महंगा होता क्रूड बढ़ाएगा बाजार की टेंशन, एयरलाइंस से लेकर पेंट-केमिकल तक; दबाव में रह सकते हैं ये स्टॉक्स
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है. अगर होर्मुज स्ट्रेट में बाधा लंबे समय तक बनी रहती है तो क्रूड $100 प्रति बैरल तक पहुंच सकता है. इसका असर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एयरलाइंस, पेंट, टायर, केमिकल और फर्टिलाइजर सेक्टर पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. जानें किन कंपनियों पर दिख सकता है असर.
Middle East Tension and Impacted Stocks: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच टकराव शुरू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है. पिछले कुछ दिनों में क्रूड ऑयल की कीमत करीब 20 फीसदी तक बढ़ चुकी है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में चिंता बढ़ गई है. वहीं कई रिपोर्ट्स में इस बात का दावा किया जा रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz Strait) अगर लंबे समय तक बंद रहता है तो कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को भी पार कर सकती हैं.
कई सेक्टर के लिए चुनौती बनेगा महंगा तेल
महंगा क्रूड कई इंडस्ट्री के लिए परेशानी बढ़ा सकता है. हाल ही में गुजरात के मोरबी में टाइल्स इंडस्ट्री ने गैस और एनर्जी की बढ़ती लागत के कारण प्रोडक्शन अस्थायी रूप से रोकने का फैसला किया है. यह इस बात का संकेत है कि ऊर्जा लागत बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है. इससे इतर, तेल और गैस की कीमतों में उछाल का असर सबसे ज्यादा ऑयल मार्केटिंग कंपनियों, एविएशन कंपनियों, पेंट और केमिकल इंडस्ट्री, टायर कंपनियों, ऑटो सेक्टर और फर्टिलाइजर कंपनियों पर पड़ सकता है. हालांकि इसके उलट तेल प्रोडक्शन और एक्सप्लोरेशन से जुड़ी कंपनियों को इससे फायदा मिल सकता है क्योंकि ऊंची कीमतों से उनकी इनकम बढ़ती है.
ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर मार्जिन का दबाव
कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे सीधा असर HPCL, BPCL और IOC जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों पर पड़ता है. ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से महंगा क्रूड खरीदती हैं, लेकिन घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पातीं. हालांकि, पिछले कुछ दिनों से इस बात को लेकर चर्चा तेज थी कि भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. लेकिन शनिवार, 7 मार्च को रायटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया कि सरकार फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करने पर कोई विचार नहीं कर रही है. हालांकि, ऐसी स्थिति में बढ़ी हुई लागत का बोझ कुछ समय तक कंपनियों को खुद उठाना पड़ता है, जिससे उनके मार्जिन और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है. इसी कारण हाल के दिनों में इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखने को मिली है.
IOC का शेयर शुक्रवार, 6 मार्च को करीब 2 फीसदी गिरकर 168 रुपये पर बंद हुआ, जबकि युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें लगभग 10 फीसदी की गिरावट आ चुकी है. इसी तरह HPCL का शेयर भी करीब 3.14 फीसदी गिरा और संघर्ष शुरू होने के बाद से इसमें करीब 7.5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है.
एयरलाइंस कंपनियों की लागत भी बढ़ेगी
तेल की कीमतों में उछाल का असर एयरलाइन कंपनियों पर भी पड़ता है क्योंकि उनके कुल खर्च का बड़ा हिस्सा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर होता है. जब क्रूड महंगा होता है तो एटीएफ की कीमत भी बढ़ जाती है, जिससे एयरलाइंस की लागत तेजी से बढ़ती है. अगर क्रूड की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं तो InterGlobe Aviation (IndiGo) और SpiceJet जैसी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है. हाल के कारोबारी सत्र में InterGlobe Aviation का शेयर करीब 2.28 फीसदी गिरा, जबकि युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें लगभग 8.5 फीसदी की गिरावट देखी जा चुकी है.
पेंट, केमिकल और फर्टिलाइजर कंपनियों पर भी असर
कच्चे तेल की कीमतों का असर कई दूसरे इंडस्ट्री तक भी पहुंचता है. पेंट, प्लास्टिक, केमिकल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के निर्माण में कच्चे तेल से जुड़े इनपुट का इस्तेमाल होता है. इसलिए तेल महंगा होने से इन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है. इसका असर Asian Paints, Berger Paints और Kansai Nerolac जैसी पेंट कंपनियों के शेयरों पर भी पड़ सकता है. वहीं फर्टिलाइजर और केमिकल सेक्टर की कंपनियां जैसे Chambal Fertilisers, Nagarjuna Fertilisers, GSFC, RCF, Supreme Petrochem, DCW, Deepak Nitrite और Bayer CropScience पर भी महंगे इनपुट की वजह से दबाव में आ सकती हैं.
होर्मुज स्ट्रेट का बंद होना क्यों अहम
दुनिया में तेल सप्लाई के लिहाज से होर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है. वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 फीसदी हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है. खासतौर पर एशियाई देशों जैसे भारत और चीन को बड़ी मात्रा में तेल इसी मार्ग से मिलता है. मौजूदा तनाव के बीच खबरें हैं कि इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. कई जहाजें स्ट्रेट पर या उससे पहले खड़ी हैं. वहीं, एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की भी 38 जहाजों को वहां पर रोका गया है.
अगर यहां लंबे समय तक रुकावट बनी रहती है तो वैश्विक स्तर पर तेल की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है. सप्लाई में कमी की आशंका के कारण ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है. इसका असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई उद्योगों की लागत और मुनाफे पर भी पड़ेगा.
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