1 फरवरी से UP में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन के लिए आधार ऑथेंटिकेशन अनिवार्य, जानें क्या होगा असर
उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. राज्य कैबिनेट ने आधार आधारित प्रमाणीकरण प्रणाली को मंजूरी दे दी है. इस नई व्यवस्था के लागू होने से फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक लगेगी और जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है.
Aadhaar Authentication Mandatory in UP: उत्तर प्रदेश सरकार ने जमीन और संपत्ति की रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को आसान, सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. राज्य कैबिनेट ने आधार आधारित पहचान प्रणाली लागू करने को मंजूरी दे दी है. इससे फर्जी रजिस्ट्रेशन और जमीन से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों पर रोक लगेगी.
1 फरवरी से शुरू होगी नई व्यवस्था
स्टांप और रजिस्ट्रेशन मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने बताया कि यह फैसला विभाग की एक समीक्षा बैठक में लिया गया था. बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की थी. नई व्यवस्था 1 फरवरी से प्रदेश के सभी सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में लागू कर दी जाएगी.
आधार से होगी लोगों की पहचान
सरकार ने 2 अगस्त 2024 को UP Online Document Registration Rules, 2024 लागू किए हैं. इसके तहत रजिस्ट्रेशन के समय दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति, खरीदार, विक्रेता और गवाहों की पहचान आधार के जरिए की जाएगी. इसके लिए ई-केवाईसी, बायोमेट्रिक जांच और ई-हस्ताक्षर का इस्तेमाल होगा. इससे किसी और के नाम पर गलत तरीके से रजिस्ट्रेशन कराना मुश्किल हो जाएगा.
पुराने कागजों को डिजिटल करने के लिए समय बढ़ा
कैबिनेट ने 2002 से 2017 तक के पुराने रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों को डिजिटल करने वाली योजना को 6 महीने और बढ़ाने का फैसला भी किया है. TOI की एक रिपोर्ट के अनुसार, पहले इस योजना पर 95 करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन अब लागत बढ़कर 123.62 करोड़ रुपये हो गई है. अधिकारियों के अनुसार ज्यादातर काम पूरा हो चुका है और कुछ जिलों में बचा हुआ काम भी जल्द खत्म कर लिया जाएगा.
इसके फायदे
आधार आधारित रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू होने से आम लोगों और सरकार दोनों को कई बड़े फायदे होंगे.
फर्जी रजिस्ट्रेशन पर रोक
आधार, बायोमेट्रिक और ई-केवाईसी से असली व्यक्ति की पहचान होगी. इससे किसी और के नाम पर जमीन रजिस्टर कराने या फर्जी दस्तावेज लगाने जैसी धोखाधड़ी लगभग खत्म हो जाएगी.
जमीन घोटालों में कमी
अब दलालों और भू-माफिया के लिए जमीन हड़पना मुश्किल होगा. गलत तरीके से की गई रजिस्ट्रेशन तुरंत पकड़ी जा सकेगी, जिससे बड़े जमीन घोटालों पर लगाम लगेगी.
प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी
पूरी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया डिजिटल और रिकॉर्डेड होगी. इससे अधिकारियों और आम लोगों—दोनों के लिए सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी.
समय और परेशानी कम होगी
पहचान तुरंत ऑनलाइन सत्यापित हो जाएगी. लोगों को बार-बार कागज लाने या दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत कम पड़ेगी, जिससे समय बचेगा.
असली मालिक को मिलेगा ज्यादा सुरक्षा
जमीन के असली मालिक के अधिकार सुरक्षित रहेंगे. कोई भी व्यक्ति बिना जानकारी के उनकी संपत्ति को रजिस्टर नहीं करा पाएगा.
पुराने रिकॉर्ड सुरक्षित होंगे
पुराने दस्तावेजों के डिजिटाइजेशन से जमीन से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रहेंगे और जरूरत पड़ने पर आसानी से मिल सकेंगे.
कोर्ट केस कम होंगे
जब रजिस्ट्रेशन साफ-सुथरा और सही होगा तो जमीन विवाद और मुकदमों की संख्या भी धीरे-धीरे कम होगी.
कुल मिलाकर, यह व्यवस्था आम जनता के लिए राहत लेकर आएगी और जमीन रजिस्ट्रेशन को ज्यादा भरोसेमंद बनाएगी.




