Morgan Stanley–Goldman Sachs समेत इन ग्लोबल दिग्गजों का दावा, 2026 में जोरदार वापसी को तैयार भारतीय बाजार
Morgan Stanley, Citigroup और Goldman Sachs जैसी संस्थाओं का मानना है कि कंपनियों की कमाई अब स्थिर हो रही है और सरकार की नीतियां भी समर्थन दे रही हैं. इसलिए आने वाले साल में हालात सुधर सकते हैं. इस साल MSCI इंडिया इंडेक्स में सिर्फ 8.2% की बढ़त हुई, जो उभरते बाजारों (EM) की तुलना में करीब 30 साल का सबसे बड़ा अंतर है.
Indian Market Recover in 2026: पिछला साल भारत की मार्केट के लिए काफी मुश्किलों भरा रहा. शेयर बाजार, रुपए और बॉन्ड तीनों ने कई देशों की तुलना में बहुत खराब प्रदर्शन किया. लेकिन अब वॉल स्ट्रीट की बड़ी कंपनियां मान रही हैं कि 2026 में भारत की मार्केट दोबारा उठ सकती है. Morgan Stanley, Citigroup और Goldman Sachs जैसी संस्थाओं का मानना है कि कंपनियों की कमाई अब स्थिर हो रही है और सरकार की नीतियां भी समर्थन दे रही हैं. इसलिए आने वाले साल में हालात सुधर सकते हैं.
भारत पिछड़ा, लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे
इस साल MSCI इंडिया इंडेक्स में सिर्फ 8.2% की बढ़त हुई, जो उभरते बाजारों (EM) की तुलना में करीब 30 साल का सबसे बड़ा अंतर है. रुपया भी इस साल एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा रहा है. फिर भी विश्लेषकों का कहना है कि कमाई में गिरावट रुक रही है. नीतियों का असर दिख रहा है और AI वाले शेयरों की तेजी कमजोर पड़ेगी, जिससे निवेशक भारत जैसे बाजारों की ओर फिर लौट सकते हैं.
AI ट्रेड धीमा पड़ा तो भारत को फायदा?
कई एक्सपर्ट का मानना है कि साल 2025 में जो पैसा AI कंपनियों में गया था, वह अब धीरे-धीरे निकलकर भारत जैसे स्थिर बाजारों में आ सकता है. CLSA के स्ट्रैटेजिस्ट अलेक्जेंडर रेडमैन का कहना है कि आने वाले महीनों में AI की तेजी थोड़ी कम हो सकती है, जिससे भारत में विदेशी पैसा बढ़ेगा.

रुपये और बॉन्ड में भी सुधार की उम्मीद
रुपया नवंबर में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा, लेकिन अब विश्लेषक कह रहे हैं कि यह अपने निचले स्तर के करीब हो सकता है. ING Bank मानता है कि एशिया में सबसे ज्यादा उछाल की संभावना रुपया ही दिखा रहा है. बॉन्ड मार्केट में भी सुधार की उम्मीद है क्योंकि RBI ने 100 बेसिस पॉइंट तक ब्याज दरें घटाई हैं और अब 5 दिसंबर को फिर से कटौती की उम्मीद है. अगर RBI बड़े पैमाने पर सरकारी बॉन्ड खरीदता है तो यील्ड 25 बेसिस पॉइंट तक गिर सकती है.
GDP मजबूत, कमाई सुधर रही
साल 2025 की तमाम दिक्कतों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था बहुत हद तक संभली रही. सितंबर तिमाही में GDP 8.2% बढ़ा, जो उम्मीद से बेहतर था. कंपनियों का मुनाफा भी थोड़ा सुधरा है. टॉप 100 कंपनियों का प्रॉफिट 12% बढ़ा और कई तिमाहियों बाद कमाई अनुमान से बेहतर रही. निफ्टी ने 20 नवंबर को नया रिकॉर्ड भी छू लिया.
लेकिन जोखिम अब भी मौजूद
बाजार में सुधार के बावजूद कुछ चुनौतियां जारी हैं-
- अमेरिका के टैरिफ,
- मजबूत डॉलर,
- कमजोर निर्यात,
- घरेलू मांग में धीमापन
भारत का निर्यात अक्टूबर में 12% गिरा, जिससे व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर चला गया. साथ ही, निफ्टी अब भी फॉरवर्ड PE 20+ पर ट्रेड कर रहा है, जो उसकी लंबी अवधि की औसत से ऊपर है. UBS के अनुसार, भारतीय बाजार अभी एक तंग दायरे में फंसा है और कुछ समय तक ऐसे ही रह सकता है.
विदेशी निवेशक लौटने लगे
इस साल विदेशी निवेशकों ने काफी पैसा निकाला था. लेकिन पिछले दो महीनों में $1.7 बिलियन की वापसी शुरू हुई है. अगर भारत में हालात और सुधरते हैं, तो 2026 में विदेशी निवेश का बड़ा रुख देखने को मिल सकता है. Pictet Asset Management के अनुसार, 2026 में भारतीय इक्विटी के लिए माहौल बेहतर दिख रहा है और टैरिफ का असर धीरे-धीरे कम हो सकता है.
डेटा सोर्स: मनी कंट्रोल, ब्लूमबर्ग
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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