अपना घर खरीद लिया या किराए पर रहते हैं? दोनों के लिए हैं अलग इनकम टैक्स नियम, जानें कैसे हो सकती है बचत
किराए के मकान में रहने वालों के लिए आयकर कानून में अलग-अलग टैक्स नियम तय हैं. किराया मिलने पर टैक्स, होम लोन ब्याज, HRA और सेक्शन 80GG के तहत कटौती के स्पष्ट प्रावधान हैं. सही जानकारी से टैक्स प्लानिंग और बचत दोनों आसान हो जाती है.
पुरानी पीढ़ी के लोग और वे जो शेयर बाजार में पैसा लगाने में सहज नहीं होते है ऐसे लोग आमतौर पर रियल एस्टेट में निवेश करना पसंद करते हैं. इसका कारण संपत्ति की कीमत में बढ़ोतरी के साथ-साथ किराए से होने वाली नियमित आय है. वहीं दूसरी ओर कुछ लोग ऐसे भी हैं जो खुद के रहने के लिए भी घर खरीदने में विश्वास नहीं रखते और किराए के मकान में रहना ही बेहतर समझते हैं. ऐसे में घर के किराए से होने वाली आय और किराया चुकाने पर मिलने वाले टैक्स लाभ को समझना बेहद जरूरी हो जाता है. हम आपको इस आर्टिकल में रेंटल इनकम और रेंट चुकाने पर लागू होने वाले इनकम टैक्स के नियमों के बारे में बता रहे हैं.
मकान से मिलने वाले किराए पर टैक्स कैसे लगता है
किसी मकान से साल भर में प्राप्त किराया या वह राशि जिस पर वह मकान साल भर के लिए किराए पर दिया जा सकता है. इन दोनों में से जो अधिक हो उसे उस संपत्ति की सकल वार्षिक मूल्य (Gross Annual Value) माना जाता है. यदि आपने नगर निगम टैक्स का भुगतान किया है तो उसे सकल वार्षिक मूल्य से घटाकर वार्षिक मूल्य निकाला जाता है. इसके बाद 30 प्रतिशत की फ्लैट कटौती दी जाती है और शेष राशि टैक्स योग्य मानी जाती है.
पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में किराए पर दी गई संपत्ति के लिए सेक्शन 24(b) के तहत लिए गए होम लोन पर चुकाए गए पूरे ब्याज की कटौती मिलती है. हालांकि, हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान को अन्य आय के खिलाफ अधिकतम 2 लाख रुपये तक ही समायोजित किया जा सकता है. बचा हुआ नुकसान अगले आठ वर्षों तक केवल हाउस प्रॉपर्टी की आय से समायोजित किया जा सकता है.
वहीं, नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में हाउस प्रॉपर्टी से होने वाले नुकसान को न तो अन्य आय से समायोजित किया जा सकता है और न ही आगे ले जाया जा सकता है. इस स्थिति में ब्याज की कटौती केवल किराए से होने वाली टैक्स योग्य आय तक ही सीमित रहती है.
मकान से प्राप्त किराया, चाहे उसे किसी भी नाम से प्राप्त किया जाए वो केवल Income from House Property के अंतर्गत ही टैक्स योग्य होता है. हालांकि, यदि आप किसी संपत्ति को सबलेट करते हैं तो उससे मिलने वाली आय Income from Other Sources के तहत टैक्स योग्य मानी जाती है.
निर्माण अवधि के दौरान चुकाए गए ब्याज की कटौती कैसे मिलेगी
अंडर-कंस्ट्रक्शन या स्वयं निर्माणाधीन मकान के लिए लिए गए लोन पर चुकाए गए ब्याज की कटौती मकान का कब्जा मिलने के वर्ष से मिलती है. निर्माण अवधि के दौरान चुकाए गए ब्याज को पांच बराबर किस्तों में बांटकर, कब्जा मिलने के वर्ष से कटौती के रूप में लिया जा सकता है. यदि मकान को पांच वर्षों के भीतर बेच दिया जाता है, तो इस कटौती का लाभ समाप्त हो जाता है.
संयुक्त स्वामित्व वाले मकान के किराए पर टैक्स कैसे लगेगा
संयुक्त रूप से खरीदी गई संपत्ति से मिलने वाला किराया, प्रत्येक सह-मालिक द्वारा संपत्ति की लागत में किए गए योगदान के अनुपात में टैक्स के लिए दिखाया जाना चाहिए. यदि केवल नाम जोड़ने के लिए पत्नी को सह-मालिक बनाया गया है और उन्होंने कोई वित्तीय योगदान नहीं दिया है तो उनके नाम पर किराया दिखाना गलत है.
सैलरी पाने वालों को किराया देने पर टैक्स में क्या राहत मिलती है
पुरानी टैक्स व्यवस्था में HRA पाने वाले कर्मचारी किराए पर दिए गए मकान के लिए कटौती का दावा कर सकते हैं. यह कटौती निम्न में से जो सबसे कम हो, उतनी मिलेगी.
- वास्तविक HRA
- मेट्रो शहरों में बेसिक सैलरी का 50% (अन्य शहरों में 40%)
- बेसिक सैलरी के 10% से अधिक दिया गया किराया
क्या होम लोन और HRA दोनों का लाभ लिया जा सकता है
यदि शर्तें पूरी होती हैं, तो कोई भी व्यक्ति दोनों लाभ एक साथ ले सकता है. भले ही उसका खुद का मकान किराए पर न दिया गया हो.
सेल्फ एम्प्लॉयड के लिए किराए पर टैक्स लाभ
स्व-रोजगार करने वाला व्यक्ति सेक्शन 80GG के तहत किराए पर कटौती का दावा कर सकता है.
- अधिकतम ₹60,000 सालाना (₹5000 प्रति माह), या
- आपकी कुल आय का 25%, या
- आपने जो किराया दिया है, उसमें से आपकी कुल आय का 10% घटाकर
इन तीन में से जो रकम सबसे कम होगी उतनी ही छूट मिलती है.
लेखक एक टैक्स और इंवेस्टमेंट एक्सपर्ट हैं. यहां व्यक्त विचार उनके निजी हैं. आप उन्हें jainbalwant@gmail.com पर या ट्विटर हैंडल @jainbalwant पर संपर्क कर सकते हैं.




