अमेरिकी बाजार 6 महीने के निचले स्तर पर, S&P 500 और Nasdaq का बुरा हाल, अभी डरा रहा ये इंडिकेटर!

ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं. वहीं, बाजार का डर मापने वाला इंडेक्स Cboe Volatility Index भी बढ़कर करीब 27 के स्तर पर पहुंच गया, जो बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है. इसके साथ ही अमेरिकी फेड के चेयरमैन Jerome Powell ने संकेत दिया है. यानी फिलहाल बाजार को ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट. Image Credit: Getty image

भारत से लेकर अमेरिका तक के शेयर बाजार में कोहराम मचा हुआ है. मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका के बीच अमेरिकी शेयर बाजार में भारी दबाव देखने को मिला. प्रमुख इंडेक्स 6 महीने के निचले स्तर तक फिसल गए, जिससे ग्लोबल मार्केट सेंटीमेंट कमजोर हो गया. अमेरिका का प्रमुख इंडेक्स S&P 500 करीब 1.5 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ, जबकि टेक शेयरों से भरा Nasdaq 1.9 प्रतिशत लुढ़क गया. गिरावट की बड़ी वजह Nvidia Corp. और Micron Technology Inc. जैसे दिग्गज शेयरों में कमजोरी रही. वहीं स्मॉल कैप इंडेक्स Russell 2000 करीब 2 प्रतिशत गिरा और जनवरी के अपने हाई से 10 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर करेक्शन जोन में पहुंच गया.

कच्चे तेल और वोलैटिलिटी में उछाल

ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 112 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गईं, जिससे महंगाई और लागत बढ़ने की चिंता बढ़ गई है. वहीं, बाजार का डर मापने वाला इंडेक्स Cboe Volatility Index भी बढ़कर करीब 27 के स्तर पर पहुंच गया, जो बढ़ती अनिश्चितता का संकेत है.

युद्ध ने बढ़ाई चिंता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोलाल्ड ट्रंप ने साफ कहा कि वे ईरान के साथ सीजफायर के पक्ष में नहीं हैं, जिससे युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद कमजोर पड़ गई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान में ग्राउंड ऑपरेशन की तैयारी भी कर सकता है. इससे बाजार में डर बढ़ गया है कि सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा और यह समस्या लंबे समय तक रह सकती है.

बाजार में भारी उतार चढ़ाव

शुक्रवार को करीब 5.7 ट्रिलियन डॉलर के ऑप्शंस एक्सपायर हुए, जिसे ट्रेडर्स “ट्रिपल विचिंग” कहते हैं. ऐसे समय पर बाजार में अचानक तेज मूवमेंट देखने को मिलते हैं और इस बार भी यही हुआ. साथ ही, बाजार अपने 200 दिन के मूविंग एवरेज के नीचे बंद हुआ, जो टेक्निकल तौर पर कमजोरी का संकेत माना जाता है.

फेड की नीति और आगे का रास्ता

अमेरिकी फेड के चेयरमैन Jerome Powell ने संकेत दिया है कि जब तक महंगाई कम नहीं होती, तब तक ब्याज दरों में कटौती नहीं होगी. यानी फिलहाल बाजार को ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है.

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