1 अप्रैल से STT से लेकर शेयर बायबैक तक बदल जाएंगे ये 13 नियम, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर
सिक्योरिटीज के फ्यूचर्स सौदों पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है. ऑप्शंस ट्रेड करने वालों पर भी अतिरिक्त टैक्स का भार पड़ेगा. सरकार ने ऑप्शंस प्रीमियम पर STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव रखा है.
Income Tax Rule Change: नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही टैक्सपेयर्स के लिए बड़ा बदलाव आने वाला है. 1 अप्रैल 2026 से Income-tax Act, 2025 लागू हो जाएगा, जिसके तहत इनकम टैक्स, निवेश, TDS/TCS और कंपनियों से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे. ये बदलाव आम नौकरीपेशा लोगों से लेकर निवेशकों, कारोबारियों और कंपनियों तक सभी को प्रभावित करेंगे. इन नियमों की घोषणा निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 पेश करते समय की थी. इस रिपोर्ट में आप जानेंगे कि 1 अप्रैल से कौन-कौन से 13 बड़े नियम बदल रहे हैं और इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा.
शेयर बायबैक पर टैक्स का तरीका बदला
अब तक शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड माना जाता था और उस पर स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता था. 1 अप्रैल 2026 से इसे कैपिटल गेन माना जाएगा, यानी टैक्स की गणना खरीद-बिक्री के नियमों के अनुसार होगी.
STT बढ़ा
सिक्योरिटीज के फ्यूचर्स सौदों पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है. ऑप्शंस ट्रेड करने वालों पर भी अतिरिक्त टैक्स का भार पड़ेगा. सरकार ने ऑप्शंस प्रीमियम पर STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% करने का प्रस्ताव रखा है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)
अब SGB पर टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं बॉन्ड्स पर मिलेगी जो सरकार से सीधे (original issue) खरीदे गए हों. सेकेंडरी मार्केट से खरीदे गए बॉन्ड्स पर रिडेम्पशन के समय कैपिटल गेन टैक्स लगेगा. टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए निवेशकों को मैच्योरिटी तक बॉन्ड रखने होंगे.
डिविडेंड और म्यूचुअल फंड आय
डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर अब ब्याज खर्च की कोई कटौती नहीं मिलेगी, चाहे निवेश उधार लेकर ही क्यों न किया गया हो. अब तक नियम ये कहता है कि अगर आपने कर्ज लेकर शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और उससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल ब्याज चुकाने के लिए करते हैं तो वह टैक्स डिडक्शन के अंतर्गत आता है. लेकिन 1 अप्रैल से यह नियम बदलने वाला है.
एक ही घोषणा से राहत
निवेशकों को अब टैक्स न कटने (non-deduction) के लिए बार-बार अलग-अलग फॉर्म नहीं भरने होंगे. एक ही डिक्लेरेशन से म्यूचुअल फंड, डिविडेंड और बॉन्ड कवर हो जाएंगे.
NRI से प्रॉपर्टी खरीदना हुआ आसान
अब NRI से प्रॉपर्टी खरीदने पर TDS काटने के लिए TAN लेने की जरूरत नहीं होगी. खरीदार अपने PAN से ही TDS काट सकेंगे.
TCS दरों में बड़ी राहत
विदेशी टूर पैकेज पर TCS अब सिर्फ 2% ही लगेंगे. LRS के तहत विदेश में पढ़ाई और मेडिकल खर्च पर TCS 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है.
MAT अब फाइनल टैक्स
कंपनियों के लिए Minimum Alternate Tax (MAT) अब 14% की फाइनल टैक्स होगी. नई MAT क्रेडिट नहीं मिलेगी, हालांकि 31 मार्च 2026 तक की पुरानी क्रेडिट इस्तेमाल की जा सकेगी.
सैनिकों की डिसेबिलिटी पेंशन टैक्स-फ्री
सर्विस के दौरान दिव्यांग होकर बाहर हुए सशस्त्र बलों के जवानों को मिलने वाली पूरी डिसेबिलिटी पेंशन टैक्स-मुक्त होगी.
जमीन अधिग्रहण पर राहत
RFCTLARR Act के तहत अनिवार्य भूमि अधिग्रहण पर मिलने वाला मुआवजा (Section 46 को छोड़कर) अब पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा.
ITR फाइल करने की तारीख बढ़ी
बिना ऑडिट वाले व्यवसाय और ट्रस्ट अब 31 जुलाई की जगह 31 अगस्त तक ITR फाइल कर सकेंगे. हालांकि सैलरी पाने वालों के लिए तारीख 31 जुलाई ही रहेगी. साथ ही रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने के लिए टैक्सपेयर्स के पास तीन महीने का अतिरिक्त वक्त होगा. अब वे 31 दिसंबर की जगह 31 मार्च तक रिटर्न फाइल कर सकेंगे.
मोटर एक्सीडेंट मुआवजे के ब्याज पर टैक्स नहीं
Motor Accident Claims Tribunal से मिलने वाले मुआवजे पर ब्याज अब पूरी तरह टैक्स-फ्री होगा और उस पर TDS भी नहीं कटेगा. मौजूदा स्थिति में पीड़ित को मिलने वाले मुआवजे पर टैक्स लगता है.
PF-ESI जमा करने पर राहत
अब एम्प्लॉयर अगर PF और ESI का योगदान ITR फाइल करने की अंतिम तारीख तक जमा कर देता है, तो भी उसे टैक्स में कटौती का लाभ मिलेगा.
1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ये 13 बदलाव टैक्स सिस्टम को सरल बनाने और टैक्सपेयर्स को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम हैं. अगर आप निवेश करते हैं, प्रॉपर्टी खरीदते हैं या बिजनेस चलाते हैं, तो इन नए नियमों को समझना आपकी टैक्स प्लानिंग और जेब दोनों के लिए बेहद जरूरी है.




