पुराने टैक्स सिस्टम में अब भी बड़े फायदे, इन 10 तरह की इनकम पर 0 टैक्स; टैक्सपेयर्स रखें ध्यान

सरकार नए टैक्स सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, लेकिन पुराने टैक्स सिस्टम में अब भी कई ऐसी कमाई हैं जिन पर इनकम टैक्स नहीं लगता. इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत खेती से होने वाली आय, PPF पर मिलने वाला ब्याज, लाइफ इंश्योरेंस की मैच्योरिटी राशि, स्कॉलरशिप, ग्रेच्युटी और EPF निकासी जैसी कई इनकम टैक्स फ्री मानी जाती हैं, बशर्ते उनसे जुड़ी शर्तें पूरी हों.

इनकम टैक्स Image Credit: Canva/Money9live

Old tax regime benefits: सरकार लगातार नए टैक्स सिस्टम को बढ़ावा दे रही है, लेकिन पुराने टैक्स सिस्टम में अब भी कई ऐसी छूट और फायदे मौजूद हैं, जो टैक्स बचाने में बड़ी मदद कर सकते हैं. इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत कुछ प्रकार की आय पूरी तरह टैक्स फ्री मानी जाती है, बशर्ते उनसे जुड़ी शर्तें पूरी की जाएं. हालांकि सरकार के आंकड़ों के मुताबिक करीब 88 फीसदी टैक्सपेयर्स अब नए टैक्स सिस्टम में शिफ्ट हो चुके हैं. इसके बावजूद पुराने टैक्स सिस्टम में कई तरह की आय ऐसी हैं, जिन पर टैक्स नहीं लगता और सही प्लानिंग से टैक्स बोझ कम किया जा सकता है.

खेती से होने वाली कमाई

इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(1) के तहत खेती से होने वाली आय पूरी तरह टैक्स फ्री होती है. इसमें खेती से कमाई, कृषि उत्पाद की बिक्री और कृषि भूमि से मिलने वाला किराया शामिल होता है. हालांकि अगर किसी व्यक्ति की अन्य आय भी है, तो कुछ मामलों में टैक्स रेट तय करते समय कृषि आय को जोड़ा जा सकता है.

तय सीमा तक मिलने वाले गिफ्ट

अगर किसी व्यक्ति को एक वित्त वर्ष में गैर रिश्तेदारों से 50000 रुपये तक का गिफ्ट मिलता है, तो उस पर टैक्स नहीं लगता. लेकिन यह राशि 50000 रुपये से ज्यादा होने पर पूरी रकम टैक्स के दायरे में आ सकती है. माता-पिता, जीवनसाथी, भाई-बहन और करीबी रिश्तेदारों से मिलने वाला गिफ्ट पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. इसके अलावा शादी के मौके पर मिलने वाले गिफ्ट पर भी टैक्स नहीं लगता.

लाइफ इंश्योरेंस से मिलने वाली रकम

लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी से मिलने वाली रकम भी आम तौर पर टैक्स फ्री होती है. इसमें मैच्योरिटी राशि और डेथ बेनिफिट दोनों शामिल होते हैं. हालांकि इसके लिए प्रीमियम और सम एश्योर्ड के रेशियो से जुड़ी कुछ शर्तें पूरी करनी होती हैं.

PPF पर मिलने वाला ब्याज

पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF भारत में सबसे टैक्स एफिशिएंट निवेश विकल्पों में से एक माना जाता है. इस योजना में मिलने वाला ब्याज पूरी तरह टैक्स फ्री होता है. इसके अलावा मैच्योरिटी पर मिलने वाली पूरी राशि भी टैक्स से मुक्त रहती है.

टैक्स फ्री बॉन्ड का ब्याज

कुछ सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा जारी टैक्स फ्री बॉन्ड पर मिलने वाला ब्याज भी इनकम टैक्स से मुक्त होता है. ऐसे बॉन्ड लंबे समय के स्थिर और टैक्स एफिशिएंट निवेश के रूप में देखे जाते हैं.

शिक्षा के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप

शिक्षा के खर्च को पूरा करने के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप पर भी कोई टैक्स नहीं लगता. इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(16) के तहत यह पूरी तरह टैक्स फ्री मानी जाती है, चाहे स्कॉलरशिप की राशि कितनी भी हो.

लीव ट्रैवल अलाउंस

कंपनी की ओर से मिलने वाले लीव ट्रैवल अलाउंस यानी LTA पर भी टैक्स छूट मिल सकती है. यह छूट भारत के भीतर यात्रा करने पर मिलती है और आमतौर पर चार साल के ब्लॉक में दो यात्राओं तक लागू होती है. हालांकि यह छूट केवल यात्रा के वास्तविक खर्च जैसे ट्रेन, बस या फ्लाइट टिकट पर लागू होती है.

रिटायरमेंट पर मिलने वाली ग्रेच्युटी

रिटायरमेंट या नौकरी छोड़ने पर मिलने वाली ग्रेच्युटी भी एक सीमा तक टैक्स फ्री होती है. ग्रेच्युटी एक्ट के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए टैक्स छूट की अधिकतम सीमा 20 लाख रुपये है. वहीं केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए यह सीमा 25 लाख रुपये तक है.

प्रोविडेंट फंड की निकासी

अगर कर्मचारी कम से कम 5 साल की निरंतर सर्विस पूरी करने के बाद कर्मचारी प्रोविडेंट फंड यानी EPF से पैसा निकालता है, तो उस पर टैक्स नहीं लगता. लेकिन इससे पहले निकासी करने पर कुछ परिस्थितियों में टैक्स लग सकता है.

पार्टनरशिप फर्म से मिलने वाला मुनाफा

अगर कोई व्यक्ति किसी पार्टनरशिप फर्म या LLP में पार्टनर है, तो फर्म से मिलने वाला मुनाफे का हिस्सा उसके हाथ में टैक्स फ्री माना जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि उस आय पर पहले ही फर्म के स्तर पर टैक्स दिया जा चुका होता है. टैक्स एक्सपर्ट के मुताबिक इन छूटों को समझकर टैक्स प्लानिंग की जाए, तो कानूनी रूप से टैक्स बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है. हालांकि टैक्सपेयर्स को अपनी आय और निवेश के हिसाब से पुराने और नए टैक्स सिस्टम के बीच सही विकल्प चुनना चाहिए.

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