भारत का 8 GW डेटा सेंटर सपना! पावर कंपनियों पर दारोमदार, 2 स्टॉक्स कतार में सबसे आगे, RoCE-RoE काफी हाई
भारत में डेटा सेंटर्स की कुल इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी करीब 1 गीगावॉट से थोड़ी ज्यादा है. डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ा एक सेक्टर आने वाले वर्षों में बड़ा निवेश आकर्षित कर सकता है. बढ़ती मांग, मजबूत ऑर्डर बुक और खास वैल्यूएशन संकेतों ने कुछ चुनिंदा कंपनियों को निवेशकों के रडार पर ला दिया है.
DATA Centre Stocks: भारत तेजी से अपने डिजिटल भविष्य की ओर बढ़ रहा है और इसके पीछे एक मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जा रहा है. मोबाइल डेटा की बढ़ती खपत, 5G नेटवर्क का विस्तार और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई तकनीकों ने देश में डेटा सेंटर्स की जरूरत को कई गुना बढ़ा दिया है. यही वजह है कि आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी दिख रही है. इसका सीधा फायदा उन कंपनियों को मिल सकता है, जो पावर, इंजन और जनरेटर जैसे जरूरी सिस्टम उपलब्ध कराती हैं.
भारत में डेटा सेंटर सेक्टर क्यों बन रहा है बड़ा मौका
फिलहाल भारत में डेटा सेंटर्स की कुल इंस्टॉल्ड पावर कैपेसिटी करीब 1 गीगावॉट से थोड़ी ज्यादा है. इंडस्ट्री का अनुमान है कि यह क्षमता 2026 तक 2 गीगावॉट से ज्यादा हो जाएगी. लंबी अवधि की बात करें तो 2030 तक यह आंकड़ा 8 गीगावॉट से भी ऊपर जा सकता है. इसका मतलब है कि अगले कुछ सालों में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर 30 अरब डॉलर यानी करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश हो सकता है.
इस तेजी के पीछे भारत का बड़ा मोबाइल यूजर बेस, डेटा लोकलाइजेशन के नियम और AI वर्कलोड्स की बढ़ती जरूरत जैसे बड़े कारण हैं.
डेटा सेंटर्स को 24×7 भरोसेमंद बिजली की जरूरत होती है. जरा सी रुकावट भी भारी नुकसान कर सकती है. ऐसे में बैकअप पावर सिस्टम, इंजन और जनरेटर की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसी थीम पर दो भारतीय कंपनियां खास तौर पर चर्चा में हैं, जिन्हें इस सेक्टर से बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
Cummins India
Cummins India पावर सेक्टर की जानी-मानी कंपनी है. यह इंजन और जनरेटर सेट्स की सप्लाई रेलवे, मरीन, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस, रियल एस्टेट और ऑयल एंड गैस जैसे कई सेक्टर्स में करती है. कंपनी का कारोबार सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और चीन तक फैला हुआ है.
Q2 FY26 में कंपनी का पावर जनरेशन सेगमेंट कुल रेवेन्यू का करीब 40 फीसदी रहा. इस सेगमेंट की आय सालाना आधार पर 49 फीसदी बढ़कर 1,340 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. इसमें बड़ा योगदान डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स का रहा, जो इस सेगमेंट के रेवेन्यू का करीब 40 फीसदी हिस्सा बनाते हैं. बड़े प्रोजेक्ट्स की सफल डिलीवरी और मिशन-क्रिटिकल बैकअप पावर की भारी मांग ने इस ग्रोथ को सहारा दिया.
Q2 FY26 में Cummins India का कुल रेवेन्यू 28 फीसदी बढ़कर 3,122 करोड़ रुपये पहुंच गया. शुद्ध मुनाफा 38.5 फीसदी उछलकर 622 करोड़ रुपये रहा. ऑपरेटिंग मार्जिन 22 फीसदी रहा, जो पिछले साल से बेहतर है.
दो तरह के ग्राहक, अलग-अलग मांग
Cummins के मुताबिक भारत में डेटा सेंटर ग्राहकों को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है.
