किसी व्यक्ति की मौत के बाद कौन भरेगा उसका ITR, जानें क्या है प्रोसेस और किसे करना होगा ये काम?

ITR फाइल करने की तारीख नजदीक आ रही है. इस बार ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर है. ऐसे में क्या आप जानते हैं कि अगर किसी व्यक्ति की मौत हो गई हो तो उसका ITR कौन भरेगा. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि मौत के बाद ITR कैसे भरा जाता है और रिफंड या TDS का पैसा कैसे मिलेगा.

ITR फाइलिंग Image Credit: Money9live/Canva

Who Will File ITR After A Person Death: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की तारीख नजदीक आ रही है. इस बार ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 15 सितंबर है. लाखों लोग अब तक अपना ITR दाखिल कर चुके हैं और रिफंड का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर किसी व्यक्ति की मौत हो गई हो तो उसका ITR कौन भरेगा. परिवार में किसी सदस्य की मौत के बाद टैक्स से जुड़े कामों को लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल रहते हैं. आयकर अधिनियम, 1961 में इस स्थिति के लिए स्पष्ट नियम बनाए गए हैं. आइए आसान भाषा में समझते हैं कि किसी की मौत के बाद उसका ITR कौन भर सकता है और रिफंड या TDS का पैसा कैसे मिलेगा.

कौन भरेगा मृतक का ITR?

आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 159 के अनुसार, मृतक व्यक्ति का आखिरी आयकर रिटर्न दाखिल करने की जिम्मेदारी उसके कानूनी उत्तराधिकारी (Legal Heir) या फिर वसीयत में नामित एग्जीक्यूटर (Executor) पर होती है. एक कानूनी उत्तराधिकारी को ही टैक्स के मामले में मृतक का प्रतिनिधि माना जाता है. उसे मृत्यु की तारीख तक हुई सभी इनकम का हिसाब दाखिल करना होता है. अगर मृतक ने कोई वसीयत (Will) छोड़ी है, तो उसमें नामित एग्जीक्यूटर ही इस पूरी प्रक्रिया को संभालता है, खासकर उस इनकम के लिए जो मौत के बाद प्राप्त हुई हो. यहां यह समझना बेहद जरूरी है कि किसी भी संपत्ति का नॉमिनी (Nominee) अकेले रिटर्न दाखिल करने का अधिकार नहीं रखता, जब तक कि वह खुद एक कानूनी उत्तराधिकारी न हो.

रिफंड और TDS पाने के लिए क्या करें?

अगर मृतक के नाम पर कोई टैक्स रिफंड बकाया है या फिर सोर्स पर ज्यादा टैक्स काटा गया (TDS) है, तो उसे प्राप्त करने की एक निश्चित प्रक्रिया है. सबसे पहले, कानूनी उत्तराधिकारी को आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल पर खुद को एक प्रतिनिधि (Representative Assessee) के रूप में रजिस्टर्ड कराना होगा. इस प्रक्रिया में मृतक का पैन कार्ड, मृत्यु प्रमाण पत्र और अपने कानूनी उत्तराधिकारी होने का प्रमाण (जैसे उत्तराधिकार प्रमाण पत्र) अपलोड करना होता है. साथ ही, उत्तराधिकारी को अपने बैंक अकाउंट की सभी जानकारी भी दर्ज करनी होती है, ताकि रिफंड सीधे उसके खाते में आ सके.

खुद को कानूनी उत्तराधिकारी ऐसे करें साबित

रजिस्ट्रेशन हो जाने के बाद, उत्तराधिकारी मृतक की ओर से ITR दाखिल करके रिफंड का दावा कर सकता है. इस पूरी प्रक्रिया में एक बेहद जरूरी कदम यह है कि उत्तराधिकारी अपने बैंक खाते को आयकर पोर्टल पर पहले से ही प्री-वैलिडेट (Pre-validate) करा ले. एक बात और ध्यान रखें कि अगर खाता वैलिडेटेड नहीं है, तो रिफंड की राशि अटक सकती है. क्योंकि कई बार, सिस्टम से रिफंड की राशि गलती से मृतक के बंद किए गए खाते में भेज दी जाती है. ऐसी स्थिति में, उत्तराधिकारी ऑनलाइन रिफंड री-इश्यू का अनुरोध करके रिफंड को अपने खाते में मंगवा सकता है.

किन समस्याओं का करना पड़ सकता है सामना ?

इस प्रक्रिया के दौरान परिवारों को कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है, जो इस दुखद समय में और भी तनावपूर्ण बना देती हैं. इसके तहत कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र (Succession Certificate) बनवाने में कई हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है. यह देरी पूरी प्रक्रिया को रोक सकती है. मृतक का बैंक खाता बंद होने के कारण रिफंड ट्रांसफर नहीं हो पाता है, जिससे राशि अटक जाती है. अगर पोर्टल पर गलत या अपर्याप्त दस्तावेज जमा किए जाएं, तो आवेदन रिजेक्ट हो सकता है. अगर एक से ज्यादा कानूनी उत्तराधिकारी हैं और उनमें सहमति नहीं बन पाती, तो स्थिति और भी उलझ सकती है और काम रुक सकता है.

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