चांदी की कीमतों पर कैसे पड़ सकता है बजट का असर! इन फैसलों पर रहेगी नजर; ये फैक्टर तय करेंगे कीमतों की दिशा
केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले चांदी निवेशकों और इंडस्ट्री दोनों के फोकस में है. रिकॉर्ड ऊंचाई से आई गिरावट, इंपोर्ट ड्यूटी में संभावित बदलाव, ग्रीन एनर्जी और EV सेक्टर की बढ़ती मांग के बीच बजट के फैसले चांदी की कीमतों और खपत की दिशा तय कर सकते हैं.
Budget and Silver Price Announcement: केंद्रीय बजट 2026 से पहले निवेशकों और इंडस्ट्री की नजर चांदी पर टिकी हुई है. चांदी ऐसी धातु है, जो एक तरफ सुरक्षित निवेश का विकल्प मानी जाती है और दूसरी तरफ इंडस्ट्री के लिए बेहद जरूरी कच्चा माल भी है. मौजूदा समय में चांदी की कीमतें कई सालों के ऊंचे स्तर पर बनी हुई थी और ऐसे में बजट से जुड़े फैसले इसकी मांग और भाव दोनों पर गहरा असर डाल सकते हैं.
चांदी ने मचाई खूब हलचल
साल 2026 की शुरुआत में ही चांदी के बाजार में जबरदस्त हलचल देखने को मिली है. 31 जनवरी को MCX पर चांदी का फ्यूचर भाव करीब 2,91,922 रुपये प्रति किलो के आसपास कारोबार करता दिखा. हालांकि, ये भाव चांदी की कीमत में आई 1 लाख रुपये से ज्यादा की गिरावट के बाद की है. खैर, गिरने से पहले चांदी की कीमत में आ रही इस तेजी के पीछे वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, जियो पॉलिटिकल टेंशन, महंगाई का दबाव, रुपये में कमजोरी और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग जैसे कई कारण रहे हैं. दुनिया भर में जब जोखिम बढ़ता है, तो निवेशक कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं और इसका सीधा फायदा चांदी को मिलता है.
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बजट में चांदी के लिए क्या कुछ हो सकता है?
बजट में चांदी से जुड़ा सबसे अहम मुद्दा इंपोर्ट ड्यूटी का हो सकता है. भारत अपनी जरूरत की 80 फीसदी से ज्यादा चांदी आयात करता है, इसलिए ड्यूटी में हल्का सा बदलाव भी घरेलू कीमतों पर तुरंत असर डाल देता है. फिलहाल चांदी पर करीब 7.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी और 3 फीसदी जीएसटी लगता है. अगर सरकार बजट में इंपोर्ट ड्यूटी घटाने का फैसला करती है, तो घरेलू बाजार में कीमतें कुछ नरम हो सकती हैं, जिससे ज्वेलरी खरीदने वालों और निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ेगी. वहीं, ड्यूटी बढ़ने की स्थिति में चांदी और महंगी हो सकती है, जिससे मांग पर दबाव पड़ सकता है.
सेक्टर की क्या है मांग?
मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर लंबे समय से सरकार से टैक्स स्ट्रक्चर को आसान बनाने की मांग कर रहा है. इंडस्ट्री का मानना है कि इंपोर्ट ड्यूटी और जीएसटी में राहत मिलने से घरेलू मांग बढ़ेगी और भारतीय ज्वेलरी प्रोडक्ट वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे. अगर बजट में इस दिशा में कोई कदम उठाया जाता है, तो इसका इनडायरेक्ट फायदा चांदी की खपत को भी मिल सकता है.
इंडस्ट्रियल डिमांड में तेजी
निवेश के अलावा चांदी की इंडस्ट्रियल मांग भी लगातार बढ़ रही है. बजट 2026 से ग्रीन एनर्जी और रिन्यूएबल सेक्टर को लेकर काफी उम्मीदें हैं. चांदी का इस्तेमाल सोलर पैनल बनाने में बड़े पैमाने पर होता है, क्योंकि इसकी विद्युत चालकता बेहद अच्छी होती है. अगर बजट में सोलर एनर्जी, रिन्यूएबल इंफ्रास्ट्रक्चर और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलता है, तो आने वाले समय में चांदी की इंडस्ट्रियल मांग में 15 से 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.
EV भी अहम फैक्टर
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) सेक्टर भी चांदी की मांग बढ़ाने वाला बड़ा फैक्टर बन रहा है. EV में पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में चांदी का इस्तेमाल होता है. अगर बजट में EV अपनाने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली घोषणाएं होती हैं, तो चांदी की औद्योगिक खपत को और मजबूती मिल सकती है. पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल सेक्टर से चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है. मौजूदा समय में ये सेक्टर कुल इंडस्ट्रियल सिल्वर डिमांड का करीब 68 फीसदी हिस्सा रखते हैं. हालांकि, ऊंचे दाम अब एक नया सवाल भी खड़ा कर रहे हैं- क्या रिकॉर्ड कीमतों पर इंडस्ट्री इसी रफ्तार से चांदी का इस्तेमाल जारी रख पाएगी, या फिर कंपनियां सस्ते विकल्पों की तलाश शुरू करेंगी.
सिल्वर ईटीएफ ने भी किया कमाल
इसके साथ ही निवेशकों की दिलचस्पी भी तेजी से बढ़ी है. बीते साल चांदी से जुड़े ETF में अच्छी खासी निवेश प्रवाह देखने को मिली, जिससे कुल मांग और इंपोर्ट पर दबाव और बढ़ गया. भले ही बजट के फैसले रातों-रात वैश्विक परिस्थितियां न बदलें, लेकिन टैक्स और इंडस्ट्रियल पॉलिसी से जुड़े संकेत यह तय करेंगे कि आने वाले महीनों में चांदी की मांग और कीमतें किस दिशा में जाती हैं. ऐसे में बजट 2026 चांदी के बाजार के लिए एक अहम टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है.
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