पहले हैं बड़े ग्लोबल हाइपरस्केलर्स, जो बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट करते हैं. इनका बिजनेस थोड़ा अनियमित होता है, लेकिन जब ऑर्डर आता है तो रेवेन्यू में तेज उछाल दिखता है. दूसरे हैं कोलोकेशन प्लेयर्स, जिनकी मांग साल भर स्थिर रहती है. ये कंपनियां दूसरे बिजनेस को डेटा सेंटर स्पेस किराए पर देती हैं.
डेटा सेंटर सेक्टर में एंट्री आसान नहीं है. यहां टेक्निकल जरूरतें और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन काफी जटिल होती है. Cummins इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा से निपटने के लिए डिलीवरी टाइम कम करने, लोकल मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर फोकस कर रही है.
Kirloskar Oil Engines
Kirloskar Oil Engines (KOEL), Kirloskar Group की प्रमुख कंपनी है. इसका प्रोडक्ट पोर्टफोलियो काफी बड़ा है, जिसमें छोटे कृषि उपकरणों से लेकर बड़े पावर सिस्टम तक शामिल हैं. कंपनी 3 kVA से लेकर 12,000 kVA तक के जनरेटर बनाती है और भविष्य को देखते हुए एनर्जी स्टोरेज, इलेक्ट्रिफिकेशन और फ्यूल सेल्स जैसे क्षेत्रों में भी निवेश कर रही है.
KOEL डेटा सेंटर सेक्टर को एक रणनीतिक अवसर के रूप में देख रही है. कंपनी ने 1,500 kVA से लेकर 2,500 kVA तक के बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं. हालांकि यह बाजार काफी नियंत्रित है और अमेरिकी मानकों से चलता है, इसलिए कंपनी फिलहाल चुनिंदा ग्राहकों पर फोकस कर रही है.
वैल्यू चेन में ऊपर जाने की कोशिश
Kirloskar सिर्फ छोटे एज डेटा सेंटर्स तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी धीरे-धीरे वैल्यू चेन में ऊपर जाकर बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने की रणनीति पर काम कर रही है. इसके लिए जरूरी प्रोडक्ट और टेक्नोलॉजी तैयार की जा चुकी है.
Q2 FY26 में KOEL का रेवेन्यू 30 फीसदी बढ़कर 1,948 करोड़ रुपये पहुंच गया. शुद्ध मुनाफा 27 फीसदी बढ़कर 159 करोड़ रुपये रहा. मैनेजमेंट को भरोसा है कि प्रोडक्ट मिक्स बेहतर होने से आगे मार्जिन में भी सुधार दिख सकता है.
कंपनी ने FY30 तक 2 अरब डॉलर के रेवेन्यू का लक्ष्य रखा है. इसके लिए वह घरेलू बाजार में क्षमता उपयोग बढ़ाने, अंतरराष्ट्रीय विस्तार और नए सेक्टर्स जैसे डिफेंस और रेलवे में एंट्री की योजना बना रही है.
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क्या है दोनों के शेयरों का हाल
भारत में डेटा सेंटर सेक्टर का विस्तार एक लंबा और मजबूत ट्रेंड बनता दिख रहा है. ऐसे में Cummins India के शेयरों की बात करें तो मौजूदा वक्त में कंपनी के शेयर 4145 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं. एक साल में इसने निवेशकों को 31 फीसदी और पांच वर्षों में 550 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं Kirloskar Oil Engines के शेयर 1177 रुपये पर ट्रेड कर रहे हैं. बीते पींच वर्षों में कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को 777 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है.
| कंपनी | पी/ई (P/E) | 5 साल का औसत पी/ई | RoCE (%) | RoE (%) |
|---|---|---|---|---|
| Cummins | 50.0 | 39.7 | 36.3 | 28.2 |
| Kirloskar | 36.8 | 18.5 | 13.7 | 15.4 |
| इंडस्ट्री औसत | 39.5 | — | 25.7 | 20.6 |
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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