इन तीन वजहों से टूटकर बिखरा शेयर बाजार, ताबड़तोड़ बिकवाली के पीछे इन फैक्टर्स का बड़ा असर
Share Market Today: वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा, क्योंकि ईरान के साथ समझौता करने की समय-सीमा को अमेरिका द्वारा आगे बढ़ाए जाने को लेकर शुरू में जो उम्मीद जगी थी, वह अब फीकी पड़ गई है. निवेशकों को कुछ ही मिनटों में करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
Share Market Today: शुक्रवार 27 मार्च को बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी कमजोर वैश्विक संकेतों और ब्रेंट क्रूड कीमतों में उतार-चढ़ाव के चलते 1 फीसदी से अधिक टूट गए. शेयर बाजार में इस बड़ी गिरावट के पीछे अमेरिका-ईरान के बीच जारी संघर्ष के खत्म होने को लेकर अनिश्चितता है. सुबह 9:20 बजे, सेंसेक्स 847.03 अंक या 1.13% गिरकर 74,426.42 पर था, और निफ्टी 252.15 अंक या 1.08% गिरकर 23,054.30 पर ट्रेड कर रहा था.
निवेशकों को कुछ ही मिनटों में करीब 6 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन पिछले सत्र के 431 लाख करोड़ रुपये से घटकर 425 लाख करोड़ रुपये रह गया.
जियो-पॉलिटिकल टेंशन
वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली का सिलसिला दूसरे दिन भी जारी रहा, क्योंकि ईरान के साथ समझौता करने की समय-सीमा को अमेरिका द्वारा आगे बढ़ाए जाने को लेकर शुरू में जो उम्मीद जगी थी, वह अब फीकी पड़ गई है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के एनर्जी प्लांट पर हमलों पर लगी रोक को अप्रैल तक बढ़ा देंगे और ईरान के साथ बातचीत ‘बहुत अच्छी’ चल रही है, लेकिन एक ईरानी अधिकारी ने युद्ध खत्म करने के US प्रस्ताव को ‘एकतरफा और गलत’ बताया.
गुरुवार को US के शेयर बाजार लगभग 2% गिर गए, 10-साल की US ट्रेजरी यील्ड 4.4% से ऊपर चली गई और ब्रेंट क्रूड लगभग 6 फीसदी बढ़ गया. इसकी वजह यह बढ़ती चिंता थी कि ईरान युद्ध का जल्द खत्म होना मुश्किल है,
कच्चा तेल $100 प्रति बैरल से ऊपर
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतें गिरीं, लेकिन फिर भी वे $100 प्रति बैरल से ऊपर बनी रहीं. एक उतार-चढ़ाव भरे हफ्ते के बाद कीमतों में यह गिरावट तब आई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध खत्म करने की बातचीत ‘बहुत अच्छी’ चल रही है और उन्होंने घोषणा की कि वे देश के एनर्जी प्लांट पर हमले 10 दिनों के लिए रोक देंगे. ट्रंप द्वारा 10 दिनों की समय-सीमा बढ़ाए जाने के बाद ब्रेंट 1.7% गिरकर लगभग $106 प्रति बैरल पर आ गया.
कमजोर रुपया
शुक्रवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94 के स्तर से भी नीचे गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इसकी मुख्य वजह यह चिंता थी कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुआ एनर्जी सप्लाई संकट अभी और लंबा खिंचेगा, जिससे ऊर्जा आयात करने वाली अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव और बढ़ जाएगा.
रुपया गिरकर 94.25 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जिसने इस हफ्ते की शुरुआत में बने अपने पिछले सबसे निचले स्तर 93.98 के रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया. पिछले महीने के आखिर में जब से यह युद्ध शुरू हुआ है, तब से अब तक रुपये में लगभग 4 फीसदी की गिरावट आ चुकी है.
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