इन 7 Railway PSU Stock में सरकार घटाएगी हिस्सेदारी, 80000 करोड़ जुटाने का प्लान, देखें लिस्ट में कौन शामिल?
रेलवे से जुड़ी कुछ बड़ी सरकारी कंपनियों को लेकर सरकार के स्तर पर अहम मंथन चल रहा है. आने वाले समय में ऐसे फैसले लिए जा सकते हैं, जिनका असर शेयर बाजार, निवेशकों और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर दिखेगा. रेलवे सेक्टर से जुड़ा यह कदम न सिर्फ सरकारी रणनीति बल्कि बाजार की दिशा भी तय कर सकता है.
Railway PSU Stock to buy: केंद्र सरकार रेलवे को एक बार फिर कमाई का मजबूत जरिया बनाने की तैयारी में है. आने वाले चार सालों में सरकार रेलवे से जुड़ी कुछ बड़ी सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी थोड़ा-थोड़ा घटाकर करीब 80,000 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है. इसका सीधा मकसद यह है कि सरकारी संपत्तियों से पैसा निकालकर विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर के कामों में लगाया जाए. रेलवे पर लोगों का भरोसा और इसकी स्थिर कमाई को देखते हुए सरकार को भरोसा है कि निवेशक इस योजना में दिलचस्पी दिखाएंगे.
किन रेलवे कंपनियों में होगी हिस्सेदारी की बिक्री
सरकार की इस योजना में रेलवे की सात बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां शामिल हैं. इनमें इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC), इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC), रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL), इरकॉन इंटरनेशनल, रेलटेल कॉरपोरेशन, राइट्स लिमिटेड और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) शामिल हैं. इन सभी कंपनियों में फिलहाल सरकार की बड़ी हिस्सेदारी है. योजना यह है कि हिस्सेदारी घटाने के बाद भी सरकार के पास कम से कम 51 प्रतिशत शेयर बने रहें.
बिजनेस स्टैंडर्ड ने सरकारी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि, हिस्सेदारी बिक्री एक साथ नहीं होगी, बल्कि अलग-अलग चरणों में की जाएगी. इसके लिए शेयर बाजार के जरिए ऑफर फॉर सेल यानी OFS का रास्ता अपनाया जाएगा. इससे घरेलू और संस्थागत निवेशकों को इन कंपनियों में निवेश का मौका मिलेगा. सरकार को उम्मीद है कि मौजूदा बाजार हालात और रेलवे पीएसयू के मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
सरकार की रणनीति और सोच
रेलवे से जुड़ी कंपनियों ने बीते कुछ सालों में स्थिर और लगातार ग्रोथ दिखाई है. माल ढुलाई, यात्री सेवाओं, डिजिटल सिस्टम और लॉजिस्टिक्स में विस्तार से इन कंपनियों की कमाई बढ़ी है. सरकार मानती है कि ऐसे में आंशिक विनिवेश से न सिर्फ अच्छी रकम जुटाई जा सकती है, बल्कि इन कंपनियों में पारदर्शिता और दक्षता भी बढ़ेगी. जुटाई गई राशि का इस्तेमाल नए प्रोजेक्ट, कर्ज घटाने और भविष्य की इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों के लिए किया जाएगा.
निवेशकों और अर्थव्यवस्था को क्या फायदा
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, निवेशकों के लिए यह मुनाफे में चल रही और मजबूत सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी लेने का अवसर होगा. सरकार को बिना नियंत्रण खोए पूंजी मिलेगी, जबकि अर्थव्यवस्था को रेलवे के आधुनिकीकरण और विस्तार से लंबे समय का फायदा होगा.
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हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया वित्त वर्ष 2027 से शुरू होकर 2030 तक चलने की संभावना है. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह योजना सफल रहती है, तो सरकार ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स जैसे अन्य सेक्टरों में भी इसी तरह के कदम उठा सकती है. कुल मिलाकर, यह कदम सरकार की आर्थिक नीति में संतुलन, अनुशासन और बाजार आधारित विकास की दिशा दिखाता है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
