‘यह बहुत अच्छा बजट होगा’, Budget 2026 से पहले बोले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, जानें उन्होंने और क्या कहा
1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट पेश किया जाएगा. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोय पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री ने पिछले वर्षों में लगातार उत्कृष्ट बजट पेश किए हैं और यह उनका नौवां बजट होगा.
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को भरोसा जताया कि 2026-27 का बजट एक अच्छा बजट होगा. यह बजट 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जाएगा. पीयूष गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री ने पिछले वर्षों में लगातार उत्कृष्ट बजट पेश किए हैं और यह उनका नौवां बजट होगा जो किसी भी तरह से अलग नहीं होगा. बजट आते ही लोगों के जहन में कई तरह के सवाल आते है जैसे- महंगाई कम होगी या बढ़ेगी, टैक्स में राहत मिलेगी या नहीं, सरकार किस सेक्टर पर ज्यादा पैसा खर्च करेगी. आइये जानते हैं कि गोयल ने और क्या जानकारी दी है.
यह बहुत अच्छा बजट होगा: गोयल
पीयूष गोयल ने शनिवार को पीटीआई से कहा, “यह एक अच्छा बजट होगा… मुझे पूरा भरोसा है कि यह बहुत अच्छा बजट होगा.” इसके अलावा एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) सेक्टर को लेकर पूछे गए सवाल पर मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार लगातार विभिन्न योजनाओं और पहलों के जरिए इस सेक्टर को समर्थन देती आ रही है. उन्होंने कहा कि सरकार एमएसएमई के महत्व को लेकर “पूरी तरह सजग” रही है.
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क्या खास घोषणाएं हो सकती हैं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लगातार नौवां बजट पेश करेंगी. यह बजट ऐसे उपायों की घोषणा कर सकता है, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखना, राजकोषीय अनुशासन कायम रखना और ऐसे सुधारों को आगे बढ़ाना होगा जो वैश्विक व्यापार तनाव- खासतौर पर अमेरिका के टैरिफ से अर्थव्यवस्था को सुरक्षा प्रदान कर सकें.
पहली बार रविवार को पेश होगा बजट
वित्त वर्ष 2026-27 (अप्रैल 2026 से मार्च 2027) के लिए बजट रविवार को पेश होगा जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार होगा. इससे पहले कभी भी रविवार को बजट पेश नहीं किया हुआ है.
क्या है चुनौती
FY27 का बजट एक जटिल वैश्विक और घरेलू पृष्ठभूमि में आ रहा है. जहां घरेलू मांग बनी हुई है और महंगाई हालिया ऊंचे स्तरों से नीचे आई है. वहीं जियो-पॉलिटिकल तनाव, कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की असमान मौद्रिक नीति वैश्विक अनिश्चितताओं को बढ़ा रही हैं. देश के भीतर सरकार पर खपत बढ़ाने, रोजगार सृजन में तेजी लाने और पूंजीगत खर्च बढ़ाने का दबाव है जबकि साथ ही राजकोषीय घाटे को घटाने के लक्ष्य को भी बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.
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