क्या है Polymarket, जहां बात-बात पर लगता है सट्टा, रिस्क ऐसा कि एक झटके में डूब गए 36 लाख रुपये

Polymarket जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर हां या ना वाले कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करते हैं, जिनकी कीमत मांग और सप्लाई से तय होती है. इन्हें अक्सर संभावित नतीजों की संभावना के तौर पर देखा जाता है. चुनाव, नीतिगत फैसले और जियो पॉलिटिकल टेंशन के समय इन प्लेटफॉर्म पर भारी ट्रेडिंग होती है.

क्या है Polymarket? Image Credit: Canva, AI

बाजार में आपने कई तरह के बेटिंग प्लेटफॉर्म का नाम सुना होगा, जहां कई तरह के बेट होते हैं लेकिन आज हम आपको जिस प्लेटफॉर्म के बारे में बताने वाले हैं उसके बारे में मार्केट में काफी चर्चा है. इसका नाम है Polymarket. यहां बात-बात पर बेटिंग की जाती है. दरअसल, एक प्रेडिक्शन मार्केट ट्रेडर को इस प्लेटफॉर्म पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है. Polymarket पर अमेरिका के ईरान पर सैन्य हमला करने की समय-सीमा वाली बाजी में ट्रेडर ने करीब 36 लाख रुपये गंवा दिए. ट्रेड इस शर्त पर लगाई गई थी कि अमेरिका 14 जनवरी की आधी रात से पहले ईरान पर हमला करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और डेडलाइन खत्म होते ही सारी पोजिशन जीरो हो गई. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं कि आखिर यहां किस तरह से बेटिंग की जाती है?

बिना हेजिंग के पूरा पैसा फंसा

ट्रेडर ने नया अकाउंट खोलकर करीब चार घंटे के अंदर दर्जनों बेट लगाए. सभी दांव एक ही नतीजे पर थे, यानी तय समय तक अमेरिका का हमला. न तो किसी तरह की जोखिम कवरिंग थी और न ही अलग-अलग तारीखों पर पोजिशन बनाई गई. नतीजा यह हुआ कि घटना न होने पर सारे कॉन्ट्रैक्ट बेकार हो गए.

कैसे किया जाता है बेटिंग?

यहां हर बात पर बेटिंग की जाती है. जैसे Will Trump acquire Greenland before 2027? इसके लिए YES या NO के विकल्प मौजूद हैं. अगर आप YES पर बेटिंग करते हैं तो इसके लिए कम से कम 10 डॉलर लगाने होंगे. बदले में इसके 58.82 डॉलर मिलेंगे. वहीं, NO करेंगे तो 11.90 डॉलर लगाने होंगे. यानी जिस तरह का रिस्क होगा मुनाफा उसी तरह का होगा.

सोर्स-पॉलीमार्केट

लंबी अवधि में अभी भी बना है स्ट्राइक का अंदाजा

दिलचस्प बात यह है कि इस नुकसान के बावजूद बाजार पूरी तरह स्ट्राइक के खतरे को खारिज नहीं कर रहा. जनवरी के बीच के आंकड़ों के मुताबिक Polymarket पर जून के आखिर तक अमेरिका के ईरान पर हमला करने की संभावना करीब 54 से 55 प्रतिशत के आसपास दिखाई जा रही थी. यानी बाजार मान रहा है कि टकराव का जोखिम टला नहीं है, बस टाइमलाइन आगे खिसक गई है.

प्रेडिक्शन मार्केट में तेज उतार-चढाव

Polymarket जैसे प्लेटफॉर्म पर यूजर हां या ना वाले कॉन्ट्रैक्ट में ट्रेड करते हैं, जिनकी कीमत मांग और सप्लाई से तय होती है. इन्हें अक्सर संभावित नतीजों की संभावना के तौर पर देखा जाता है. चुनाव, नीतिगत फैसले और जियो पॉलिटिकल टेंशन के समय इन प्लेटफॉर्म पर भारी ट्रेडिंग होती है. लेकिन युद्ध और संघर्ष से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट सबसे ज्यादा उतार-चढाव वाले होते हैं. बयान, खबरें, लीक या अफवाहों से भी भाव तेजी से बदल जाते हैं.

भाषण और बयान का मतलब तुरंत एक्शन नहीं

हाल के हफ्तों में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को लेकर बयानबाजी तेज रही है. अमेरिका की ओर से ईरान की अंदरूनी कार्रवाइयों पर आलोचना, सीनियर अधिकारियों की चेतावनी और ईरान की जवाबी धमकियों ने माहौल गर्म किया है. लेकिन जानकारों के मुताबिक बयानबाजी का मतलब तुरंत सैन्य कार्रवाई नहीं होता. ऐसे फैसले में कूटनीति, सैन्य तैयारी, खुफिया रिपोर्ट और सहयोगी देशों के साथ तालमेल जैसे कई पहलू होते हैं, जो बाजार को साफ नजर नहीं आते.

डिस्क्लेमर: Money9live इस तरह के किसी भी बेटिंग प्लेटफॉर्म पर सट्टा लगाने को प्रमोट नहीं करता. ये खबर सिर्फ जानकारी और जोखिम बताने के लिए दी गई है.