SEBI का बड़ा फैसला, गोल्ड ETF में फ्यूचर्स को मिली मंजूरी; जानें क्या होगा बदलाव
SEBI के नए नियमों के बाद गोल्ड ETF में बड़ा बदलाव आया है, जहां अब फंड हाउस फिजिकल गोल्ड के साथ गोल्ड फ्यूचर्स में भी निवेश कर सकते हैं. HDFC Mutual Fund ने 22 अप्रैल 2026 से इस बदलाव को लागू करने की घोषणा की है. इससे निवेशकों के लिए गोल्ड ETF का स्वरूप पहले से अधिक लचीला हो जाएगा, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं, जैसे ट्रैकिंग एरर और रोलओवर लागत.
Gold Futures ETF: अगर आप गोल्ड ETF में निवेश करते हैं, तो आपके निवेश से जुड़ी एक अहम बात बदल गई है. अब यह फंड केवल फिजिकल गोल्ड तक सीमित नहीं रहेगा. बाजार नियामक SEBI ने जून 2024 के मास्टर सर्कुलर के जरिए गोल्ड ETF को गोल्ड फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स में निवेश की अनुमति दे दी है. इस फैसले को लागू करने वाला पहला फंड हाउस HDFC Mutual Fund बना है, जिसने 22 April 2026 से अपने गोल्ड ETF में यह बदलाव लागू करने का निर्णय लिया है.
गोल्ड ETF के पारंपरिक स्ट्रक्चर में बदलाव
अब तक गोल्ड ETF का मॉडल बेहद सरल था. निवेशकों का पैसा लेकर फंड हाउस फिजिकल गोल्ड खरीदता था और उसी के आधार पर रिटर्न मिलता था. यह एक “सिंगल-इंग्रीडिएंट” प्रोडक्ट माना जाता था, जिसमें पारदर्शिता और सरलता दोनों थीं. अब SEBI के नए नियम के बाद गोल्ड ETF अपने अनिवार्य 95 फीसदी गोल्ड एलोकेशन में फिजिकल गोल्ड के साथ-साथ गोल्ड फ्यूचर्स को भी शामिल कर सकते हैं. यानी अब “गोल्ड” का मतलब केवल सोने की ईंट नहीं, बल्कि उससे जुड़ा फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट भी हो सकता है.
क्या होते हैं गोल्ड फ्यूचर्स
गोल्ड फ्यूचर्स एक तरह का फाइनेंशियल कॉन्ट्रैक्ट होता है, जिसमें भविष्य की किसी तय तारीख पर निश्चित कीमत पर सोना खरीदने या बेचने का डील किया जाता है. इसमें फंड के पास असली सोना नहीं होता, बल्कि एक कॉन्ट्रैक्ट होता है, जो सोने की कीमत को ट्रैक करता है. रिटर्न के स्तर पर यह अक्सर समान दिखता है, लेकिन स्ट्रक्चर के स्तर पर यह बड़ा अंतर पैदा करता है.
फायदे और जोखिम दोनों मौजूद
फिजिकल गोल्ड रखने में स्टोरेज, इंश्योरेंस और लॉजिस्टिक्स जैसी लागतें जुड़ी होती हैं. गोल्ड फ्यूचर्स इन खर्चों से बचने में मदद करते हैं और फंड मैनेजर को ज्यादा लचीलापन देते हैं. लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी आते हैं. फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स की एक तय अवधि होती है, जिसके बाद उन्हें “रोलओवर” करना पड़ता है और इसमें लागत आती है.
इससे गोल्ड की वास्तविक कीमत और ETF के रिटर्न के बीच अंतर (ट्रैकिंग एरर) बढ़ सकता है. इसके अलावा, फ्यूचर्स का सेटलमेंट कैश या फिजिकल डिलीवरी, दोनों तरीके से हो सकता है, जिसके लिए सक्रिय मैनेजमेंट जरूरी होता है. यह जटिलता पारंपरिक गोल्ड ETF में नहीं थी.
क्या निवेशकों को चिंता करनी चाहिए
फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है. 95 फीसदी गोल्ड में निवेश की शर्त अब भी लागू है. HDFC Mutual Fund ने स्पष्ट किया है कि फ्यूचर्स का उपयोग केवल विशेष परिस्थितियों में किया जाएगा, जैसे जब फिजिकल गोल्ड खरीदना मुश्किल हो. 28 फरवरी 2026 तक HDFC Gold ETF की 98.65 फीसदी एसेट फिजिकल गोल्ड में ही थी.
साथ ही, नियमों के तहत फ्यूचर्स और संबंधित इंस्ट्रूमेंट्स में अधिकतम 50 फीसदी एक्सपोजर की सीमा है, लेकिन इसे गलत तरीके से समझा जा रहा है. यह सीमा 95 फीसदी गोल्ड एलोकेशन के भीतर ही लागू होती है, न कि उसके बाहर.
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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
