अमेरिका के रेसिप्रोकल टैरिफ घटाने से इन सेक्टर्स को सीधा फायदा, शेयरों पर रखें नजर

अमेरिका और भारत के बीच हुए नए ट्रेड डील के तहत रेसिप्रोकल टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है. इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है. टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग गुड्स और एग्री सेक्टर को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है, जिससे कई एक्सपोर्ट-फोकस्ड शेयरों में तेजी देखने को मिल सकती है.

इंडिया अमेरिका ट्रेड डील Image Credit: @Money9live

US-India Trade Deal and Impacted Sector and Stocks: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 फरवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन पर बातचीत करने के बाद एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते का ऐलान किया. इसके तहत अमेरिका ने भारत से आयात पर लगने वाला रेसिप्रोकल टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया. यह कदम अमेरिकी बाजार में भारतीय प्रोडक्ट्स की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और निर्यात लागत घटाने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

ट्रेड डील का बैकग्राउंड

इस सौदे के पीछे कई आर्थिक और रणनीतिक पहलू शामिल हैं. अमेरिका और भारत के बीच लंबी बातचीत के बाद यह फैसला लिया गया. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर शेयर किए गए अपने पोस्ट में बताया कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने और अमेरिका से 500 अरब डॉलर (लगभग 41,50,000 करोड़ रुपये) से अधिक के एनर्जी, टेक्नोलॉजी, एग्री और कोल प्रोडक्ट खरीदने का वादा किया. अमेरिकी टैरिफ कटौती से भारतीय निर्यातकों को तत्काल फायदा मिलेगा और बाजार में कंपटीशन बढ़ेगी.

टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर

भारत का सबसे बड़ा निर्यात सेक्टर टेक्सटाइल्स है, जिसमें अमेरिका का हिस्सा 28-60 फीसदी है. पहले लगाए गए 25-50 फीसदी टैरिफ के कारण तिरुपुर, सूरत, नोएडा जैसे प्रमुख टेक्सटाइल क्लस्टर्स की प्रोडक्शन कैपेसिटी और मुनाफा प्रभावित हो रहा था. अब टैरिफ घटकर 18 फीसदी हो गया है, जिससे भारतीय प्रोडक्ट अमेरिकी बाजार में और सस्ते हो जाएंगे. इससे कुछ स्टॉक्स को फोसक में रखा जा सकता है.

जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर

सूरत डायमंड हब और दूसरे ज्वेलरी मैन्युफैक्चरिंग सेंटर अमेरिकी बाजार में करीब 30 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं. 25 फीसदी टैरिफ के कारण ऑर्डर कैंसिल हो रहे थे, लेकिन 18 फीसदी टैरिफ से कट एंड पॉलिश्ड डायमंड्स और ज्वेलरी की कीमत कम हो सकती है. इससे ब्लूस्टोन, टिफनी जैसी रिटेल चेन को सपोर्ट मिलेगा और निर्यात में बड़े स्तर पर उछाल देखा जा सकता है. इससे इन स्टॉक्स में हलचल दिख सकती है.

इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स

इलेक्ट्रॉनिक्स (स्मार्टफोन, कंपोनेंट्स) में सैमसंग, ऐपल के भारत प्लांट्स अमेरिकी बाजार में और कंपटेटिव हो जाएंगे. इंजीनियरिंग गुड्स और मशीनरी में अमेरिकी डिमांड बढ़ेगी और भारतीय कंपनियां विभिन्न प्रोजेक्ट्स में प्रवेश कर सकेंगी. ऑटो कंपोनेंट्स में $6.6 अरब (लगभग 5,47,000 करोड़ रुपये) के निर्यात को फायदा और कमर्शियल व्हीकल पार्ट्स पर लगे 50 फीसदी टैरिफ में राहत आ सकती है.

दूसरे प्रभावित सेक्टर

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डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.