Budget 2026 से पहले जान लें कैपिटल बजट, फिस्कल पॉलिसी, रेवेन्यू बजट समेत सभी आसान टर्म, चुटकियों में समझ आ जाएंगे सारे फैसले

जब हम बजट से जुड़ी खबरें पढ़ते हैं, तो अक्सर अटक जाते हैं, क्योंकि उसमें ऐसे कठिन और भारी शब्द होते हैं जो रोजमर्रा की बातचीत में इस्तेमाल नहीं होते. लेकिन अगर इन शब्दों का मतलब ठीक से समझ आ जाए, तो पूरा बजट अपने-आप आसान लगने लगता है. इसलिए बजट 2026 से पहले चलिए, इन्हीं जरूरी शब्दों को बिल्कुल सरल और आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं.

केंद्रीय बजट 2026 Image Credit: money9live.com

Union Budget 2026: 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में देश का बजट पेश करेंगी. बजट आते ही लोगों के जहन में कई सवाल आएंगे. जैसे- महंगाई कम होगी या बढ़ेगी, टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं, सरकार किस सेक्टर पर ज्यादा पैसा खर्च करेगी. इस बार बजट इसलिए भी खास है क्योंकि यह यूनियन बजट रविवार को पेश किया जा रहा है. साथ ही यह बजट ऐसे वक्त में आ रहा है जब दुनिया में अनिश्चितता है और अमेरिका ने भारत से जाने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया है.

बजट की खबरें पढ़ते वक्त अक्सर दिक्कत ये होती है कि उसमें ऐसे भारी-भरकम शब्द होते हैं, जो आम आदमी की रोज की भाषा नहीं हैं. लेकिन अगर इन शब्दों का मतलब साफ हो जाए, तो बजट समझना काफी आसान हो जाता है. ऐसे में बजट 2026 से पहले ऐसे ही जरूरी शब्दों को आइए बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में समझते हैं.

फिस्कल पॉलिसी (Fiscal Policy)

सरकार टैक्स बढ़ाए या घटाए, सब्सिडी दे, चाहे इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाए, ये सब फैसले फिस्कल पॉलिसी कहलाते हैं. बजट असल में इसी पॉलिसी को जमीन पर उतारने का तरीका है.

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कैपिटल बजट

कैपिटल बजट में सरकार के लॉन्ग टर्म खर्च और कमाई का हिसाब होता है. जैसे सरकार ने कितना कर्ज लिया, कितना कर्ज दिया और कहां निवेश किया.

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कैपिटल रिसिप्ट (Capital Receipts)

सरकार को जो पैसा कर्ज लेकर या एसेट बेचकर मिलता है, उसे कैपिटल रिसिप्ट कहते हैं. जैसे — बाजार से लिया गया लोन, ट्रेजरी बिल, विदेशी कर्ज.

कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex)

सरकार जब सड़क, रेलवे, पुल, एयरपोर्ट, मशीन या बिल्डिंग पर पैसा खर्च करती है, तो उसे कैपेक्स कहते हैं. ये खर्च भविष्य में इकॉनमी को मजबूत करता है.

रेवेन्यू बजट (Revenue Budget)

रेवेन्यू बजट में सरकार की डेली इनकम और डेली खर्च का पूरा हिसाब होता है.

रेवेन्यू रिसिप्ट ( Revenue Receipts)

रेवेन्यू रिसिप्ट में सरकार की टैक्स और नॉन-टैक्स से होने वाली वो इनकम शामिल होती है, जिसे वापस नहीं करना पड़ता. रेवेन्यू रिसिप्ट को दो हिस्सों में बांटा जाता है. पहला है टैक्स से मिलने वाली कमाई जैसे- इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स यानी जो कंपनियां देती हैं, जीएसटी यानी सामान और सेवाओं पर लगने वाला टैक्स, एक्साइज ड्यूटी यानी देश में बने सामान पर टैक्स, कस्टम ड्यूटी यानी आयात-निर्यात पर लगने वाला टैक्स. वहीं बिना टैक्स मिलने वाली कमाई जैसे- ब्याज से मिलने वाली इनकम यानी राज्यों या संस्थाओं को दिए गए लोन पर, डिविडेंड और मुनाफा इसके तहत सरकारी कंपनियों और RBI से मिलने वाला पैसा होता है, फीस और जुर्माना जिसके तहत् पासपोर्ट फीस, रेलवे फीस, ट्रैफिक चालान आदि, लाइसेंस फीस, सेवाओं से कमाई यानी पोस्ट ऑफिस, रेलवे जैसी सरकारी सेवाओं से.

