₹3 लाख महीने की कमाई नहीं? भूल जाइए इस शहर में घर खरीदने का सपना, स्टार्टअप फाउंडर ने समझाया गणित

गुरुग्राम में घर खरीदना अब आम आय वालों के बस की बात नहीं रह गई है. रियल एस्टेट एक्सपर्ट समीर सिंघई के मुताबिक, 2025 में यहां प्रॉपर्टी खरीदने के लिए 2.5 से 5 लाख रुपये की मासिक आय, भारी सेविंग्स और बड़े होम लोन की जरूरत पड़ती है, तभी यह सपना हकीकत बन पाता है.

गुरुग्राम और घर की खरीदी Image Credit: @AI/Money9live

Buying Home in Gurugram and Monthly Income: गुरुग्राम में घर खरीदना अब सिर्फ एक सपना या मोटिवेशन भर नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह से आपकी जेब की ताकत पर निर्भर करता है. पूर्व बैंकर और रियल एस्टेट उद्यमी समीर सिंघई के मुताबिक, यह शहर कभी भी औसत कमाई करने वालों के लिए बनाया ही नहीं गया था. यहां की महंगी प्रॉपर्टी कोई अस्थायी उछाल नहीं, बल्कि एक सोच-समझकर तैयार की गई आर्थिक संरचना का नतीजा है.

3 लाख की इनकम!

समीर सिंघई का साफ कहना है कि अगर किसी परिवार की मासिक आय 2.5 से 3 लाख रुपये नहीं है, तो गुरुग्राम में घर खरीदना संभव नहीं है. उनके मुताबिक, यह बात घमंड या दिखावे से जुड़ी नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे अर्थशास्त्र से जुड़ी हुई है. गुरुग्राम एक ऐसा शहर है, जो औसत आय पर नहीं, बल्कि हाई परचेजिंग पावर पर चलता है.

2025 में घर खरीदने की हकीकत

सिंघई के अनुसार, साल 2025 में गुरुग्राम में घर खरीदने के लिए आमतौर पर ड्यूल इनकम फैमिली की जरूरत पड़ती है, जिसकी कुल मासिक आय 2.5 लाख से लेकर 5 लाख रुपये के बीच हो. इतना ही नहीं, केवल सैलरी काफी नहीं है. इसके साथ 80 लाख से 1 करोड़ रुपये तक की सेविंग्स और करीब 3 से 5 करोड़ रुपये का होम लोन लेने की क्षमता भी जरूरी मानी जाती है. कई मामलों में परिवार की मदद के बिना सौदा पूरा कर पाना मुश्किल हो जाता है. सिंघई मानते हैं कि चाहे बाहर से देखने में कोई परिवार आर्थिक रूप से मजबूत क्यों न लगे, लेकिन असलियत में गुरुग्राम में घर खरीदना उनके लिए भी आसान नहीं होता.

3 लाख की सैलरी भी काफी नहीं?

समीर सिंघई का कहना है कि अगर किसी की मासिक कमाई 3 लाख रुपये है, तो भी हालात बहुत आरामदायक नहीं होते. ईएमआई, रोजमर्रा के खर्च, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की प्लानिंग को जोड़ दिया जाए, तो बिना मजबूत सेविंग्स या माता-पिता की आर्थिक मदद के घर खरीदना लगभग नामुमकिन हो जाता है. यही वजह है कि गुरुग्राम को वह एक “नॉर्मल इंडियन सिटी” नहीं मानते. उनके अनुसार, यह शहर औसत भारतीयों के लिए नहीं, बल्कि सीमित लेकिन बेहद मजबूत आय वर्ग के लिए डिजाइन किया गया है.

किन लोगों के दम पर टिका है गुरुग्राम का बाजार?

सिंघई बताते हैं कि गुरुग्राम की रियल एस्टेट डिमांड कुछ खास वर्गों से आती है. इनमें सीनियर कॉरपोरेट प्रोफेशनल्स, स्टार्टअप फाउंडर्स, CXO लेवल के एग्जीक्यूटिव्स, एनआरआई और विदेशी एक्सपैट्स शामिल हैं. इन लोगों की आय न सिर्फ ज्यादा होती है, बल्कि स्थिर भी रहती है, जिससे यहां प्रॉपर्टी की मांग बनी रहती है. यही कारण है कि देश की अर्थव्यवस्था में मंदी, नौकरियों में कटौती या रियल एस्टेट में करेक्शन जैसी खबरों का गुरुग्राम पर ज्यादा असर नहीं पड़ता.

क्यों नहीं गिरती यहां प्रॉपर्टी की कीमतें?

समीर सिंघई के मुताबिक, गुरुग्राम में मांग आबादी बढ़ने से नहीं, बल्कि आय के कंसंट्रेशन से पैदा होती है. यहां जमीन सीमित है, जबकि खरीदने वालों के पास पैसा है. इसके अलावा एनआरआई और एक्सपैट निवेशक इस बाजार में एक और मजबूत मांग की परत जोड़ देते हैं, जो स्थानीय हालात से ज्यादा प्रभावित नहीं होती. इसका नतीजा यह होता है कि आर्थिक दबाव के दौर में भी यहां मांग खत्म नहीं होती, कीमतें अचानक नहीं गिरती और रीसेल मार्केट में भी लिक्विडिटी बनी रहती है.

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