म्यूचुअल फंड्स को पहले ही दिख गया था खतरा! LIC ने इंग्नोर किया ‘रेड फ्लैग’, Rajesh Exports केस में ये सवाल क्यों?
Rajesh Exports पर SEBI की कार्रवाई के बाद कंपनी में निवेश को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. जहां म्यूचुअल फंड्स और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने वर्षों पहले ही कंपनी से दूरी बना ली थी, वहीं LIC लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाती रही.
जहां सरकारी बीमा कंपनी LIC दुनिया की सबसे बड़ी गोल्ड मैन्युफैक्चरर कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स में लगातार पैसा निवेश किए जा रही थी, वहीं दशक पहले म्यूचुअल फंड्स और घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कंपनी से दूरी बना ली थी. कंपनी पर सेबी की हालिया कार्रवाई के बाद अब यह सवाल कॉर्पोरेट जगत में तैरने लगा है कि क्या वर्षों पहले ही राजेश एक्सपोर्ट्स में चल रही तथाकथित हेराफेरी की भनक दिग्गज म्यूचुअल फंड्स हाउस को लग चुकी थी और क्या एलआईसी ने ‘रेड फ्लैग’ नजरअंदाज किया?
म्यूचुअल फंड्स ने बनाई दूरी, LIC ने लगाया दांव
शेयरहोल्डिंग डेटा के मुताबिक, मार्च 2016 में राजेश एक्सपोर्ट्स में म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी महज 0.5% थी, जो बाद में घटकर शून्य (Nil) हो गई. निजी बीमा कंपनियों ने भी इस कंपनी में एक रुपया नहीं लगाया. इसके उलट, सरकारी कंपनी LIC ने इस दौरान अपनी हिस्सेदारी को करीब पांच गुना बढ़ा दिया. मार्च 2016 में एलआईसी की हिस्सेदारी 1.99% थी, जो मार्च 2022 तक बढ़कर 11.22% हो गई. मार्च 2026 तक यह मामूली घटकर 10.8% पर आई है.
विदेशी निवेशकों का भी घटा भरोसा
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की बात करें तो मार्च 2023 में उनकी हिस्सेदारी 17.7% थी, जो मार्च 2026 तक घटकर 14.2% रह गई है. इसमें से भी बड़ा हिस्सा सिर्फ दो विदेशी फंड्स, ‘ब्रिज इंडिया फंड’ (8.46%) और ‘श्वाब फंडामेंटल इमर्जिंग मार्केट इक्विटी ईटीएफ’ (2.7%) के पास है.
“हमें कभी कंपनी के नंबरों पर भरोसा नहीं था”
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के जानकारों और दिग्गज फंड मैनेजरों का कहना है कि सेबी का यह आदेश उनके लिए कोई चौंकाने वाला नहीं है. एक लीडिंग म्यूचुअल फंड के सीईओ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हमें कंपनी द्वारा दिखाए जा रहे वित्तीय आंकड़ों पर कभी भरोसा नहीं था, इसलिए यह स्टॉक हमारे निवेश के पैमाने पर कभी खरा नहीं उतरा.”
वहीं एक ब्रोकिंग फर्म के सीईओ ने कहा कि भारी-भरकम टर्नओवर और बेहद कम मार्जिन का गणित कभी समझ नहीं आता था, इसलिए घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इससे दूरी बनाए रखी.
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सेबी की कार्रवाई और कंपनी की सफाई
सेबी ने वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच ₹15.15 लाख करोड़ का फर्जी रेवेन्यू दिखाने के आरोप में राजेश मेहता पर ट्रेडिंग प्रतिबंध लगा दिया है और फॉरेंसिक ऑडिट के आदेश दिए हैं. दूसरी ओर, राजेश एक्सपोर्ट्स ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सेबी को आंकड़ों को समझने में भ्रम हुआ है. रेगुलेटर ने उनकी स्विस सब्सिडियरी कंपनी ‘Valcambi’ के एबिटडा (EBIDTA) को गलती से रेवेन्यू मान लिया, जिससे यह 97% का अंतर दिख रहा है.
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