इन 4 कारणों से टूटा बाजार, सेंसेक्स 450 अंकों से ज्यादा फिसला, निफ्टी भी 25850 के नीचे, जानें क्यों बिगड़ा सेंटीमेंट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया. Nifty IT इंडेक्स 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे बड़ा लूजर बना. 2025 में 12.6 प्रतिशत टूटने के बाद 2026 में अब तक इसमें करीब 11 प्रतिशत की और गिरावट आ चुकी है.

क्यों गिर रहा बाजार? Image Credit: Canva

गुरुवार को भारतीय बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली. Sensex पिछले दिन की गिरावट को आगे बढ़ाते हुए 452 अंक टूटकर 83906.82 पर आ गया. वहीं Nifty 128.35 अंक गिरकर करीब 11 बजे 25,830 पर कारोबार करता दिखा. Nifty50 में Tech Mahindra, Infosys और Wipro सबसे ज्यादा दबाव में रहे और इनमें 5 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. दूसरी तरफ Bajaj Finance और State Bank of India में 2 प्रतिशत तक की तेजी देखने को मिली. आइए जानते हैं कि ऐसा क्या हुआ कि बाजार में गिरावट का दबाव देखने को मिला.

IT शेयरों में तेज बिकवाली

भारतीय IT कंपनियों के शेयरों में जोरदार गिरावट आई. अमेरिका में जनवरी के बेहतर जॉब्स डेटा के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा जल्द ब्याज दर कटौती की उम्मीदें कमजोर पड़ी हैं. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों की धारणा पर दबाव बनाया. Nifty IT इंडेक्स 4 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर सेक्टोरल इंडेक्स में सबसे बड़ा लूजर बना. 2025 में 12.6 प्रतिशत टूटने के बाद 2026 में अब तक इसमें करीब 11 प्रतिशत की और गिरावट आ चुकी है. निवेशकों को चिंता है कि AI से जुड़े बदलाव सॉफ्टवेयर सर्विस कंपनियों की कमाई पर असर डाल सकते हैं.

कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की आशंका से कच्चे तेल की कीमतों में हल्की तेजी आई. ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 0.46 प्रतिशत चढ़कर 69.72 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए नेगेटिव मानी जाती हैं, क्योंकि इससे ट्रेड डेफिसिट बढ़ सकता है और महंगाई पर दबाव आ सकता है.

कमजोर ग्लोबल संकेत

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली. हांगकांग का Hang Seng इंडेक्स लाल निशान में कारोबार करता दिखा. वहीं अमेरिकी बाजार बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए, जिसका असर घरेलू बाजार की धारणा पर भी पड़ा.

CPI के आंकड़े

सरकार पहली बार खुदरा महंगाई (CPI) के आंकड़े नए फॉर्मूले के आधार पर जारी करने जा रही है. 12 फरवरी को आने वाले इन आंकड़ों में जनवरी महीने के लिए महंगाई दर में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है. इस बार महंगाई में संभावित तेजी की मुख्य वजह खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतें और सोने के दामों में लगातार उछाल मानी जा रही है. खाने-पीने की चीजों के साथ-साथ कीमती धातुओं की महंगाई ने उपभोक्ता बजट पर अतिरिक्त दबाव डाला है.

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