चीन से आयात पर खुली छूट, FY32 तक सरकारी प्रोजेक्ट से लदी कंपनी, पावर-इंफ्रा से है ताल्लुक, ब्रोकरेज ने कहा- 40% उछलेगा स्टॉक
सरकारी इंजीनियरिंग कंपनी को बड़े ऑर्डर और नीति समर्थन से मजबूती मिल रही है, लेकिन कच्चे माल और गैस सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां भी सामने हैं. ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी हो गया है कि क्या मौजूदा हालात लंबी अवधि में अवसर बन सकते हैं.

BHEL Target Price: सरकारी कंपनियों में निवेश को लेकर अक्सर यह धारणा रहती है कि ग्रोथ सीमित होती है, लेकिन भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) के मामले में तस्वीर थोड़ी अलग नजर आ रही है. एक तरफ कंपनी के पास रिकॉर्ड स्तर का ऑर्डर बुक है, तो दूसरी तरफ सरकार की नीतिगत मदद और बढ़ती बिजली मांग इसके भविष्य को मजबूती देती दिख रही है. हालांकि कुछ चुनौतियां भी हैं, जिनका असर शॉर्ट टर्म में दिख सकता है. ऐसे में ब्रोकरेज हाउस JM Financial ने इस स्टॉक पर भरोसा जताया है और आने वाले समय में इसमें तेजी की उम्मीद जताई है.
मजबूत ऑर्डर बुक से मिलेगी ग्रोथ की रफ्तार
BHEL वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये के ऑर्डर बुक के साथ कर सकती है और यह आंकड़ा आगे और बढ़ने की संभावना है. कंपनी को FY26 में अब तक 700-750 अरब रुपये के ऑर्डर मिल चुके हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, इसके अलावा कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स, जिनमें कंपनी L-1 बिडर है, अगर शामिल हो जाते हैं तो ऑर्डर बुक और मजबूत हो सकती है.
सरकार ने FY32 तक कम से कम 97 गीगावाट थर्मल पावर क्षमता जोड़ने की योजना बनाई है. इसमें 18GW पहले ही चालू हो चुका है, 39GW निर्माणाधीन है, 23GW हाल ही में अवॉर्ड हुआ है और 24GW प्रोजेक्ट्स प्लानिंग में हैं. इससे साफ है कि आने वाले वर्षों में BHEL के लिए ऑर्डर फ्लो मजबूत बना रह सकता है.
चीन से आयात की अनुमति, मार्जिन में होगा फायदा
सरकार ने BHEL को 21 महत्वपूर्ण कच्चे माल चीन से आयात करने की छूट दी है. इनमें CRGO कॉइल, फोर्जिंग्स, सीमलेस पाइप्स और बुशिंग्स जैसे जरूरी इनपुट शामिल हैं.
2020 के बाद कंपनी को यूरोप से ये सामान मंगवाना पड़ रहा था, जिससे लागत बढ़ रही थी और प्रोजेक्ट में देरी हो रही थी. अब चीन से आयात की अनुमति मिलने से न सिर्फ लागत कम होगी बल्कि प्रोजेक्ट्स तेजी से पूरे हो सकेंगे. यह कदम कंपनी के मार्जिन के लिए भी सकारात्मक माना जा रहा है.
गैस की कमी बन सकती है बड़ी चुनौती
हालांकि कंपनी के सामने एक बड़ी चुनौती भी है. BHEL अपने मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस में RLNG, LPG और हीलियम गैस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करती है.
- RLNG और LPG का उपयोग मेटल कटिंग और इंडस्ट्रियल हीटिंग में होता है
- हीलियम का उपयोग लीक टेस्टिंग और वेल्डिंग में किया जाता है
मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के कारण हीलियम की सप्लाई प्रभावित हो रही है, जिससे कंपनी के कुछ प्लांट्स जैसे त्रिची और हरिद्वार में उत्पादन पर असर पड़ सकता है. इसका असर खासतौर पर चौथी तिमाही के प्रदर्शन पर देखने को मिल सकता है.
रेवेन्यू अनुमान में कटौती, लेकिन लॉन्ग टर्म नजरिया कायम
JM Financial ने BHEL के FY26 रेवेन्यू अनुमान को घटाकर 315 अरब रुपये कर दिया है, जो पहले 335 अरब रुपये था. चौथी तिमाही में करीब 25-30 अरब रुपये की कमी का अनुमान है. हालांकि FY27 के लिए अनुमान फिलहाल बरकरार रखे गए हैं. लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय हालात लंबे समय तक खराब रहते हैं, तो आगे भी अनुमान में कटौती की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
ब्रोकरेज का मानना है कि कंपनी की EBITDA मार्जिन FY25 के 4.4% से बढ़कर FY28 तक 10.7% तक पहुंच सकती है. वहीं, EPS भी FY25 के 1.5 रुपये से बढ़कर FY28 में 12 रुपये तक जाने का अनुमान है. यह दिखाता है कि कंपनी की कमाई में आने वाले वर्षों में मजबूत सुधार हो सकता है.
ब्रोकरेज की राय और टारगेट प्राइस
JM Financial ने BHEL पर BUY रेटिंग दी है. ब्रोकरेज ने मार्च 2028 के अनुमानित EPS के आधार पर 30 गुना वैल्यूएशन देते हुए 345 रुपये का टारगेट प्राइस तय किया है. फिलहाल यह शेयर करीब 248 रुपये के स्तर पर ट्रेड कर रहा है, जिससे इसमें 40 फीसदी संभावित बढ़त की गुंजाइश नजर आती है. बीते एक हफ्ते में कंपनी के शेयरों में 5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.
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BHEL के सामने एक तरफ मजबूत ऑर्डर बुक, सरकारी सपोर्ट और बढ़ती पावर डिमांड जैसे बड़े पॉजिटिव फैक्टर हैं, तो दूसरी तरफ गैस की कमी और वैश्विक अनिश्चितता जैसी चुनौतियां भी हैं. ऐसे में यह स्टॉक शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव दिखा सकता है, लेकिन लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए इसमें अवसर बन सकता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.