ईरान पर हमले के बाद निवेशकों के डूबे 22.40 लाख करोड़, BSE-लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप लहूलुहान

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने भारतीय स्टॉक मार्केट को गहरी मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है. 27 फरवरी से 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 3,721.03 अंक या 4.57 फीसदी गिरा है.

निवेशकों को लगा बड़ा झटका. Image Credit: @Money9live

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लड़ाई शुरू होने के बाद से इक्विटी इन्वेस्टर्स के 22.40 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं. इसकी वजह से स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई है, जिससे BSE सेंसेक्स 4.6 फीसदी नीचे चला गया. अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर मिलिट्री हमले किए, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए. मिलिट्री हमले के बाद, ईरान ने UAE, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और सऊदी अरब समेत कई खाड़ी देशों में इजरायली और अमेरिकी मिलिट्री बेस को निशाना बनाकर कई हमले किए हैं.

पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के चलते ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 12.82 फीसदी बढ़कर 104.6 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

कितना टूट गया सेंसेक्स?

27 फरवरी से 30 शेयरों वाला BSE सेंसेक्स 3,721.03 अंक या 4.57 फीसदी गिरा है. इस दौरान BSE-लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैपिटलाइजेशन 22,40,408.82 करोड़ रुपये की भारी गिरावट के साथ 4,41,10,262.45 करोड़ रुपये (USD 4.78 ट्रिलियन) रह गया.

सोमवार को इंडियन इक्विटी मार्केट लगभग 3 फीसदी की बड़ी गिरावट के साथ खुलने के बाद सेशन के आखिर में तेजी से नीचे आ गए, क्योंकि कमजोर ग्लोबल संकेतों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष ने इन्वेस्टर सेंटीमेंट पर भारी असर डाला.

जियो-पॉलिटिकल रिस्क बढ़ा

ऑनलाइन ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, ‘जियो-पॉलिटिकल रिस्क बढ़ने से क्रूड ऑयल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के निशान से ऊपर चली गईं और भारतीय रुपया US डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया, जिससे महंगाई और बाहरी बैलेंस को लेकर चिंताएं बढ़ गईं.’

स्टॉक मार्केट बुरी तरह प्रभावित

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने भारतीय स्टॉक मार्केट को गहरी मुश्किल में डाल दिया है, क्योंकि पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है, जिससे एशियाई मार्केट में एनर्जी का फ्लो रुक गया है और प्रोड्यूसर प्रोडक्शन बंद करने लगे हैं, जिससे क्रूड ऑयल की कीमतें चार साल के सबसे ऊंचे लेवल पर पहुंच गई हैं.

85 फीसदी तेल इंपोर्ट करता है भारत

भारत कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बहुत ज्यादा प्रभावित है, क्योंकि यह अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल इम्पोर्ट करता है. कीमतों में अचानक बढ़ोतरी से कंज्यूमर कीमतें बढ़ सकती हैं और कई कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है जो कच्चे तेल को मुख्य कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करती हैं.

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