Union Budget

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज (MOFSL) ने अपने ताजा नोट में कहा है कि हमें उम्मीद है कि FY27 का केंद्रीय बजट भारत के वित्तीय ढांचे में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा. खास तौर पर डिफेंस और उससे जुड़ी इंडस्ट्रीज के सेंटर स्टेज पर आने की उम्मीद है.

दक्षिण भारत का एक औद्योगिक शहर, जिसने दशकों से भारत के निर्यात को वैश्विक पहचान दिलाई, आज बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है. अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़ा एक फैसला यहां लाखों परिवारों की रोजी-रोटी को प्रभावित कर सकता है. अब सबकी नजर आने वाले बजट पर है, जहां से राहत की उम्मीद बंधी है.

बाजार के कई बड़े खिलाड़ियों ने सरकार से अपील की है कि इक्विटी पर मिलने वाली LTCG की टैक्स-फ्री सीमा को बढ़ाया जाए. अभी निवेशकों को 1.25 लाख रुपये तक के लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स नहीं देना पड़ता.

Budget 2026 में केंद्र सरकार बैंकिंग सेक्टर को लेकर बड़ा रोडमैप पेश कर सकती है. इसका फोकस सरकारी बैंकों के आगे एकीकरण पर रहेगा ताकि बड़े और वर्ल्ड क्लास बैंक तैयार किए जा सकें. अभी भारत के बहुत कम बैंक वैश्विक टॉप लिस्ट में शामिल हैं.

टाटा मोटर्स ने आगामी बजट में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कारों के लिए इंसेंटिव की मांग की है. कंपनी का कहना है कि पेट्रोल कारों पर GST घटने के बाद सस्ती पेट्रोल कारें बाजार में आ गई हैं. इससे सस्ती ईवी कारों पर दबाव बढ़ गया है.

साल 2025 के बजट में सरकार ने मिडिल क्लास को सबसे बड़ा तोहफा दिया था, जहां नई टैक्स व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की सालाना कमाई पर बिल्कुल कोई इनकम टैक्स नहीं लगता. सैलरीड लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ यह सीमा 12.75 लाख तक पहुंच जाती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कभी भारत में इनकम टैक्स इतना ऊंचा था कि कमाई का ज्यादातर हिस्सा सरकार ले जाती थी? 100 रुपये की कमाई पर केवल 2.5 रुपये ही बचते थे.

देश का एक औद्योगिक क्लस्टर, जो दुनिया भर में अपनी कारीगरी और निर्यात क्षमता के लिए जाना जाता है, इन दिनों वैश्विक व्यापार में बदलते समीकरणों से दबाव महसूस कर रहा है. करोड़ों का कारोबार, लाखों रोजगार और विदेशी बाजारों पर निर्भर यह इंडस्ट्री अब सरकार के आगामी फैसलों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है.

केंद्र अगले Budget 2026 में PMFME और PMKSY योजनाओं के लिए लगभग ₹28,000 करोड़ का प्रस्तावित निवेश कर रहा है. इसका उद्देश्य माइक्रो फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, SHGs और FPOs को वित्तीय, तकनीकी और मार्केटिंग सपोर्ट देना है. किसानों के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कोल्ड चेन और एग्रो प्रोसेसिंग क्लस्टर तैयार किए जाएंगे.

बजट 2026 से मिडिल क्लास को टैक्स राहत और रोजगार के मोर्चे पर उम्मीदें हैं. सरकार का फोकस खपत बढ़ाने और महंगाई को काबू में रखने पर रह सकता है. इनकम टैक्स स्लैब में सुधार और स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

बजट सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि यह बताता है कि सरकार की कमाई के मुख्य स्रोत क्या हैं और जनता से जुटाया गया पैसा किन-किन मदों में खर्च होता है. बजट 2025-26 के आंकड़े साफ दिखाते हैं कि सरकार का हर 1 रुपया कहां से आता है और राज्यों, ब्याज, रक्षा, पेंशन और विकास योजनाओं में कैसे खर्च किया जाता है. आसान भाषा में समझिए सरकार के पूरे आर्थिक गणित को.

बजट 2026 से पहले स्पेस सेक्टर निवेशकों के फोकस में है. सरकारी सपोर्ट और बढ़ते खर्च से सीई इन्फो सिस्टम्स, जेनेसिस इंटरनेशनल और एलएंडटी जैसे स्टॉक्स को फायदा मिल सकता है. मजबूत फाइनेंशियल ग्रोथ और ISRO से जुड़ाव इन कंपनियों को लंबी अवधि के लिए आकर्षक बनाता है.

