गाड़ी खरीदना आसान लेकिन चलाना महंगा? इन स्मार्ट टिप्स से सालाना खर्च में होगी बड़ी बचत
देश में गाड़ी खरीदना भले ही आसान हो गया हो, लेकिन उसे चलाना और मेंटेन करना लगातार महंगा होता जा रहा है. ईंधन की बढ़ती कीमतें, इंश्योरेंस प्रीमियम और रिपेयर खर्च कार मालिकों की जेब पर दबाव बढ़ा रहे हैं. समय पर मेंटेनेंस, सही ड्राइविंग स्टाइल और टायर केयर जैसे उपाय अपनाकर सालाना खर्च में अच्छी-खासी बचत की जा सकती है.
Car Maintenance Tips: देश में गाड़ी खरीदना अब पहले की तुलना में आसान हो गया है, लेकिन उसे चलाना और मेंटेन करना लगातार महंगा होता जा रहा है. ईंधन की बढ़ती कीमतें, इंश्योरेंस प्रीमियम और नियमित मेंटेनेंस खर्च आम कार मालिकों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं. ऐसे में अनुभवी मैकेनिकों की ओर से बताए गए कुछ सुझाव गाड़ी मालिकों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं. इन उपायों को अपनाकर साल भर में हजारों रुपये की बचत संभव है.
पे ऐज यू ड्राइव इंश्योरेंस से हो सकती है बड़ी बचत
ज्यादातर कार मालिक पूरे साल का इंश्योरेंस प्रीमियम भरते हैं, चाहे गाड़ी ज्यादा चले या बहुत कम. अब पे ऐज यू ड्राइव इंश्योरेंस जैसे विकल्प मौजूद हैं, जिनमें प्रीमियम तय किलोमीटर के आधार पर निर्धारित होता है. अगर गाड़ी का इस्तेमाल सिर्फ ऑफिस या सीमित दूरी के लिए होता है, तो 5,000 या 7,500 किलोमीटर के स्लैब चुनकर प्रीमियम में 25 से 40 फीसदी तक की बचत की जा सकती है. जरूरत पड़ने पर बाद में किलोमीटर लिमिट बढ़ाने का विकल्प भी मिलता है.
मेंटेनेंस में छोटी लापरवाही, बड़ा नुकसान
अनुभव के मुताबिक, ज्यादातर गाड़ियां तब वर्कशॉप पहुंचती हैं, जब नुकसान काफी बढ़ चुका होता है. नियमित सर्विस में ब्रेक कैलिपर की ग्रीसिंग जैसे छोटे काम कराने से माइलेज सुधरता है और इंजन पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता. हर सर्विस पर कुछ सौ रुपये खर्च करने से साल भर में ईंधन पर हजारों रुपये की बचत हो सकती है.
चूहों से होने वाले नुकसान से बचाव जरूरी
कार की वायरिंग काटने वाले चूहे कई बार भारी नुकसान कर देते हैं. ईसीएम तक खराब होने की स्थिति में रिपेयर खर्च 10,000 से 50,000 रुपये तक पहुंच सकता है. ऐसे में रैट रिपेलेंट स्प्रे या इंजन बे में फिनाइल की गोलियों का इस्तेमाल कार को सुरक्षित रखने में मदद करता है.
एयर फिल्टर और स्पार्क प्लग की अनदेखी न करें
गंदा एयर फिल्टर इंजन की परफॉर्मेंस और माइलेज, दोनों को प्रभावित करता है. हर 5,000 किलोमीटर पर फिल्टर की सफाई और तय समय पर बदलाव जरूरी है. फिल्टर को पटककर साफ करना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि इससे टर्बो और इंजन पार्ट्स को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है.
सस्पेंशन और टायर केयर से टलेगा बड़ा खर्च
खराब सड़कों पर तेज गाड़ी चलाने से सस्पेंशन जल्दी खराब हो जाता है. ठंड के मौसम में बुश लुब्रिकेशन और हर 10,000 किलोमीटर पर टायर अलाइनमेंट और बैलेंसिंग कराने से टायर की उम्र बढ़ती है. इससे नए टायर पर होने वाला खर्च लंबे समय तक टल सकता है.
ड्राइविंग स्टाइल भी तय करता है खर्च
गलत ड्राइविंग स्टाइल भी मेंटेनेंस खर्च बढ़ा देती है. क्लच पर पैर रखकर गाड़ी चलाने से क्लच रिलीज बेयरिंग और प्रेशर प्लेट जल्दी खराब हो जाती हैं. वहीं, गाड़ी को 1,500 से 2,000 आरपीएम के बीच चलाने से माइलेज बेहतर रहता है. कुल मिलाकर, सही इंश्योरेंस विकल्प, समय पर मेंटेनेंस और संतुलित ड्राइविंग स्टाइल अपनाकर कार मालिक अपने सालाना खर्च में अच्छी-खासी कटौती कर सकते हैं.
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