2032 तक 74 GW BESS क्षमता पर है भारत का फोकस, ₹33,000 करोड़ के बैटरी बूम का इन 3 स्टॉक्स को मिल रहा फायदा, रखें नजर

इंडिया में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर का सबसे बड़ा अवसर बन रहा है. सरकार के ₹33,000 करोड़ निवेश और 74 गीगावॉट स्टोरेज लक्ष्य से BESS मार्केट मजबूत हो रहा है. टाटा पावर, एक्मे सोलर और बॉन्डाडा इंजीनियरिंग को इस बैटरी बूम का सबसे अधिक फायदा मिल सकता है.

Battery Energy Storage Systems Image Credit: FreePik

इंडिया में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) आने वाले समय में रिन्यूएबल एनर्जी का सबसे बड़ा सहारा बनने जा रहा है. सोलर और विंड एनर्जी तभी बिजली बनाती हैं जब सूरज और हवा मौजूद हों, इसलिए बची हुई बिजली को स्टोर करके जरूरत के समय इस्तेमाल करने के लिए बैटरी स्टोरेज अब अनिवार्य होता जा रहा है. मिनिस्ट्री ऑफ न्यू एंड रिन्यूएबल एनर्जी के अनुसार इंडिया में सोलर पीवी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता 100 गीगावॉट तक पहुंच गई है. 2030 तक 500 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्य पूरा करने के लिए देश 2031–32 तक 74 गीगावॉट बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करने पर काम कर रहा है, जबकि अभी सिर्फ 205 मेगावॉट क्षमता मौजूद है. सरकार ने इस दिशा में 5,400 करोड़ रुपये की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) जारी की है जिससे करीब 33,000 करोड़ रुपये के निवेश का रास्ता खुलता है. ऐसे में इस तेजी से बढ़ते मार्केट में 3 कंपनियां को इसका फायदा मिल सकता है. इनमें टाटा पावर, Acme Solar और Bondada Engineering (बॉन्डाडा इंजीनियरिंग) शामिल हैं. इनके प्रोजेक्ट, क्षमता और ऑर्डर बुक को देखते हुए बैटरी बूम का सबसे बड़ा फायदा इन्हें मिल सकता है.

टाटा पावर

• कुल बिजली उत्पादन क्षमता: 26.3 गीगावॉट
• ट्रांसमिशन नेटवर्क: 4,659 सर्किट किलोमीटर
• सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माण क्षमता: 4.9 गीगावॉट
• BESS प्रोजेक्ट्स:
केरल में NHPC के साथ पहला 120 मेगावॉट-घंटे स्टैंडअलोन BESS कॉन्ट्रैक्ट (टारगेट 15 महीनों में पूरा)
अगले 2 वर्षों में मुंबई में 100 मेगावॉट BESS इंस्टालेशन प्लान
पम्प्ड स्टोरेज क्षमता: 2.8 गीगावॉट 2028 तक, 1.8 गीगावॉट 2030 तक


फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (H1 FY26):
राजस्व ₹332.3 बिलियन (+3.7%) | EBITDA ₹79.6 बिलियन (+11.2%) | PAT ₹25.1 बिलियन (+9.9%)

Acme Solar

• कुल पोर्टफोलियो: 7.4 गीगावॉट
• ऑपरेशनल: 2.9 गीगावॉट, PPA साइन: 5.2 गीगावॉट, LOA: 2.2 गीगावॉट
• योजना की गई बैटरी स्टोरेज क्षमता: 13.5 गीगावॉट-घंटे
• BESS ऑर्डर बुक: 5.1 गीगावॉट-घंटे (Q2 FY26 तक)
• फर्स्ट डिलीवरी फेज: दिसंबर 2025 से शुरू
• मर्चेंट ऑपरेशन से अनुमानित अतिरिक्त EBITDA: ₹1.7 बिलियन प्रति वर्ष (Q4 FY26 से)


फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (H1 FY26):
राजस्व ₹11.8 बिलियन (+86.6%) | EBITDA ₹10.6 बिलियन (+90.7%) | PAT ₹170 मिलियन से बढ़कर ₹2,460 मिलियन


Bondada Engineering

• प्रमुख क्लाइंट: वोडाफोन आइडिया, एयरटेल, टाटा, जियो, एनटीपीसी, कोल इंडिया
• मौजूदा BESS ऑर्डर बुक: ₹8.5 बिलियन
• रिन्यूएबल + टेलीकॉम ऑर्डर बुक: ₹59.9 बिलियन
• BOO कॉन्ट्रैक्ट: 400 मेगावॉट-घंटे, अवधि 12–14 वर्ष
• अगले 2–3 वर्षों में 2 गीगावॉट BESS क्षमता का लक्ष्य


फाइनेंशियल परफॉर्मेंस (H1 FY26):
राजस्व ₹12.2 बिलियन (+153%) | EBITDA ₹1.4 बिलियन (+182%) | PAT ₹926 मिलियन (+150.9%

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.