सरकार का एक फैसला और चमके Textile स्टॉक्स, 11 फीसदी तक की आई रैली; जानें कैसे मिला बूस्ट?

केंद्र सरकार ने 31 मई को जारी अधिसूचना में कपास के आयात पर लगने वाली सभी कस्टम ड्यूटी को अस्थायी रूप से समाप्त करने का फैसला किया. वित्त मंत्रालय के अनुसार यह छूट 1 जून 2026 से लागू हो गई है और 30 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी. इसका असर इस सेक्टर के शेयरों पर देखने को मिला.

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सरकार द्वारा कपास (Cotton) के आयात पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को पांच महीने के लिए हटाने के फैसले के बाद सोमवार को Textile Stocks में जोरदार खरीदारी देखने को मिली. कारोबार के दौरान Indo Count Industries का शेयर सबसे ज्यादा 11 फीसदी तक उछल गया. इसके अलावा, Vardhman Textiles, Gokaldas Exports, Arvind, Welspun Living, Trident, KPR Mill और Raymond Lifestyle के शेयरों में 2 फीसदी से 7 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई. बाजार के जानकारों का मानना है कि इस फैसले से Textile और Apparel कंपनियों की लागत घटेगी.

सरकार ने पांच महीने के लिए हटाई Import Duty

  • केंद्र सरकार ने 31 मई को जारी अधिसूचना में कपास के आयात पर लगने वाली सभी कस्टम ड्यूटी को अस्थायी रूप से समाप्त करने का फैसला किया. वित्त मंत्रालय के अनुसार यह छूट 1 जून 2026 से लागू हो गई है और 30 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी.
  • सरकार का कहना है कि इस कदम से भारतीय Textile Industry को बेहतर क्वालिटी वाला और Contamination-Free Cotton आसानी से उपलब्ध हो सकेगा, जिससे निर्यातकों को बढ़ती वैश्विक मांग का फायदा उठाने में मदद मिलेगी.

Textile कंपनियों को कैसे होगा फायदा?

  • Cotton Textile और Apparel इंडस्ट्री के लिए सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल है.
  • ड्यूटी हटने से आयात होने वाला कपास सस्ता होगा, जिससे कंपनियों की उत्पादन लागत कम हो सकती है. इससे Yarn, Fabric और Garment Manufacturers के मार्जिन में सुधार की संभावना बढ़ेगी.
  • सरकार का मानना है कि यह फैसला विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योगों (SMEs) के लिए राहत लेकर आएगा, जो हाल के महीनों में कपास और यार्न की बढ़ती कीमतों से दबाव में थे.

पिछले साल भी मिला था फायदा

सरकार ने पिछले वर्ष भी अगस्त के मध्य से दिसंबर के अंत तक कॉटन इंपोर्ट पर ड्यूटी में छूट दी थी.

मानसून पर भी टिकी है नजर

भारत में कॉटन की खेती मुख्य रूप से वर्षा आधारित क्षेत्रों में होती है. ऐसे में मानसून का प्रदर्शन उत्पादन पर बड़ा असर डालता है. Reuters की एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि El Nino जैसे मौसमीय प्रभावों के कारण मानसून कमजोर रहता है और नई फसल का उत्पादन प्रभावित होता है, तो देश में कॉटन की उपलब्धता घट सकती है और आयात की मांग बढ़ सकती है.

जानकारों का मानना है कि यदि ऐसी स्थिति बनती है तो सरकार पिछले साल की तरह अक्टूबर के बाद भी Duty-Free Import Window को आगे बढ़ाने पर विचार कर सकती है.

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