चढ़ते-गिरते बाजार के बीच नितिन कामथ की रिटेल निवेशकों को सलाह, बताया क्या है सबसे मजबूत रास्ता

ग्लोबल मार्केट में बढ़ती अनिश्चितता, महंगे कच्चे तेल और ब्याज दरों के दबाव के बीच जेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने निवेशकों को फिर से डायवर्सिफिकेशन की अहमियत समझाई. उनका कहना है कि संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो ही लंबे समय में बेहतर रिटर्न और कम जोखिम सुनिश्चित करता है, खासकर तब जब हर एसेट क्लास दबाव में हो.

चढ़ते-गिरते बाजार के बीच क्या करें? Image Credit: @Money9live

Nithin Kamath Diversification Strategy: युद्ध से जुड़ी अनिश्चितता, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और ब्याज दरों को लेकर बनी चिंता से ग्लोबल मार्केट में उथल-पुथल जारी है. इसी के बीच जेरोधा के सह-संस्थापक नितिन कामथ ने एक बार फिर निवेश की अपनी पुरानी लेकिन बेहद अहम सलाह दोहराई है. कामथ ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ज्यादातर निवेशकों के लिए विविधीकरण यानी डायवर्सिफिकेशन ही लंबी अवधि में स्थिर रिटर्न पाने और रिस्क कम करने का सबसे भरोसेमंद तरीका है.

कामथ ने क्या कहा?

उन्होंने गुरुवार, 2 अप्रैल को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट साझा करते हुए एक साधारण दिखने वाले पोर्टफोलियो परफॉर्मेंस चार्ट का उदाहरण दिया. यह चार्ट जेरोधा के कंसोल प्लेटफॉर्म का था, जिसे आम निवेशक रोज देखते हैं. लेकिन कामथ का कहना था कि इस तरह का चार्ट बनाना जितना आसान दिखता है, असल में उतना है नहीं. हर निवेश पोर्टफोलियो कई जटिल तत्वों से मिलकर बनता है, जैसे पैसे का आना-जाना, डिविडेंड, बोनस शेयर, स्टॉक स्प्लिट, आंशिक निकासी, ट्रांसफर और अन्य कई फैक्टर. अगर इन सभी को सही तरीके से कैलकुलेट न किया जाए, तो परफॉर्मेंस का डेटा भ्रामक हो सकता है.

कामथ के अनुसार, इन सभी संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखकर एक सटीक और भरोसेमंद सिस्टम तैयार करना इंजीनियरिंग के लिहाज से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है. उनका कहना था कि इस तरह की तकनीकी जटिलताओं को समझे बिना निवेशक अक्सर डेटा को बहुत सरल मान लेते हैं, जबकि इसके पीछे काफी मेहनत और सटीकता छिपी होती है.

डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो ही बेहतर

हालांकि उनकी इस पोस्ट का मूल संदेश तकनीक नहीं, बल्कि निवेश का सिद्धांत था. उन्होंने दोहराया कि संतुलित और डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो ही समय के साथ बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. उन्होंने अपनी कंपनी के एक सहयोगी का उदाहरण भी दिया, जिनका पोर्टफोलियो लगातार बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन करता रहा और इसकी वजह कोई एक बड़ा दांव नहीं, बल्कि एक संतुलित निवेश रणनीति थी.

दबाव में बाजार!

कामथ की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनिया भर के बाजार दबाव में हैं. अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव बढ़ने के बाद से वैश्विक इक्विटी बाजारों में गिरावट देखी गई है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने महंगाई की चिंता को और बढ़ा दिया है, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगाया है. भारत का प्रमुख सूचकांक निफ्टी 50 भी इस जियो पॉलिटिकल तनाव के बाद 10 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है.

स्थिति और जटिल इसलिए हो गई है क्योंकि सिर्फ शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि दूसरे एसेट क्लास भी दबाव में हैं. आमतौर पर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने में भी इस बार स्थिर बढ़त नहीं दिखी. वहीं, बॉन्ड यील्ड्स बढ़ रही हैं, क्योंकि बाजार को डर है कि महंगाई काबू में रखने के लिए केंद्रीय बैंक लंबे समय तक सख्त मौद्रिक नीति बनाए रख सकते हैं.

पहले भी कामथ ने दी हिदायत

इससे पहले 30 मार्च को भी उन्होंने इसी विचार को और स्पष्ट शब्दों में रखा था. उन्होंने कहा था कि कोई भी निश्चित रूप से नहीं बता सकता कि कौन सा एसेट क्लास बेहतर प्रदर्शन करेगा. इसलिए लगभग 99 फीसदी निवेशकों के लिए सबसे समझदारी भरा कदम यही है कि वे अपने निवेश को अलग-अलग एसेट्स में बांटे और हर परिस्थिति में निवेश बनाए रखें, चाहे बाजार ऊपर जाए या नीचे.

दरअसल, डायवर्सिफिकेशन का उद्देश्य भविष्यवाणी करना नहीं, बल्कि अनिश्चितता के बीच संतुलन बनाए रखना है. यह रणनीति निवेशकों को एक ही सेक्टर, थीम या एसेट पर निर्भर होने से बचाती है. जब एक सेक्टर कमजोर होता है, तो दूसरे क्षेत्र से मिलने वाला रिटर्न नुकसान को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है.

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.