आगरा की पहचान सिर्फ ऐतिहासिक धरोहरों तक सीमित नहीं है. यह शहर भारत के निर्यात इंजन का एक अहम हिस्सा रहा है. लेकिन हाल के वैश्विक घटनाक्रमों ने इस उद्योग को नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है. अब सबकी नजरें 1 फरवरी पर हैं, जहां से इस बिजनेस की दिशा तय हो सकती है.

रिपोर्ट के अनुसार सरकार की कोशिश टैक्स सिस्टम को साधारण और ज्यादा ग्रोथ-फ्रेंडली बनाने की होगी ताकि निवेश और खपत दोनों को बढ़ावा मिले. इनकम टैक्स में क्या बदलाव होंगे, इस पर स्पष्ट संकेत नहीं हैं लेकिन Morgan Stanley का मानना है कि सरकार टैक्स बेस बढ़ाने, कलेक्शन मजबूत करने और उद्योगों के लिए नीतियां आसान करने पर जोर रख सकती है.

वित्त वर्ष 2026–27 का केंद्रीय बजट इस बार कई मायनों में खास होने जा रहा है. पहली बार देश में बजट रविवार, 1 फरवरी को पेश किया जाएगा. आमतौर पर वीकेंड पर संसद सत्र नहीं होता, लेकिन सरकार के फैसले ने इस परंपरा को तोड़ते हुए बजट को ऐतिहासिक बना दिया है.

EPF, NPS और सुपरएन्युएशन जैसी योजनाओं में जमा पैसा सुरक्षित और टैक्स-फ्री रहेगा. लेकिन हकीकत इससे अलग है. असल में सरकार ने इन योजनाओं पर कई सीमाएं तय कर रखी हैं. अगर योगदान इन सीमाओं से ज्यादा हो जाए तो टैक्स लग सकता है. कई मामलों में एक ही पैसे पर बार-बार टैक्स लगता है.

ट्रंप ने उस बिल को एप्रूव कर दिया है, जिसके अमेरिकी कांग्रेस में पारित होने के बाद उन्हें भारत पर 500 फीसदी टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा.

भारत में यूनियन बजट सिर्फ आर्थिक दस्तावेज नहीं, बल्कि देश की वित्तीय सेहत का आधिकारिक हिसाब होता है. इसलिए इसे अत्यधिक गोपनीय रखा जाता है. लेकिन यह गोपनीयता हमेशा से नहीं थी. इतिहास में दो बार ऐसा हुआ जब बजट लीक हुआ और सरकारों को बड़ा झटका लगा. यही वजह है कि आज बजट इतना सिक्रेट रखा जाता है.

Union Budget 2026 भारत के सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए अहम साबित हो सकता है. सरकार पहले ही चिप मैन्युफैक्चरिंग को रणनीतिक सेक्टर मान चुकी है. बजट में नई योजनाओं, सब्सिडी और फंडिंग से OSAT और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को रफ्तार मिलने की उम्मीद है. Kaynes Technology, MosChip Technologies और CG Power जैसी कंपनियां इस फोकस से सीधे तौर पर लाभ उठा सकती हैं.

केंद्रीय बजट 2026 27 की छपाई इस बार भी नार्थ ब्लॉक में ही होगी. हालांकि वित्त मंत्रालय कर्तव्य भवन में शिफ्ट हो चुका है. नई जगह पर प्रिंटिंग प्रेस समय पर पूरी तरह तैयार नहीं हो पाई. बजट 1 फरवरी 2026 को संसद में पेश किया जाएगा. गोपनीयता और डेडलाइन को ध्यान में रखते हुए पुराने और भरोसेमंद नार्थ ब्लॉक प्रेस का इस्तेमाल किया जा रहा है.

Budget FY27 से पहले कृषि क्षेत्र को लेकर हलचल तेज है. टेक्नोलॉजी, डिजिटल सिस्टम और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों पर नई सोच सामने आ रही है. उद्योग और विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सही फैसले लिए गए, तो खेती की दिशा और तस्वीर दोनों बदल सकती हैं.

वित्त मंत्रालय SEBI और RBI के साथ बजट 2026-27 से पहले क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए रेलगुलेटरी स्ट्रक्चर तय करने पर चर्चा कर रहा है. योजना के अनुसार SEBI मुख्य रेगुलेटर होगा, जबकि RBI विदेशी निवेश और सीमा पार लेनदेन की निगरानी करेगा. वर्तमान में निगरानी अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है.

बजट बनाने की जिम्मेदारी Ministry of Finance की होती है, जिसमें अलग-अलग मंत्रालयों से खर्च और योजनाओं के प्रस्ताव मांगे जाते हैं. हर मंत्रालय अपनी जरूरतें भेजता है, लेकिन अंतिम फैसला राजकोषीय स्थिति और प्राथमिकताओं को देखकर लिया जाता है.