Vi पर नए AGR प्लान से घट गया 95% देनदारी का बोझ, जानें 10 साल का पेमेंट प्लान, क्या शेयर बनेंगे मुनाफे का सौदा

सरकारी फैसले के बाद टेलिकॉम कंपनी Vi की सालाना वित्तीय जिम्मेदारियों की तस्वीर बदली है. नकदी दबाव, भविष्य की देनदारियां और निवेश की जरूरतें अब नए सिरे से आंकी जा रही हैं. इसका असर कंपनी की बाजार धारणा और शेयरों की चाल पर दिख सकता है.

Vi Share Outlook Image Credit: FreePik

Vodafone Idea stock impact: सरकार से AGR राहत मिलने के बाद भी Vodafone Idea (Vi) की राह पूरी तरह आसान नहीं हुई है. बाहर से देखने पर यह फैसला टेलिकॉम कंपनी के लिए बड़ी राहत जैसा लगता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब गेंद बैंकों के पाले में है. सरकारी राहत के बाद भी Vi को नए फंड की जरूरत है, और इसी को लेकर अब बैंकों ने कंपनी के लेंडिंग प्लान की दोबारा समीक्षा शुरू कर दी है. Vi की भविष्य की रणनीति, कैश फ्लो और निवेश योजना पर स्पष्टता के बिना बैंक आगे बढ़ने के मूड में नहीं हैं.

AGR राहत के बाद भी बैंक चिंता में क्यों?

पिछले हफ्ते सरकार ने Vi को बड़ी राहत देते हुए उसके Adjusted Gross Revenue (AGR) बकाया को फ्रीज कर दिया और भुगतान की समय-सीमा 16 साल तक बढ़ा दी. यह AGR बकाया 2006-07 से 2018-19 की अवधि का है, जिसकी कुल राशि करीब 87,695 करोड़ रुपये है. इस फैसले का सबसे बड़ा असर यह हुआ कि Vi की करीब 95% AGR देनदारी अगले 10 साल तक फ्रीज हो गई. यानी इस दौरान कंपनी पर तत्काल भुगतान का दबाव काफी कम हो गया.

हालांकि राहत के बावजूद बैंक पूरी तरह निश्चिंत नहीं हैं. ET के हवाले से बैंकर्स का कहना है कि AGR राहत से कंपनी की देनदारी प्रोफाइल जरूर बदली है, लेकिन इससे सारी समस्याएं खत्म नहीं होतीं. Vi पर कुल कर्ज और वैधानिक देनदारियां अब भी करीब 2 लाख करोड़ रुपये के आसपास हैं, जिनमें लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम ड्यूज शामिल हैं. AGR राहत केवल एक हिस्से को कवर करती है, जबकि स्पेक्ट्रम भुगतान अब भी कंपनी के लिए बड़ा बोझ बने हुए हैं. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व में बैंक अब यह दोबारा आंकलन कर रहे हैं कि Vi को कितनी नई फंडिंग की जरूरत है और वह कितनी रकम चुकाने में सक्षम है.

नेटवर्क निवेश के बिना आगे मुश्किल

Vi के लिए सबसे बड़ी चुनौती नेटवर्क निवेश है. कंपनी को प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए लगातार नेटवर्क अपग्रेड और विस्तार करना होगा. अप्रैल 2024 में कंपनी ने 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का इक्विटी फंड जुटाया था, लेकिन यह राशि काफी हद तक खर्च हो चुकी है. बैंक मानते हैं कि अगर Vi को बाजार में टिके रहना है तो ताजा फंडिंग बेहद जरूरी है.

स्टैगर्ड रिपेमेंट का पूरा खाका

सरकार के फैसले के मुताबिक, मार्च 2026 से मार्च 2031 तक Vi को सालाना 124 करोड़ रुपये AGR भुगतान करना होगा. इसके बाद मार्च 2032 से मार्च 2035 तक यह राशि 100 करोड़ रुपये सालाना रहेगी. शेष रकम मार्च 2036 से 2041 के बीच छह बराबर किस्तों में चुकाई जाएगी, और उससे पहले एक DoT कमेटी कंपनी की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करेगी.

सरकारी राहत से पहले और बाद में Vi की सालाना देनदारी में कितना फर्क पड़ा है, यह नीचे दी गई तालिका से साफ समझा जा सकता है:

यह तालिका दिखाती है कि शुरुआती वर्षों में राहत का असर बड़ा है, लेकिन लंबे समय में स्पेक्ट्रम भुगतान का दबाव बना रहता है. इससे साफ है कि AGR राहत ने Vi को सांस लेने की मोहलत जरूर दी है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है. मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब कंपनी को बैंकों और निवेशकों के सामने एक भरोसेमंद भविष्य की तस्वीर रखनी होगी.

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शेयर बाजार का क्या है हाल?

सरकार के दिए इस राहत का असर शेयर बाजार में साफ देखने को मिल रहा है. निफ्टी-सेंसेक्स के लाल निशान में होने के बावजूद Vi के शेयरों में तेज उछाल देखने को मिल रही है. सोमवार को दोपहर 12.21 पर कंपनी के शेयर 0.36 फीसदी की बढ़त के साथ 11.29 रुपये पर ट्रेड कर रहे है. शॉर्ट टर्म में देखें को जबसे सरकार ने मदद के हाथ आगे बढ़ाए हैं कंपनी के शेयरों ने अच्छा प्रदर्शन किया है. बीते 3 महीने में स्टॉक ने 23.84 फीसदी का रिटर्न दिया है, वहीं 1 साल में शेयरों में 46 फीसदी से ज्यादा की बढ़त देखने को मिली है. कंपनी का मौजूदा मार्केट कैप 1,22,103 करोड़ रुपये है. अब ऐसे में कंपनी के शेयरों पर नजर बनाए रखना आपके लिए फायदे का सौदा हो सकता है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.