नौवीं बार बजट पेश करेंगी निर्मला सीतारमण, राजकोषीय घाटे से लेकर कैपेक्स तक, इन बड़े आंकड़ों पर टिकी होंगी निगाहें

बजट के दिन कुछ आंकड़े ऐसे होते हैं, जो सिर्फ सरकारी खर्च नहीं बल्कि बाजार की दिशा और आर्थिक सोच को भी साफ करते हैं. इस बार भी कई बड़े नंबर संकेत देंगे कि आने वाले साल में सरकार किस रास्ते पर चलने वाली है और अर्थव्यवस्था से उसकी क्या उम्मीदें हैं.

बजट 2026 Image Credit: @Tv9

Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को लगातार नौवीं बार देश का आम बजट पेश करने जा रही हैं. यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है. इस बार बजट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा कस्टम ड्यूटी में सुधार और सरकार की वित्तीय रणनीति को लेकर है. पहले की तरह इस बार भी बजट पूरी तरह पेपरलेस होगा. साल 2019 में अपने पहले बजट में लाल कपड़े में लिपटी पारंपरिक ‘बही-खाता’ की शुरुआत करने वाली निर्मला सीतारमण अब तक बजट के कई नीतिगत बदलावों की गवाह रही हैं.

राजकोषीय घाटा: अगला संकेत क्या होगा

वर्तमान वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार ने राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.4 प्रतिशत रखा है. यह सरकार के उस रोडमैप के अनुरूप है, जिसके तहत घाटे को 4.5 प्रतिशत से नीचे लाने का लक्ष्य था. अब बाजार की नजर इस बात पर है कि क्या सरकार 2026-27 के लिए भी कोई स्पष्ट लक्ष्य देगी. उम्मीद है कि सरकार FY27 के लिए राजकोषीय घाटा 4 प्रतिशत के आसपास रखने का संकेत दे सकती है.

कैपेक्स पर रहेगा जोर

सरकार ने इस साल 11.2 लाख करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च तय किया था. नए बजट में इसे 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है. निजी निवेश अभी भी सतर्क है, ऐसे में सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च बढ़ाकर आर्थिक रफ्तार को सहारा देना चाहती है. जानकारों के मुताबिक कैपेक्स 12 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जा सकता है.

कर्ज घटाने की रणनीति

वित्त मंत्री पहले ही कह चुकी हैं कि 2026-27 से सरकार की नीति ऐसी होगी, जिससे कर्ज जीडीपी के अनुपात में घटता दिखे. 2024 में देश का कुल सरकारी कर्ज जीडीपी का करीब 85 प्रतिशत था. बाजार यह जानना चाहता है कि 60 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए सरकार किस तरह का रोडमैप पेश करती है.

FY26 में सरकार की कुल बाजार उधारी (Market Borrowing) 14.80 लाख करोड़ रुपये थी. बजट में घोषित नया उधारी आंकड़ा सरकार की वित्तीय सेहत और खर्च की दिशा का संकेत देगा. इससे बॉन्ड मार्केट और ब्याज दरों पर भी असर पड़ता है.

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टैक्स और जीएसटी से क्या उम्मीद

2025-26 में सरकार ने कुल टैक्स कलेक्शन 42.70 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था. इसमें डायरेक्ट टैक्स से 25.20 लाख करोड़ और इनडायरेक्ट टैक्स से 17.5 लाख करोड़ रुपये आने की उम्मीद थी. जीएसटी कलेक्शन 11.78 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. FY27 के लिए जीएसटी के अनुमान पर खास नजर रहेगी.

FY26 में नाममात्र जीडीपी ग्रोथ 10.1 प्रतिशत से घटकर करीब 8 प्रतिशत आंकी गई है. नए बजट में FY27 के लिए 10.5 से 11 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान दिया जा सकता है. इसके साथ ही ग्रामीण रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी अहम योजनाओं पर खर्च भी बजट का बड़ा फोकस रहेगा.