अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica में भारत की एंट्री, AI और सेमीकंडक्टर में चीन की बादशाहत को चुनौती, जानें कैसे होगा फायदा?

भारत ने अमेरिका की अगुवाई वाली ‘पैक्स सिलिका’ पहल से जुड़कर एआई, सेमीकंडक्टर और अहम सप्लाई चेन में रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दी है. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान हुए इस समझौते को तकनीकी सहयोग, आर्थिक सुरक्षा और वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद गठबंधन बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

India Sign Pax Silica Declaration Image Credit: Canva/ Money9

India Sign Pax Silica Declaration: भारत ने शुक्रवार को अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) पहल में औपचारिक रूप से शामिल होकर तकनीक और सेमीकंडक्टर सहयोग में एक बड़ा कदम उठाया. इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के दौरान दोनों देशों ने पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते का मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण सप्लाई चेन को सुरक्षित और मजबूत बनाना है, ताकि आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी विकास को नई रफ्तार मिल सके. इसमें शामिल होने के बाद AI और सेमीकंडक्टर सेक्टर में चीन की बादशाहत को चुनौती मिलेगी.

भारत बना Pax Silica पहल का हिस्सा

अमेरिका के पैक्स सिलिका पहल का उद्देश्य भरोसेमंद देशों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार करना है. इस नेटवर्क के जरिए सेमीकंडक्टर, एआई और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाया जाएगा. भारत के शामिल होने से यह पहल और मजबूत हुई है. अमेरिका का मानना है कि भारत की तकनीकी क्षमता और इंजीनियरिंग प्रतिभा इस गठबंधन को नई दिशा दे सकती है.

लंबी छलांग लगाने के लिए भारत तैयार: Ashwini Vaishnaw

केंद्रीय आईटी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में लंबी छलांग लगाने की तैयारी में है. उन्होंने कहा कि अगर 1947 से ही यह सोच जारी रहती तो आज स्थिति और भी अलग होती, लेकिन अब शुरुआत भी आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा फायदा देगी. उन्होंने बताया कि भारतीय इंजीनियर 2-नैनोमीटर जैसे अत्याधुनिक चिप डिजाइन पर काम कर रहे हैं. दुनिया भर में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को लगभग 10 लाख कुशल पेशेवरों की जरूरत होगी और भारत इस मांग को पूरा करने की क्षमता रखता है. Australia, Greece, Israel, Japan, Qatar, South Korea, Singapore, UAE और UK पहले से इस पहल के हिस्सा हैं.

“हथियार बनी निर्भरता” को खत्म करने का संदेश

अमेरिकी अंडर सेक्रेटरी Jacob Helberg ने इस समझौते को भू-राजनीतिक दृष्टि से अहम बताया. उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसी सप्लाई चेन से बाहर निकलना होगा जो किसी एक देश पर ज्यादा निर्भर हों. उन्होंने साफ शब्दों में कहा, किसी देश पर निर्भरता को हथियार की तरह इस्तेमाल करना और किसी देश को ब्लैकमेल करना गलता है. उनका कहना था कि आर्थिक सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है और इसी सोच के साथ यह नया तकनीकी गठबंधन बनाया जा रहा है.

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार

भारत में अमेरिका के राजदूत Sergio Gor ने इसे 21वीं सदी के तकनीकी और आर्थिक ढांचे को तय करने वाला कदम बताया. उन्होंने कहा कि व्यापार समझौते से लेकर रक्षा और तकनीक तक, दोनों देशों के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने हाल ही में हुए अंतरिम व्यापार समझौते का जिक्र करते हुए कहा कि इससे पुराने मतभेद दूर हुए हैं. यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि मिलकर निर्माण करने की सोच को दर्शाता है.