वंदे भारत तो आ गई, पर अब भी ऑन डिमांड टिकट दूर की कौड़ी, जानें कहां चूक रही है रेलवे, यात्रियों को चाहिए ये सहूलियतें
सरकार ने रेल यात्रा को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. लेकिन आम यात्री की सबसे बड़ी परेशानी आज भी जस की तस है. कन्फर्म टिकट मिलना. खासकर तुरंत यात्रा करनी हो तो ऑन-डिमांड टिकट मिलना अब भी मुश्किल बना हुआ है.
Budget 2026: तेज रफ्तार, चमचमाते कोच, मॉडर्न स्टेशन और आरामदायक सफर. भारतीय रेलवे ने बीते कुछ सालों में बड़ी छलांग लगाई है. वंदेभारत ट्रेनों से लेकर नए स्टेशन डिजाइन तक. सरकार ने रेल यात्रा को बेहतर बनाने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं. लेकिन आम यात्री की सबसे बड़ी परेशानी आज भी जस की तस है. कन्फर्म टिकट मिलना. खासकर तुरंत यात्रा करनी हो तो ऑन-डिमांड टिकट मिलना अब भी मुश्किल बना हुआ है.
स्टेशन भले चमक गए हों. ट्रेनें नई हो गई हों. मगर अगर टिकट ही न मिले तो इन सुविधाओं का क्या फायदा. यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि वंदेभारत आने के बावजूद यात्रियों को कन्फर्म टिकट क्यों नहीं मिल पा रहा. आखिर रेलवे कहां चूक रही है और लोगों को कौन-कौन सी सहूलियतें चाहिए. आइए विस्तार से समझते हैं.
वंदेभारत का तेजी से विस्तार
जनवरी 2026 तक देश में 164 वंदेभारत ट्रेन सेवाएं चल रही हैं. ये 274 जिलों को जोड़ती हैं. Industrial एरिया, धार्मिक स्थलों और बड़े शहरों तक इनका नेटवर्क फैल चुका है. इन ट्रेनों में 8, 16 और 20 कोच वाले अलग अलग सेट हैं. हाल ही में स्लीपर वर्जन भी लाया गया है. रेलवे का टारगेट है कि साल 2030 तक 800 वंदेभारत ट्रेनें और साल 2047 तक 4500 ट्रेनें चलाई जाएं.
साल 2017 में तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने CII के एक कार्यक्रम में कहा था कि 2020 तक सभी ट्रेनों में यात्रियों को जरूरत के समय कन्फर्म टिकट मिल जाएगा. लेकिन बाद में सरकार ने बताया कि अब भारतीय रेलवे ने नेशनल रेल प्लान के तहत यह लक्ष्य 2030 तक पूरा करने की योजना बनाई है. यानी अब रेलवे कई सालों की रणनीति पर काम कर रही है ताकि भविष्य में यात्रियों को ऑन डिमांड कन्फर्म टिकट मिल सकें.
रोज करोड़ों यात्री, टिकट की भारी मांग
PIB के आंकड़ों के मुताबिक रोज औसतन तीन करोड़ से ज्यादा लोग ट्रेन से सफर करते हैं. साल 2021 से 2023 के बीच करीब 40 करोड़ से ज्यादा वेटिंग टिकट बुक हुए. यानी रोज लगभग साढ़े तीन लाख लोग वेटिंग लिस्ट में रहते हैं. इनमें से सिर्फ 20 से 25 प्रतिशत टिकट ही कन्फर्म हो पाते हैं. IRCTC का नया टिकट सिस्टम अब एक मिनट में डेढ़ लाख टिकट बुक कर सकता है. लेकिन इनमें बड़ी संख्या वेटिंग की भी होती है.
कैंसिल वेटिंग टिकट से भी कमाई
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक एक RTI के जवाब में सामने आया है कि रेलवे को वेटिंग टिकट कैंसिल होने से भी बड़ी रकम मिल रही है. साल 2021 में करीब 2.5 करोड़ वेटिंग टिकट कैंसिल हुए. जिससे रेलवे को लगभग 243 करोड़ रुपये मिले.
साल 2022 में 4.6 करोड़ टिकट रद्द हुए और कमाई 439 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. साल 2023 में यह संख्या 5.26 करोड़ रही और रेलवे ने करीब 505 करोड़ रुपये कमाए. साल 2024 के जनवरी महीने में ही 45 लाख टिकट कैंसिल हुए और लगभग 43 करोड़ रुपये की आमदनी हुई.
कहां चूक रही है रेलवे
रेलवे अब वेटिंग टिकट की संख्या घटाने की कोशिश कर रही है. कई ट्रेनों में वेटिंग टिकट 25 प्रतिशत तक कम किए गए हैं. AI और डेटा के जरिए यात्रियों के पैटर्न को स्टडी किया जा रहा है. जिन ट्रेनों में ज्यादा कैंसिलेशन होता है. वहां वेटिंग लिस्ट घटाई जा रही है. Tatkal टिकट के लिए आधार सत्यापन जरूरी किया गया है.
अब IRCTC पर Tatkal टिकट वही बुक कर सकता है. जिसका आधार जुड़ा हो और OTP से पहचान पक्की करनी होगी. कई मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिक सिजन में सीमित सीटों के कारण रेलवे मांग पूरी नहीं कर पा रही है. कई बार जितनी सीटें होती हैं. उससे लगभग बराबर वेटिंग लिस्ट डाल दी जाती है. जिससे टिकट का कैंसिल होना तय हो जाता है.
Budget 2026 में यात्रियों को चाहिए ये सहूलियतें
- यात्री चाहते हैं कि ज्यादा ट्रेनें चलाई जाएं. खासकर लंबी दूरी वाले रूट पर.
- फेस्टिव सीजन और छुट्टियों में स्पेशल ट्रेनों की संख्या बढ़े.
- वेटिंग लिस्ट की सीमा और वास्तविक सीटों में संतुलन रखा जाए.
- कोच की संख्या बढ़ाई जाए और पुराने रूट पर नई सेवाएं जोड़ी जाएं.
- Tatkal सिस्टम पारदर्शी बने और दलालों पर पूरी तरह रोक लगे.
- फेस्टिव सीजन और छुट्टियों में स्पेशल ट्रेनों को समय पर पहुंचाएं.
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