फर्जी ऐप इंस्टॉल करते ही खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट! जानें कैसे होती है ठगी, ऐसे रहें सेफ
आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन ऐप्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं. फिटनेस ट्रैकिंग से लेकर हेल्थ मॉनिटरिंग तक हर काम के लिए एक ऐप उपलब्ध है. लेकिन इसी निर्भरता का फायदा उठाकर साइबर ठग फर्जी ऐप्स के जरिए लोगों का निजी डेटा चुरा रहे हैं. बैंक खाते खाली करने से लेकर पहचान की चोरी तक, ये ठगी अब लाखों भारतीयों के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है.
आज की डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन ऐप्स हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं. स्टेप काउंट करने से लेकर हार्ट रेट मॉनिटर करने तक, हर जरूरत के लिए एक ऐप उपलब्ध है. लेकिन इसी सुविधा का फायदा उठाकर साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं. हाल के महीनों में फेक ऐप्स के जरिए पर्सनल डेटा चोरी के मामले तेजी से बढ़े हैं, जिससे बैंक अकाउंट्स खाली होने से लेकर आईडेंटिटी थेफ्ट तक की घटनाएं हो रही हैं. इस तरह की ठगी में फेक APK ऐप्स प्रमुख भूमिका निभा रही हैं.
ठगी कैसे होती है?
साइबर ठग आमतौर पर फिशिंग लिंक्स के जरिए काम करते हैं. वे SMS या व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजकर कहते हैं कि कोई सरकारी योजना, लोन या बैंकिंग सर्विस के लिए ऐप डाउनलोड करें. ये ऐप्स APK फॉर्मेट में होते हैं, जो आधिकारिक ऐप स्टोर्स से बाहर से इंस्टॉल किए जाते हैं. एक बार इंस्टॉल होने पर, ऐप फोन की स्क्रीन को हाईजैक कर लेता है, OTPs पढ़ता है, SMS एक्सेस करता है और पर्सनल डेटा जैसे PAN, आधार, बैंक डिटेल्स चुरा लेता है.
उदाहरण के तौर पर, फेक लोन ऐप्स जैसे ‘प्रधानमंत्री योजना लोन’ या बैंकिंग ऐप्स जो सरकारी लोगो का इस्तेमाल करते हैं, यूजर्स से KYC डिटेल्स मांगते हैं और फिर UPI पिन या डेबिट कार्ड से जुड़ी जानकारी चुराकर ट्रांजेक्शन करते हैं. कुछ मामलों में, ठग ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर ऐप इंस्टॉल करवाते हैं, जिससे डेटा एक्सफिल्ट्रेशन होता है और आईडेंटिटी थेफ्ट के जरिए आगे की ठगी की जाती है.
बचाव के तरीके
इस तरह की ठगी से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है सावधानी. कभी भी अनजान लिंक्स से ऐप्स डाउनलोड न करें. हमेशा Google Play Store या Apple App Store जैसे आधिकारिक स्रोतों से इंस्टॉल करें. ऐप इंस्टॉल करने से पहले उसके रिव्यूज, डेवलपर की जानकारी और परमिशन्स चेक करें. अगर ऐप अनावश्यक रूप से SMS, कॉन्टैक्ट्स या कैमरा एक्सेस मांग रहा है, तो सतर्क हो जाएं. 2FA चालू रखें, UPI पिन या OTP कभी शेयर न करें. एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर जैसे McAfee या Quick Heal इस्तेमाल करें जो मालवेयर डिटेक्ट कर सके. सरकारी ऐप्स के लिए हमेशा आधिकारिक वेबसाइट्स से वेरिफाई करें. भारत सरकार ने Sanchar Saathi ऐप लॉन्च किया है, जो फ्रॉड रिपोर्ट करने में मदद करता है.
ठगी के बाद कहां करें शिकायत?
अगर आप ठगी का शिकार हो गए हैं, तो तुरंत कार्रवाई करें. सबसे पहले अपना बैंक अकाउंट फ्रीज करवाएं और पुलिस में FIR दर्ज कराएं. भारत में साइबर क्राइम रिपोर्ट करने के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 डायल करें या cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें. यह पोर्टल I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) द्वारा संचालित है, जो ठगी के मामलों में त्वरित सहायता प्रदान करता है. अगर डेटा चोरी हुई है, तो आधार या PAN से जुड़ी सर्विसेज को लॉक करें. कई बैंक अपनी ऐप्स में फ्रॉड रिपोर्टिंग फीचर देते हैं, जैसे RBL Bank या अन्य. जितनी जल्दी रिपोर्ट करें, उतनी जल्दी रिकवरी की संभावना बढ़ती है.
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