138 करोड़ का साइबर फ्रॉड, कमीशन के लालच में खुलवाए अकाउंट, ऐसे खेल करते थे साइबर अपराधी

तेलंगाना के करीमनगर में 138 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा हुआ है, जहां म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए फर्जी ट्रांजैक्शन किए जाते थे. इस नेटवर्क के तार चीन से जुड़े पाए गए हैं. लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर अकाउंट खुलवाए जाते थे और फिर एटीएम कार्ड व बैंक डिटेल्स लेकर पैसे को अलग- अलग खातों में घुमाया जाता था.

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Cyber Fraud: तेलंगाना के करीमनगर में पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा किया है, जिसमें करीब 138 करोड़ रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया है. यह पूरा नेटवर्क म्यूल बैंक अकाउंट के जरिए चलाया जा रहा था. जांच में पता चला कि इस गिरोह के तार चीन से जुड़े हुए हैं. ऑपरेशन क्रैकडाउन के तहत पुलिस ने 24 आरोपियों की पहचान की और 13 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें बैंक कर्मचारी भी शामिल हैं. यह फ्रॉड आम लोगों के नाम पर अकाउंट खोलकर किया जाता था, जिससे पैसे को इधर उधर भेजा जाता था.

कैसे चलता था पूरा फ्रॉड नेटवर्क

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस रैकेट में सबसे पहले आम लोगों के नाम पर बैंक अकाउंट खुलवाए जाते थे और फिर इन्हीं अकाउंट का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड के पैसे को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था. गिरोह के मुख्य आरोपी लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर अकाउंट खुलवाते थे और बाद में उन अकाउंट का पूरा कंट्रोल अपने पास रख लेते थे. इसके बाद फ्रॉड का पैसा कई लेयर में घुमाया जाता था ताकि उसे ट्रेस करना मुश्किल हो जाए और जांच एजेंसियों से बचा जा सके.

म्यूल अकाउंट क्या होते हैं

म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक अकाउंट होते हैं जो किसी और के नाम पर खोले जाते हैं लेकिन उनका इस्तेमाल अपराधी करते हैं. इस मामले में लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके नाम पर अकाउंट खुलवाए गए. अकाउंट खुलने के बाद एटीएम कार्ड और बैंक डिटेल्स आरोपियों को दे दी जाती थी. इसके बाद इन अकाउंट के जरिए करोड़ों रुपये का लेनदेन किया गया, जिससे फ्रॉड का पैसा अलग- अलग जगह भेजा जाता रहा.

चीन से जुड़े साइबर क्रिमिनल का कनेक्शन

जांच में सामने आया कि इस फ्रॉड के तार चीन के साइबर अपराधियों से जुड़े हैं. भारत में मौजूद नेटवर्क सिर्फ अकाउंट खोलने और ट्रांजैक्शन मैनेज करने का काम करता था, जबकि असली ऑपरेशन विदेश से कंट्रोल किया जा रहा था. इससे यह साफ होता है कि यह एक इंटरनेशनल साइबर फ्रॉड नेटवर्क था, जो अलग- अलग देशों में फैला हुआ था और डिजिटल माध्यम से काम कर रहा था.

बैंक कर्मचारी भी शामिल

इस मामले में कुछ बैंक कर्मचारी भी शामिल पाए गए हैं, जो अकाउंट खोलने में मदद कर रहे थे. पुलिस ने अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपियों की तलाश जारी है. गिरफ्तार लोगों में नेटवर्क के मास्टरमाइंड के साथ साथ कई अकाउंट होल्डर भी शामिल हैं. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.

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कैसे बचें ऐसे साइबर फ्रॉड से

पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है और कहा है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपने बैंक डिटेल या एटीएम कार्ड न दें. जल्दी पैसे कमाने के लालच में किसी भी निवेश से बचें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें. अगर कोई फ्रॉड होता है तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या साइबर पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें, ताकि समय रहते कार्रवाई हो सके.