पश्चिम एशिया में तनाव के बीच, सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटाई, जानें- क्या हैं इसके मायने
पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है. इसका मतलब है कि इसमें 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की गई है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वेस्ट एशिया में लड़ाई से जुड़ी तेज बढ़ोतरी के बाद दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें कम होने लगी हैं.
पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण पूरे देश में ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की बढ़ती चिंताओं के बीच, भारत सरकार ने शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल दोनों पर लगने वाली अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर दी है.
गुरुवार को जारी एक सरकारी आदेश के मुताबिक, पेट्रोल पर लगने वाली अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी को पहले के 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है. वहीं, डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी को पहले के 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 0 कर दिया गया है.
क्रूड ऑयल की कीमतें कम होने से राहत मिली
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वेस्ट एशिया में लड़ाई से जुड़ी तेज बढ़ोतरी के बाद दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें कम होने लगी हैं. अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के हालिया कमेंट्स, जिसमें उन्होंने इशारा किया कि ईरान के साथ बातचीत ‘बहुत अच्छी’ चल रही है और हमलों में रुकावट आएगी, ने ऑयल मार्केट में कुछ चिंताओं को शांत करने में मदद की है. नतीजतन, क्रूड ऑयल की कीमतों में कुछ कमी आई है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए फ्यूल की लागत पर तुरंत दबाव कम हुआ है, जो इंपोर्ट पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं.
क्या सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?
ड्यूटी में कटौती का मकसद इस राहत का कुछ हिस्सा कंज्यूमर्स को देना और फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी के रिस्क को मैनेज करना लगता है. हालांकि, ग्राहकों के लिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होंगी या नहीं, इस पर सरकार ने फिलहाल स्थिति साफ नहीं की है.
बाजार का माहौल बेहतर हुआ
पूरे बाजार के मूड में भी कुछ सुधार देखने को मिला है. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के साथ-साथ सभी सेक्टरों में खरीदारी हुई है, जिससे शेयरों की कीमतों को सहारा मिला है. निवेशक पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़ी घटनाओं पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि इसका असर तेल की कीमतों, महंगाई के अनुमान और बाजार की कुल दिशा पर लगातार पड़ रहा है.
फिलहाल, एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती को ईंधन की लागत को नियंत्रित करने और उपभोक्ताओं को राहत देने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि वैश्विक हालात अभी भी अनिश्चित बने हुए हैं.
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