क्या अभी निफ्टी में शॉर्ट करना सही रणनीति है? इतिहास कहता है बड़ी गिरावट के बाद अक्सर आती है रिकवरी: SAMCO Securities
ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल के कारण यह रेशियो हाल में तेजी से नीचे आया है. इतिहास में जब भी यह रेशियो ऐसे लेवल्स के आसपास आया है, तब अक्सर इसमें रिकवरी देखने को मिली है. ऐसे में मौजूदा स्तरों से बाजार में बहुत ज्यादा गिरावट की संभावना सीमित हो सकती है और इस समय नए शॉर्ट ट्रेड का जोखिम ज्यादा माना जा रहा है.
भारतीय शेयर बाजार में हाल की तेज गिरावट के बाद कई निवेशक Nifty 50 में शॉर्ट पोजीशन लेने पर विचार कर रहे हैं. हालांकि जानकारों का मानना है कि मौजूदा स्तर पर निफ्टी को शॉर्ट करना शायद सही रणनीति नहीं हो सकती. SAMCO Securities में रिसर्च एनालिस्ट Jahol Prajapati और Saurav Chaube के अनुसार, पिछले आंकड़ों के आधार पर अभी आक्रामक तरीके से शॉर्ट पोजीशन लेने से बचना बेहतर हो सकता है. उन्होंने इसके पीछे दो अहम वजहें बताई हैं.
निफ्टी और ब्रेंट क्रूड का अनुपात
निफ्टी और ब्रेंट क्रूड का रेशियो एक अहम लंबी अवधि के सपोर्ट जोन के करीब पहुंच रहा है. ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल के कारण यह रेशियो हाल में तेजी से नीचे आया है. इतिहास में जब भी यह रेशियो ऐसे स्तरों के आसपास पहुंचा है, तब अक्सर इसमें रिकवरी देखने को मिली है. ऐसे में मौजूदा स्तरों से बाजार में बहुत ज्यादा गिरावट की संभावना सीमित हो सकती है और इस समय नए शॉर्ट ट्रेड का जोखिम ज्यादा माना जा रहा है.
5 प्रतिशत से ज्यादा गिरावट के बाद बाजार का इतिहास
दूसरी वजह पिछले 15 साल के बाजार के व्यवहार पर आधारित है. आंकड़ों के मुताबिक इस अवधि में ऐसे करीब 7 मौके आए जब बाजार एक ही हफ्ते में 5 प्रतिशत से ज्यादा गिरा. इन मामलों में ज्यादातर समय अगले कुछ हफ्तों में बाजार स्थिर हुआ और फिर रिकवरी देखने को मिली, सिवाय उन समयों के जब सिस्टम स्तर पर बड़ा संकट था. औसतन ऐसे मामलों में गिरावट के बाद अगले 1 हफ्ते में करीब 3.4 प्रतिशत, 2 हफ्तों में करीब 3 प्रतिशत, 3 हफ्तों में करीब 1.4 प्रतिशत और 4 हफ्तों में करीब 1.9 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली है. पॉजिटिव रिटर्न की संभावना भी काफी ज्यादा रही है, जहां 1 हफ्ते, 2 हफ्ते और 4 हफ्ते की अवधि में करीब 71 प्रतिशत मामलों में बाजार ऊपर गया, जबकि 3 हफ्तों में करीब 57 प्रतिशत मौकों पर तेजी दर्ज हुई.

कच्चे तेल की चाल भी अहम
हाल में निफ्टी और क्रूड के रेशियो में आई गिरावट का बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है. अगर आने वाले समय में तेल की कीमतें स्थिर होती हैं या घटती हैं, तो यह रेशियो फिर से सुधर सकता है. यह दो तरीकों से हो सकता है. पहला, कच्चे तेल की कीमतें गिरें और निफ्टी स्थिर रहे, जिससे रेशियो बेहतर हो जाए. दूसरा, तेल की कीमतें स्थिर रहें और निफ्टी में तेजी आए, जिससे भी रेशियो में सुधार हो सकता है.
13 मार्च का उदाहरण
हाल ही में 13 मार्च 2026 को खत्म हुए हफ्ते में Nifty 50 करीब 5.3 प्रतिशत गिरा था. यह स्थिति इतिहास में पहले भी देखे गए पैटर्न जैसी है. ऐसे में टेक्निकली निचले स्तरों से बाजार में रिबाउंड की संभावना बढ़ जाती है. इसलिए फिलहाल निफ्टी में आक्रामक शॉर्ट पोजीशन लेने से बचना ज्यादा समझदारी भरा कदम हो सकता है.
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