क्या आपका भी कटा है गड़बड़ चालान? ऐसे कर सकते हैं चैलेंज, जानें कैसे करा सकते हैं माफ
अगर आपके नाम ऐसा ट्रैफिक चालान आ गया है, जो आपको गलत लगता है, तो अब उसे नजरअंदाज करने की गलती मत कीजिए. सरकार ने साफ कर दिया है कि गलत चालान को चुनौती देने का पूरा अधिकार आपके पास है. सड़क परिवहन मंत्रालय ने ट्रैफिक और ई-चालान को लेकर नई प्रक्रिया नोटिफाई की है, जिसमें बताया गया है कि चालान को कैसे, कहां और कितने समय में चुनौती दी जा सकती है.
Wrong challan dispute process: कई बार ऐसा होता है कि ट्रैफिक नियम तोड़े बिना भी मोबाइल पर चालान का मैसेज आ जाता है. न गाड़ी उस जगह थी, न आपने नियम तोड़ा, फिर भी चालान कट गया. अब ऐसे गलत चालान को लेकर भटकने की जरूरत नहीं है. क्यों कि सरकार ने साफ कर दिया है कि गलत चालान को चुनौती देने का पूरा अधिकार आपके पास है. सड़क परिवहन मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि ट्रैफिक और ई-चालान को कैसे चुनौती दी जा सकती है और इसके लिए कितने दिन का समय मिलेगा. इसके अलावा सरकार ने इस पूरे प्रक्रिया को भी समझाया है. आइए जानते हैं कैसे.
क्या ट्रैफिक चालान को चुनौती दी जा सकती है
इसका जवाब है हां, अगर आपको लगता है कि आपके नाम जारी किया गया चालान गलत है, तो आप उसे चुनौती दे सकते हैं. चालान मिलने के बाद आपके पास 45 दिन का समय होता है. इस दौरान आपको केंद्रीय ई-चालान परिवहन पोर्टल पर जाकर चालान को स्वीकार करना होगा या फिर उसे चुनौती देनी होगी. चुनौती देने की स्थिति में आपको अपने पक्ष में डॉक्यूमेंट्री सबूत भी अपलोड करने होंगे. अगर 45 दिन के भीतर आपने कोई कदम नहीं उठाया, तो माना जाएगा कि आपने चालान स्वीकार कर लिया है.
चालान कब तक भरना जरूरी होगा
अगर आपने 45 दिन के भीतर चालान को चुनौती नहीं दी, तो इसे स्वीकृत माना जाएगा. ऐसे में चालान जारी होने की तारीख से कुल 75 दिनों के भीतर यानी अगले 30 दिनों में जुर्माना भरना जरूरी होगा. पेमेंट ऑनलाइन या ऑफलाइन, दोनों तरीकों से किया जा सकता है. अब तक अगर 90 दिन तक चालान नहीं भरा जाता था, तो मामला सीधे वर्चुअल कोर्ट में चला जाता था. लेकिन कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण परिवहन विभाग आरसी और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी सेवाएं रोक नहीं पाता था. इसी वजह से कई लोग चालान को नजरअंदाज कर देते थे. नए नियमों के तहत अब कोई भी चालान अपने आप कोर्ट नहीं जाएगा.
जब आप चालान को चुनौती देते हैं तो क्या होता है
अगर आपने पोर्टल के जरिए चालान को चुनौती दी है, तो संबंधित अथॉरिटी को 30 दिनों के भीतर उस पर फैसला करना होगा. आपके दिए गए सबूतों और दलीलों को सुनने के बाद अगर अधिकारी संतुष्ट होता है, तो चालान कैंसिल किया जा सकता है. यह आदेश लिखित रूप में पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. अगर आपकी आपत्ति खारिज होती है, तो उसके कारण भी लिखित रूप में बताए जाएंगे और फिर आपको 30 दिनों के भीतर चालान भरना होगा.
अगर आदेश से संतुष्ट नहीं हैं तो क्या विकल्प है
अगर अथॉरिटी के फैसले से आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आप कोर्ट का रुख कर सकते हैं. इसके लिए आपको चालान राशि का 50 फीसदी पहले जमा करना होगा. अगर न तो पेमेंट किया गया और न ही कोर्ट में चुनौती दी गई, तो माना जाएगा कि आपने आदेश स्वीकार कर लिया है और 15 दिनों के भीतर पूरी राशि भरनी होगी.
चालान नहीं भरा तो क्या सजा मिलेगी
अगर तय समयसीमा तक चालान नहीं भरा गया, तो आपको रोजाना नोटिस भेजा जाएगा. इसके बावजूद भुगतान नहीं करने पर आपका ड्राइविंग लाइसेंस या व्हीकल रजिस्ट्रेशन ‘Not to be Transacted’ के रूप में फ्लैग कर दिया जाएगा. इसका मतलब यह है कि आरसी ट्रांसफर, रिन्यूअल, डुप्लीकेट लाइसेंस या दूसरी सेवाएं नहीं मिलेंगी. हालांकि टैक्स से जुड़े कामों को इससे बाहर रखा गया है.
क्या ये नियम सभी चालानों पर लागू होंगे
हालांकि ध्यान देने वाली बात ये भी है कि, ये नियम सिर्फ कंपाउंडेबल चालानों पर लागू होंगे, यानी ऐसे चालान जिनका पेमेंट मौके पर या पोर्टल के जरिए किया जा सकता है. नॉन-कंपाउंडेबल चालानों का निपटारा अभी भी कोर्ट के जरिए ही होगा. हालांकि सरकार ने जन विश्वास बिल 2.0 के तहत ज्यादातर नॉन-कंपाउंडेबल अपराधों को भी कंपाउंडेबल बनाने का प्रस्ताव दिया है.
किन राज्यों में चालान निपटाने की रफ्तार है धीमी
आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में ई-चालान निपटाने की दर सिर्फ 23 प्रतिशत है, जबकि गोवा और जम्मू-कश्मीर में यह 94 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है. बिहार में 23 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 25 प्रतिशत और अरुणाचल प्रदेश में 14 प्रतिशत चालान ही निपटाए जा पाए हैं. कुल मिलाकर जनवरी 2015 से अब तक 41 करोड़ चालान जारी किए गए, जिनकी कुल राशि 62,212 करोड़ रुपये रही. इनमें से 15.6 करोड़ चालान निपटाए गए है.
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