2026 में फ्लैट खरीदने की तैयारी कर रहे हैं? अंडर-कंस्ट्रक्शन, रेडी टू मूव और अफोर्डेबल हाउसिंग पर GST का पूरा गणित समझिए
घर खरीदना जीवन का बड़ा फैसला होता है और इसमें टैक्स की भूमिका भी अहम होती है. बदलते नियमों के बीच यह समझना जरूरी है कि किस तरह की प्रॉपर्टी पर टैक्स लागू होता है और कहां राहत मिलती है. सही जानकारी के बिना लिया गया फैसला आपकी जेब पर असर डाल सकता है.
भारत में जब से जीएसटी लागू हुआ है, तब से रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स को लेकर काफी हद तक साफ तस्वीर सामने आई है. पहले घर खरीदते समय अलग-अलग टैक्स, वैट और सर्विस टैक्स के कारण आम खरीदार अक्सर भ्रम में रहता था. लेकिन जीएसटी के बाद यह प्रक्रिया पहले से ज्यादा सरल और पारदर्शी हो गई है. खासतौर पर अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट, रेडी-टू-मूव घर और अफोर्डेबल हाउसिंग को लेकर अब टैक्स की दरें स्पष्ट हैं.
साल 2026 में अगर आप फ्लैट खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि किस तरह के घर पर कितना जीएसटी लगेगा और कहां बिल्कुल टैक्स नहीं देना होगा.
अफोर्डेबल हाउसिंग पर जीएसटी कितना है
सरकार ने आम लोगों के लिए सस्ते घरों को बढ़ावा देने के मकसद से अफोर्डेबल हाउसिंग पर सबसे कम जीएसटी रखा है. मेट्रो और नॉन-मेट्रो शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग पर 1 प्रतिशत जीएसटी लगता है, वह भी बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट के. मेट्रो शहरों जैसे दिल्ली-NCR, मुंबई MMR, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और हैदराबाद में अगर फ्लैट का कारपेट एरिया 60 वर्ग मीटर तक है और कीमत 45 लाख रुपये से ज्यादा नहीं है, तो उसे अफोर्डेबल हाउसिंग माना जाएगा.
वहीं नॉन-मेट्रो शहरों में कारपेट एरिया की सीमा 90 वर्ग मीटर तक रखी गई है, लेकिन कीमत की सीमा यहां भी 45 लाख रुपये ही है. यह दर सिर्फ अंडर-कंस्ट्रक्शन अफोर्डेबल घरों पर लागू होती है. ध्यान रहे ये दरें आपको अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट पर ही मिलेंगी.
नॉन-अफोर्डेबल हाउसिंग पर टैक्स
जो घर अफोर्डेबल हाउसिंग की शर्तों में नहीं आते, उन्हें नॉन-अफोर्डेबल हाउसिंग की कैटेगरी में रखा जाता है. ऐसे अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट्स पर 5 प्रतिशत जीएसटी देना होता है. इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा नहीं मिलती. आमतौर पर ये वो घर होते हैं जिनकी कीमत 45 लाख रुपये से ज्यादा होती है या जिनका कारपेट एरिया तय सीमा से अधिक होता है. यानी अगर आप लग्जरी या प्रीमियम सेगमेंट का अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट खरीद रहे हैं, तो आपको 5 प्रतिशत जीएसटी चुकाना होगा.
रेडी-टू-मूव फ्लैट पर नहीं लगता जीएसटी
अगर आप ऐसा फ्लैट खरीद रहे हैं जो पूरी तरह बन चुका है और बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका है, तो उस पर जीएसटी नहीं लगेगा. कानून के मुताबिक, कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिलने के बाद प्रॉपर्टी को immovable property माना जाता है, जिस पर जीएसटी लागू नहीं होता. यही नियम रीसेल यानी पुराने मकानों की खरीद-फरोख्त पर भी लागू होता है. हालांकि, जीएसटी नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि कोई टैक्स नहीं देना होगा. खरीदार को स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस अलग से देनी पड़ती है, जो राज्य के हिसाब से तय होती है.
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पुराने जीएसटी सिस्टम वाले प्रोजेक्ट्स का क्या नियम है
कुछ प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जो 1 अप्रैल 2019 से पहले शुरू हुए थे और उन्होंने पुराने जीएसटी सिस्टम को ही जारी रखा. उस व्यवस्था में अफोर्डेबल हाउसिंग पर 8 प्रतिशत और नॉन-अफोर्डेबल हाउसिंग पर 12 प्रतिशत जीएसटी लगता था, लेकिन इसमें इनपुट टैक्स क्रेडिट मिलता था. नियम यह था कि बिल्डर को आईटीसी का फायदा ग्राहकों तक पहुंचाना होगा, ताकि कीमतों में अनुचित बढ़ोतरी न हो.
2026 में घर खरीदते समय जीएसटी का ढांचा पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट है. अगर आप सही कैटेगरी को समझकर फैसला लेते हैं, तो टैक्स को लेकर किसी तरह की उलझन नहीं रहेगी.




