Reliance के शेयरों में भयंकर बिकवाली! मार्केट कैप ₹18 लाख करोड़ के नीचे फिसला, जानें क्या है वजह?
शेयर में आई इस गिरावट का असर कंपनी के मार्केट कैप पर भी पड़ा. Reliance का मार्केट कैप गिरकर 18 लाख करोड़ रुपये के नीचे आ गया और करीब 17.65 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना. Reliance निफ्टी 50 का सबसे बड़ा लूजर बनकर उभरा. कंपनी का इंडेक्स में वजन ज्यादा होने की वजह से Nifty 50 भी दबाव में आ गया.

Why Reliance Industries Share Price Crashed: सोमवार को शेयर बाजार में भारी दबाव के बीच Reliance Industries के शेयर में तेज गिरावट देखने को मिली. कंपनी का शेयर 4 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर बीएसई पर करीब 1,295 रुपये तक पहुंच गया. इस गिरावट का असर पूरे बाजार पर भी दिखा और निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर नजर आया. बीते 3 महीने में शेयर 17 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है. शेयर में आई इस गिरावट का असर कंपनी के मार्केट कैप पर भी पड़ा. Reliance का मार्केट कैप गिरकर 18 लाख करोड़ रुपये के नीचे आ गया और करीब 17.65 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय बना.
बाजार पर पड़ा असर
Reliance निफ्टी 50 का सबसे बड़ा लूजर बनकर उभरा. कंपनी का इंडेक्स में वजन ज्यादा होने की वजह से Nifty 50 भी दबाव में आ गया और कारोबार के दौरान करीब 0.7 प्रतिशत तक फिसल गया. निफ्टी में Reliance का वजन करीब 8.87 प्रतिशत है, जो HDFC Bank के बाद दूसरा सबसे ज्यादा है, इसलिए इसमें गिरावट का सीधा असर इंडेक्स पर दिखा.
क्यों गिरा Reliance का शेयर?
Reliance के शेयर में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण रहे. सबसे पहला कारण ग्लोबल टेंशन है, जहां मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है, खासतौर पर Strait of Hormuz में रुकावट की आशंका से बाजार में डर का माहौल बना हुआ है.
दूसरा बड़ा कारण सरकार का फैसला है, जिसमें डीजल और एटीएफ पर एक्सपोर्ट ड्यूटी फिर से लागू कर दी गई है. सरकार ने डीजल पर करीब 21.50 रुपये प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.50 रुपये प्रति लीटर ड्यूटी लगाई है, जबकि पेट्रोल को इससे बाहर रखा गया है. इसके अलावा, पिछले दो हफ्तों में शेयर पहले ही करीब 8 प्रतिशत गिर चुका है, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है.
क्या SEZ रिफाइनरी को राहत?
रिपोर्ट्स के मुताबिक Reliance की SEZ रिफाइनरी पर यह एक्सपोर्ट टैक्स लागू नहीं हो सकता, क्योंकि पहले भी अदालत के फैसलों में इसे राहत मिली है. कंपनी के डीजल उत्पादन का करीब 75 प्रतिशत और जेट फ्यूल का 35 प्रतिशत हिस्सा SEZ से आता है, जिससे टैक्स का असर सीमित रहने की संभावना है.
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