रेवेन्यू एक्सपेंडिचर (Revenue Expenditure)

सरकार का वो खर्च जिससे फ्यूचर में सीधा रिटर्न नहीं मिलता. जैसे — सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन, सब्सिडी.

डायरेक्ट टैक्स ( Direct Tax)

जो टैक्स आप खुद सरकार को देते हैं और जिसका बोझ आप पर ही रहता है. जैसे — Income Tax, Corporate Tax.

इनडॉयरेक्ट टैक्स

जो टैक्स आप सामान या सर्विस खरीदते वक्त देते हैं. जैसे — Excise Duty, Customs Duty.इसके तहत् कंपनी टैक्स भरती है, लेकिन पैसा ग्राहक से वसूला जाता है.

एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty)

भारत में बने सामान पर लगने वाला टैक्स, जो देश के अंदर इस्तेमाल के लिए होता है.

कस्टम ड्यूटी (Customs Duty)

जब कोई सामान विदेश से भारत आता है या भारत से बाहर जाता है, उस पर लगने वाला टैक्स.

फिस्कल डेफिसिट (Fiscal Deficit)

जब सरकार का कुल खर्च, उसकी कुल कमाई से ज्यादा हो जाता है (उधार को छोड़कर), तो उसे फिस्कल डेफिसिट कहते हैं. मतलब कि सरकार को खर्च चलाने के लिए कर्ज लेना पड़ता है.

रेवेन्यू डेफिसिट (Revenue Deficit)

जब सरकार की रेवेन्यू रिसिप्ट, उसके रेवेन्यू एक्सपेंडिचर से कम पड़ जाती है, तो उसे रेवेन्यू डेफिसिट कहते हैं. यानी रोजमर्रा का खर्च भी पूरी तरह कमाई से नहीं निकल पा रहा.

प्राइमरी डेफिसिट (Primary Deficit)

यह बताता है कि सरकार का कितना कर्ज सिर्फ ब्याज के अलावा दूसरे खर्चों में जा रहा है. इसे ऐसे समझें Primary Deficit = Fiscal Deficit – Interest Payment

GDP

GDP मतलब देश में एक तय समय में बनी सभी चीजों और सेवाओं की कुल वैल्यू. किसी भी देश की जीडीपी जितनी मजबूत होती है उस देश की इकॉनमी उतनी ही मजबूत होती है.

डिसइन्वेस्टमेंट (Disinvestment)

जब सरकार सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर पैसा जुटाती है, तो उसे डिसइन्वेस्टमेंट कहते हैं. यानी सरकारी एसेट को कैश में बदलना.

इन्फ्लेशन (Inflation)

जब रोजमर्रा की चीजें जैसे सब्जी, दूध, पेट्रोल, किराया महंगा होने लगे, तो उसे इन्फ्लेशन कहते हैं. सीधे शब्दों में कहें तो आपकी सैलरी वही रहती है लेकिन खर्च बढ़ जाता है.

मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy)

यह भारतीय रिजर्व बैंक की पॉलिसी होती है. जिसके तहत् यह फैसला लिया जाता है कि इंटरेस्ट रेट बढ़ानी है या घटानी है. बाजार में पैसा ज्यादा रखना है या कम. ये फैसले मॉनेटरी पॉलिसी में आते हैं. बता दें कि मॉनेटरी पॉलिसी रिजर्व बैंक की जिम्मेदारी होती है ताकि महंगाई और ग्रोथ बैलेंस में रहे.

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