अगले चार साल में शहरी इंफ्रा में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद, देश के बुनियादी ढांचे को मिलेगी रफ्तार
भारत के शहरी बुनियादी ढांचे में अगले चार वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद है. नारेडको सम्मेलन में केंद्रीय सचिव श्रीनिवास कटिकिथला ने बताया कि शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है और यह चुनौती के साथ अवसर भी है. उन्होंने रियल एस्टेट उद्योग से आवास परियोजनाओं से आगे बढ़कर समग्र इंफ्रा विकास में योगदान का आग्रह किया.

Urban infrastructure India: केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के सचिव श्रीनिवास कटिकिथला ने शुक्रवार को एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि देश के शहरी बुनियादी ढांचा क्षेत्र में अगले चार वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है. यह बयान रियल एस्टेट क्षेत्र के शीर्ष निकाय नारेडको के 17वें वार्षिक सम्मेलन में उनके संबोधन के दौरान सामने आया.
एक दशक में शहरी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में 30 लाख करोड़ रुपये निवेश
श्री कटिकिथला ने बताया कि पिछले एक दशक में शहरी बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में 30 लाख करोड़ रुपये का भारी निवेश हुआ है. यह आंकड़ा 2004-2014 की अवधि के दौरान हुए मात्र 1.78 लाख करोड़ रुपये के निवेश से कई गुना अधिक है. उन्होंने इस बढ़ोतरी का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शहरी क्षेत्रों और बुनियादी ढांचे पर दिए गए विशेष ध्यान को दिया. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि आवास एवं शहरी मामलों का मंत्रालय केंद्र सरकार में चौथा सबसे बड़ा पूंजीगत व्यय वाला मंत्रालय बन गया है.
तेजी से शहरीकरण
‘रियल एस्टेट और बुनियादी ढांचे के माध्यम से विकास की पुनर्कल्पना’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन में सचिव ने भारत के तेजी से हो रहे शहरीकरण पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि अगले 20 वर्षों में देश की 50 प्रतिशत से अधिक आबादी शहरी क्षेत्रों में रहने लगेगी. उन्होंने इस घटना को एक गंभीर चुनौती के साथ-साथ एक विशाल अवसर के रूप में चित्रित किया.
इस संदर्भ में, उन्होंने रियल एस्टेट उद्योग से आग्रह किया कि वे अपनी परियोजनाओं का विकास उन्हीं स्थानों पर करें जहां बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है, ताकि दोनों के बीच तालमेल सुनिश्चित हो सके. साथ ही, उन्होंने उद्योग से आवास परियोजनाओं के दायरे से आगे बढ़कर समग्र बुनियादी ढांचा विकास में योगदान देने का भी आह्वान किया.
निजी क्षेत्र के लिए अवसर
सचिव ने जोर देकर कहा कि आने वाले वर्षों में होने वाले इस 10 लाख करोड़ रुपये के निवेश में निजी क्षेत्र के लिए भागीदारी और विकास के काफी अवसर मौजूद हैं. उन्होंने बुनियादी ढांचा उद्योग से इस योजना में अपना पूरा योगदान देने का आग्रह किया.
इसी क्रम में, आवास एवं शहरी मामलों के राज्यमंत्री तोखन साहू ने सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में बुनियादी ढांचा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और सरकार इसके निरंतर विकास और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में इसके योगदान को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.
रेरा की भूमिका और उद्योग की मांग
मंत्री साहू ने रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 (रेरा) की भूमिका पर भी बात की. उन्होंने कहा कि रेरा का विस्तार इस तरह किया जाना चाहिए कि सभी संबंधित पक्षों के लिए लाभ की स्थिति बने और सरकार के उद्देश्य भी पूरे हों. वहीं, नारेडको के अध्यक्ष जी. हरि बाबू ने आवास और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों को मजबूत करने के सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए इन्हें देश की आर्थिक वृद्धि के दो प्रमुख इंजन बताया.
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दिल्ली में हाल ही में रेरा के तहत केवल 123 परियोजनाएं पंजीकृत हुईं, जबकि तमिलनाडु में लगभग 5,000 और महाराष्ट्र में लगभग 6,000 परियोजनाएं पंजीकृत हुई हैं. इस अंतर से संकेत मिलता है कि कुछ क्षेत्रों में विनियामक प्रक्रियाओं में अधिक दक्षता की गुंजाइश है.
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