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STT के ऐलान से बाजार में तबाही, निफ्टी 25000 के नीचे आया, सेंसेक्स 1700 अंकों से ज्यादा टूटा, मचा कोहराम!

12:31 बजे तक सेंसेक्स 1770 अंकों की गिरावट के साथ 80,352 वहीं, निफ्टी 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 24,672 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में डेरिवेटिव सेगमेंट के निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस दोनों पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है.

शेयर बाजार Image Credit: Canva

बाजार में शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी देखने को मिली. जैसे ही संसद में बजट पेश हुआ वैसे ही बाजार में रैली आई. हालांकि, ये रैली टिक नहीं सकी. उसके बाद बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली. 12:31 बजे तक सेंसेक्स 1770 अंकों की गिरावट के साथ 80,352 वहीं, निफ्टी 600 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ 24,672 के स्तर पर ट्रेड कर रहा था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार 1 फरवरी को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में डेरिवेटिव सेगमेंट के निवेशकों और ट्रेडर्स के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस दोनों पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. बजट के मुताबिक, फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है. इस फैसले का सीधा असर डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग कॉस्ट पर पड़ेगा.

STT क्या होता है

Securities Transaction Tax यानी STT शेयर बाजार में होने वाले लेनदेन पर लगने वाला टैक्स है. यह टैक्स देश के मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाले सौदों पर लगाया जाता है. इसमें इक्विटी शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की ट्रेडिंग शामिल होती है. STT की खास बात यह है कि यह टैक्स सौदा होते ही काट लिया जाता है, चाहे निवेशक को उस ट्रेड में मुनाफा हुआ हो या नुकसान.

भारत में STT कब लागू हुआ

भारत में STT की शुरुआत 1 अक्टूबर 2004 को हुई थी. इसका मकसद उस समय लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की जगह लेना, शेयर और डेरिवेटिव ट्रेडिंग में टैक्स चोरी रोकना और टैक्स कलेक्शन को आसान बनाना था. हालांकि, केंद्रीय बजट 2018 में सरकार ने दोबारा लिस्टेड शेयरों पर LTCG टैक्स लागू कर दिया, लेकिन STT को खत्म नहीं किया गया.

ट्रेडर्स को STT क्यों खटकती है

पिछले बजट में STT बढ़ाए जाने के बाद से ही ट्रेडर्स की चिंता बढ़ी हुई है. पहले बजट में ऑप्शन बेचने पर लगने वाला टैक्स 0.0625 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया गया था. वहीं फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर टैक्स को 0.0125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.02 प्रतिशत किया गया था. अब नए बजट में फ्यूचर्स पर STT को और बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे खासकर इंट्राडे और हाई फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग करने वालों की लागत बढ़ेगी और मुनाफा मार्जिन पर दबाव आ सकता है.

कैपिटल गेन टैक्स भी पहले बढ़ चुका है

ट्रेडर्स और निवेशकों की चिंता सिर्फ STT तक सीमित नहीं है. पिछले बजट में सरकार ने कैपिटल गेन टैक्स भी बढ़ाया था. लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत किया गया. शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया गया. इस तरह देखा जाए तो बीते दो बजट में शेयर बाजार से जुड़े निवेशकों और ट्रेडर्स पर टैक्स का बोझ लगातार बढ़ा है.

बाजार पर क्या असर पड़ सकता है

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि STT बढ़ने से डेरिवेटिव सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम पर कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है. खासतौर पर छोटे ट्रेडर्स और ऑप्शन स्ट्रैटेजी पर काम करने वाले निवेशकों की लागत बढ़ेगी. हालांकि लॉन्ग टर्म निवेशकों पर इसका सीधा असर सीमित रहेगा.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.