसका कोई सुरक्षित तरीका है. जवाब है हां. होम इंश्योरेंस एक ऐसा तरीका है जो आपको इस तरह के नुकसान से बचा सकता है. आइए विस्तार से समझते हैं पूरा मामला.

गाजियाबाद और दिल्ली के विवेक विहार में क्या हुआ

29 अप्रैल को गाजियाबाद की एक सोसाइटी में बड़ा हादसा हुआ. एक फ्लैट में अचानक आग लग गई. देखते ही देखते आग 7 मंजिल तक फैल गई. धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया. शुरुआती जांच में पता चला कि यह हादसा AC ब्लास्ट या शॉर्ट सर्किट से हुआ हो सकता है.

दिल्ली में भी एक बड़ा हादसा हुआ. चार मंजिला इमारत में आग लग गई. कई लोग घायल हुए और कुछ की मौत भी हो गई. आग तेजी से फैल गई और कई फ्लैट इसकी चपेट में आ गए. इस घटना ने लोगों को और ज्यादा सतर्क कर दिया है.

होम इंश्योरेंस क्यों जरूरी है

अगर घर में आग लग जाए तो बड़ा नुकसान हो सकता है. हमने हाल के इन दो घटनाओं में देखा. घर का स्ट्रक्चर खराब हो सकता है. फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक्स जल सकते हैं. लाखों का नुकसान हो सकता है. ऐसे में होम इंश्योरेंस आपकी मदद करता है. यह नुकसान की भरपाई करता है और आपको आर्थिक राहत देता है.

होम इंश्योरेंस कैसे लें

देश में ज्यादातर लोग अपने घर का बीमा नहीं करवाते. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सिर्फ 1-2% लोग ही होम इंश्योरेंस लेते हैं. ऐसे में आग, चोरी या किसी हादसे में बड़ा नुकसान हो सकता है. घर का बीमा आप एजेंट, बैंक, ऑनलाइन वेबसाइट या किसी ऐप के जरिए ले सकते हैं. आजकल ज्यादातर कंपनियां तुरंत डिजिटल पॉलिसी भी देती हैं. अलग-अलग कंपनियों के प्लान और कीमत (प्रीमियम) जरूर तुलना करके लें.

क्या-क्या कवर होता है?

होम इंश्योरेंस में दो चीजें कवर होती हैं: इसमें बिल्डिंग, घर का सामान जिसमें फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और पर्सनल चीजें शामिल होती है. कई पॉलिसी में घर के सामान का 20% तक ऑटो कवर भी मिल जाता है (एक लिमिट तक).

होम लोन में नहीं कवर होते घर के हादसे

अक्सर लोग मानते हैं कि होम लोन लेने के साथ उनका घर पूरी तरह सुरक्षित हो जाता है, लेकिन यह सच नहीं है. होम लोन सिर्फ घर खरीदने के लिए बैंक से लिया गया कर्ज होता है, इसमें आग, चोरी या किसी हादसे से हुए नुकसान का कवर शामिल नहीं होता.

अगर घर में आग लग जाए या कोई बड़ा नुकसान हो जाए, तो बैंक उसकी भरपाई नहीं करता और आपको EMI भी भरनी पड़ती है. ऐसे में घर और उसमें रखे सामान की सुरक्षा के लिए अलग से होम इंश्योरेंस लेना जरूरी होता है.

होम इंश्योरेंस में किन जोखिमों से मिलती है सुरक्षा?

इस बीमा में आमतौर पर ये नुकसान कवर होते हैं:

  • आग, धमाका
  • बाढ़, तूफान, भूकंप
  • पाइप फटना, पानी से नुकसान
  • दंगा, आतंकवाद या तोड़फोड़
  • चोरी

अतिरिक्त सुविधाएं (Add-ons)

आप चाहें तो कुछ extra कवर भी ले सकते हैं: इसमें कीमती सामान (जैसे ज्वेलरी) और पर्सनल एक्सीडेंट कवर (एक तय रकम तक) शामिल कर सकते है. बीमा की कीमत घर के साइज, लोकेशन और निर्माण लागत के हिसाब से तय होती है. यह बाजार कीमत पर नहीं, बल्कि दोबारा बनाने की लागत पर आधारित होता है. इसमें मलबा हटाने का खर्च, आर्किटेक्ट या सर्वेयर फीस, घर रहने लायक न हो तो अस्थायी रहने की सुविधा और किराए के नुकसान का मुआवजा भी शामिल होता है.

कितना खर्च आएगा?

उदाहरण के तौर पर, 10 लाख रुपये के कवर पर करीब ₹400 सालाना प्रीमियम लग सकता है (यह अनुमानित है). कम खर्च में होम इंश्योरेंस आपको बड़े नुकसान से बचा सकता है. इसलिए घर की सुरक्षा के लिए यह एक जरूरी कदम माना जा रहा है. क्लेम लेना भी आसान है. अगर आग लगती है तो आपको तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को जानकारी देनी होती है. नुकसान का सबूत देना होता है. कंपनी जांच करती है. उसके बाद आपको मुआवजा दिया जाता है.

सोर्स: Policy Bazzar

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