फरवरी महीने में FPI की दमदार वापसी, 15 दिन में ₹19,675 करोड़ रुपये की खरीदारी, क्या बाजार में लौटेगी रौनक
तीन महीनों की लगातार भारी बिकवाली के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने फरवरी की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी की है. पहले पखवाड़े में 19,675 करोड़ रुपये का निवेश कर उन्होंने बाजार में नई जान फूंक दी. वैश्विक आर्थिक हालात में सुधार, अमेरिका-भारत व्यापार समझौता और स्थिर घरेलू संकेतकों ने इस सकारात्मक रुख को मजबूती दी है.
FPI Investment in Feb: तीन महीनों तक लगातार बिकवाली करने के बाद विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने फरवरी की शुरुआत में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी की है. फरवरी के पहले पखवाड़े में एफपीआई ने 19,675 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिससे बाजार में सकारात्मक माहौल बना. अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और वैश्विक स्तर पर कम होती आर्थिक चिंताओं ने इस निवेश को समर्थन दिया.
लगातार तीन महीने की बिकवालसे बढ़ी निवेशकों की उम्मीद
मार्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के अनुसार, हाल में अमेरिका में महंगाई के नरम आंकड़े आने से ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक संकेत मिले हैं. इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर में स्थिरता आई है. इन परिस्थितियों ने उभरते बाजारों, खासकर भारत, के प्रति निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ाई है. भारत में स्थिर महंगाई, मजबूत आर्थिक संकेतक और कंपनियों के संतुलित नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया.
बजट और व्यापार समझौते से मिला घरेलू समर्थन
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका-भारत व्यापार समझौते और केंद्रीय बजट 2026 में घोषित प्रोत्साहन उपायों ने बाजार को सहारा दिया. घरेलू स्तर पर ब्याज दरों की स्थिरता और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं में कमी से विदेशी निवेशकों का रुख सकारात्मक हुआ है. फरवरी में 13 तारीख तक 11 में से 7 कारोबारी सत्रों में एफपीआई शुद्ध खरीदार रहे, जबकि केवल 4 सत्रों में उन्होंने बिकवाली की.
एक दिन की बड़ी बिकवाली से आंकड़े हुए प्रभावित
हालांकि फरवरी में कुल मिलाकर निवेश सकारात्मक रहा, लेकिन 13 फरवरी को 7,395 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली ने पूरे महीने के आंकड़ों को प्रभावित किया. उस दिन निफ्टी में 336 अंकों की गिरावट दर्ज हुई. आईटी शेयरों में भी भारी दबाव देखने को मिला और आईटी इंडेक्स में 8.2 फीसदी की गिरावट आई. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों ने इस दौरान आईटी शेयरों में आक्रामक बिकवाली की. इसके बावजूद, विश्लेषकों का कहना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो आने वाले महीनों में विदेशी निवेश का रुख और मजबूत हो सकता है.
