तीन सिंगापुर जितना बड़ा सोलर प्लांट बनाएगी रिलायंस, मुकेश अंबानी का ऐलान; यहां बनेगी देश की 10% बिजली

रिलायंस इंडस्ट्रीज चेयरमैन मुकेश अंबानी ने गुजरात के कच्छ में दुनिया का सबसे बड़ा सिंगल-साइट सोलर प्रोजेक्ट लगाने का ऐलान किया है, जो सिंगापुर से तीन गुना बड़ा होगा. यह परियोजना भारत की 10 फीसदी बिजली जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखेगी. कंपनी हरित हाइड्रोजन, हरित अमोनिया और सस्टेनेबल ईंधन के उत्पादन का लक्ष्य 2032 तक सालाना 30 लाख टन तक ले जाने की योजना बना रही है.

मुकेश अंबानी Image Credit: Getty image

Reliance Industries: रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने शुक्रवार (29 अगस्त) को कहा कि कंपनी गुजरात के कच्छ में 5,50,000 एकड़ में दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट सौर परियोजनाओं में से एक का विकास कर रही है, जो सिंगापुर के साइज से तीन गुना बड़ी है. उन्होंने कहा कि अपने पीक टाइम पर, परियोजना में प्रतिदिन 55 मेगावाट सौर मॉड्यूल और 150 मेगावाट घंटे बैटरी कंटेनर स्थापित किए जाएंगे, जिससे यह विश्व स्तर पर सबसे तेज गति से स्थापित होने वाली परियोजनाओं में से एक बन जाएगी.

भारत की जरूरतों में लगभग 10 फीसदी होगी हिस्सेदारी

आरआईएल के अध्यक्ष मुकेश अंबानी ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक में शेयरधारकों को बताया कि यह परियोजना अगले दशक में भारत की लगभग 10 फीसदी बिजली की जरूरतों को पूरा कर सकती है. यह परियोजना जामनगर और कांडला में रिलायंस के मरीन एंड लैंड इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ेगी, जिससे बड़े पैमाने पर सौर और हाइड्रोजन इंटीग्रेशन संभव होगा.

2032 तक के लिए रखा यह लक्ष्य

मुकेश अंबानी ने कहा है कि उनकी कंपनी रिलायंस अब ‘हरित अमोनिया’, ‘हरित मेथनॉल’ और टिकाऊ (सस्टेनेबल) विमानन ईंधन जैसे पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद बनाएगी और दूसरे देशों को बेचेगी. इसका मकसद है कि भारत दुनिया का एक प्रमुख और सस्ता केंद्र बने जहां हरित हाइड्रोजन और उससे बनी चीजें तैयार हों.

शुरुआत में कंपनी इन उत्पादों का इस्तेमाल खुद अपनी जरूरतों के लिए करेगी, लेकिन उसकी योजना साल 2032 तक हरित हाइड्रोजन की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर हर साल 30 लाख टन करने की है.

रिलायंस की सौर ऊर्जा पैनल बनाने की फैक्ट्री हुई चालू

साथ ही, अंबानी ने यह भी घोषणा की कि रिलायंस की सौर ऊर्जा पैनल बनाने की फैक्ट्री अब चालू हो गई है. इस फैक्ट्री ने शुरुआत में 200 मेगावाट के उन्नत तकनीक (HJT) वाले सोलर मॉड्यूल बनाना शुरू कर दिया है. ये नए मॉड्यूल पुराने मॉड्यूल के मुकाबले 10 फीसदी ज्यादा बिजली बनाते हैं, गर्मी में 20 फीसदी बेहतर काम करते हैं और उनके खराब होने की संभावना 25 फीसदी कम होती है.

कंपनी बना रही दो बड़ी फैक्ट्री

साथ ही, रिलायंस दो बड़े कारखाने (गीगा फैक्ट्री) भी बना रही है. एक बैटरी बनाने के लिए और दूसरा इलेक्ट्रोलाइजर बनाने के लिए. बैटरी फैक्ट्री साल 2026 में शुरू होगी और शुरू में हर साल 40 गीगावाट बैटरी बनाने की क्षमता होगी, जिसे बाद में बढ़ाकर 100 गीगावाट किया जा सकेगा. इलेक्ट्रोलाइजर फैक्ट्री भी 2026 के अंत तक शुरू हो जाएगी और उसकी क्षमता 3 गीगावाट प्रति वर्ष होगी.

इनसे बहुत बड़े पैमाने पर और सस्ती दरों पर हरित हाइड्रोजन का उत्पादन संभव हो पाएगा. अंबानी ने कहा कि सौर ऊर्जा, बैटरी भंडारण और हाइड्रोजन उत्पादन को एक साथ जोड़ने से बड़े पैमाने के फायदे, कम लागत, बेहतर तकनीक और मजबूत सप्लाई चेन मिलेगी, जिससे दुनिया को ऊर्जा के क्षेत्र में बदलाव में तेजी आएगी और कंपनी को लंबे समय में अच्छा मुनाफा होगा.

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