नई ऊंचाई पर पहुंचा भारतीय शेयर बाजार, 5.3 ट्रिलियन डॉलर पार पहुंचा NSE का मार्केट कैप
भारतीय शेयर बाजार ने नई ऊंचाई हासिल की है. NSE की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में NSE मार्केट कैप बढ़कर 5.3 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया. पिछले 30 वर्षों में भारतीय बाजार ने 15.2 फीसदी एनुअलाइज्ड मार्केट कैपिटलाइजेशन ग्रोथ दर्ज की है. देश में रजिस्टर्ड इन्वेस्टर्स की संख्या बढ़कर 12.9 करोड़ हो गई है. FY26 में 219 कंपनियों ने पब्लिक मार्केट से 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए हैं.
NSE Market Cap: भारत का इक्विटी बाजार तेजी से वैश्विक ताकत बनकर उभर रहा है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के शेयर बाजार ने पिछले 30 वर्षों में 15.2 फीसदी एनुअलाइज्ड मार्केट कैपिटलाइजेशन ग्रोथ दर्ज की है. इसी के साथ 2025 में NSE का कुल मार्केट कैप बढ़कर 5.3 ट्रिलियन डॉलर पर पहुंच गया है. यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब देश में निवेशकों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी है.
FY26 रहा फंड मोबिलाइजेशन के लिए शानदार साल
वित्त वर्ष 2026 भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए बेहद शानदार साबित हुआ. इस दौरान इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स के जरिए कुल 20.3 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए. पब्लिक मार्केट से पूंजी जुटाने के लिए 219 कंपनियों ने हिस्सा लिया और कुल 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए. यह किसी एक साल में अब तक का सबसे बड़ा मोबिलाइजेशन माना जा रहा है.
इस तेजी में मेनबोर्ड आईपीओ की अहम भूमिका रही, जहां 108 कंपनियां लिस्ट हुईं. वहीं एसएमई सेगमेंट ने भी मजबूत प्रदर्शन किया. NSE इमर्ज प्लेटफॉर्म पर औसत इश्यू साइज FY20 के 13 करोड़ रुपये से बढ़कर FY26 में 48 करोड़ रुपये पहुंच गया.
तेजी से बढ़ा इन्वेस्टर बेस
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में रजिस्टर्ड इन्वेस्टर्स की संख्या बढ़कर 12.9 करोड़ यानी लगभग 13 करोड़ हो गई है. पिछले पांच वर्षों में यह संख्या 3.2 गुना बढ़ी है. निवेश अब केवल मुंबई, दिल्ली या बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में इसका विस्तार हो रहा है. महाराष्ट्र 2 करोड़ निवेशकों का आंकड़ा पार करने वाला पहला राज्य बन गया है.
युवा निवेशकों का बढ़ता दबदबा
भारतीय शेयर बाजार का चेहरा तेजी से बदल रहा है. FY26 में नए जुड़ने वाले निवेशकों में लगभग 79 फीसदी निवेशक 40 वर्ष से कम उम्र के रहे. यही वजह है कि निवेशकों की मीडियन एज पांच वर्षों में 36 साल से घटकर 33 साल हो गई है. महिलाओं की भागीदारी में भी मजबूत सुधार देखा गया है. कुल इन्वेस्टर बेस में अब महिलाओं की हिस्सेदारी 24.9 फीसदी तक पहुंच गई है. यह संकेत देता है कि भारतीय निवेश संस्कृति अब ज्यादा समावेशी बन रही है.
ट्रेडिंग वॉल्यूम अब भी सीमित हाथों में
हालांकि निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, लेकिन ट्रेडिंग टर्नओवर अब भी कुछ बड़े प्रतिभागियों के हाथों में केंद्रित है. कैश मार्केट टर्नओवर का 78 फीसदी हिस्सा केवल 0.2 फीसदी निवेशक करते हैं. वहीं डेरिवेटिव्स सेगमेंट में करीब 5 फीसदी निवेशक इक्विटी ऑप्शंस एक्टिविटी का 87 फीसदी हिस्सा संभालते हैं.
वैश्विक बाजार में भारत की बढ़ती ताकत
दुनिया का सबसे बड़ा बाजार अभी भी अमेरिका है, जिसका मार्केट कैप 73.3 ट्रिलियन डॉलर है. लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एशिया, खासकर भारत और चीन, वैश्विक पूंजी बाजार में बड़ी भूमिका निभाएंगे. भारत में आईपीओ बूम, युवा निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी और मजबूत रिटेल पार्टिसिपेशन यह संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में भारतीय शेयर बाजार नई ऊंचाइयों को छू सकता है.
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