ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए 4 लाख दे रही बिहार सरकार, जानें किसे मिलता है लाभ, ऐसे करें आवेदन

बिहार में खेती की तस्वीर बदल रही है. पारंपरिक फसलों के साथ अब किसान ड्रैगन फ्रूट जैसी नई और लाभकारी फसलें अपना रहे हैं. सरकारी सहायता और आधुनिक तकनीक के सहयोग से वे अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. यह पहल किसानों को आत्मनिर्भर बनाकर खेती को एक नई पहचान दे रही है. अगर आप भी ड्रैगन फ्रूड की खेती करना चाहते हैं तो इस सरकारी स्कीम के लिए अप्लाई कर सकते हैं.

Mukhyamantri Bagwani Mission Image Credit: AI/Canva

Mukhyamantri Bagwani Mission: बिहार के किसानों के लिए अब खेती सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि कमाई का नया अवसर बन रही है. बदलते समय के साथ खेती में भी बदलाव आ रहा है, और इसी बदलाव की मिसाल है ड्रैगन फ्रूट की खेती. सरकार की पहल से अब किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नई और लाभदायक फसलों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं. “ड्रैगन फ्रूट विकास योजना” न केवल किसानों को आर्थिक सहारा देती है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने और अपनी आय बढ़ाने का मौका भी देती है. यह कहानी है उन किसानों की, जो नई सोच और सरकारी सहयोग के साथ अपनी खेती को एक नई दिशा दे रहे हैं.

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क्या है ड्रैगन फ्रूट विकास योजना?

“ड्रैगन फ्रूट विकास योजना” बिहार सरकार की “मुख्यमंत्री बागवानी मिशन” योजना का एक हिस्सा है. इसे बिहार के कृषि विभाग द्वारा शुरू किया गया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में बागवानी फसलों, खासकर ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत बिहार के 21 जिलों भोजपुर, गोपालगंज, जहानाबाद, सारण, सिवान, सुपौल, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, गया, कटिहार, किशनगंज, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पश्चिम चंपारण, पटना, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, समस्तीपुर और वैशाली में ड्रैगन फ्रूट की खेती का क्षेत्र बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है. इस योजना के तहत किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए आर्थिक सहायता भी दी जाती है, ताकि वे इसे आसानी से उगा सकें और अपनी आय बढ़ा सकें.

इस योजना के क्या हैं लाभ?

इस योजना के तहत सरकार किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए आर्थिक सहायता देती है. सहायता की राशि तीन किस्तों में दी जाती है. तीन साल में कुल चार लाख रुपये तक की मदद की जाती है.

  • पहले वर्ष: ₹1,80,000 प्रति हेक्टेयर.
  • दूसरे वर्ष: ₹60,000 प्रति हेक्टेयर.
  • तीसरे वर्ष: ₹60,000 प्रति हेक्टेयर.

किसे मिलता है लाभ?

इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ शर्तों का पालन करना बेहद जरूरी है.

  • लाभ केवल बिहार के निवासी को मिलता है.
  • आवेदक रैयत (जमीन मालिक) किसान होना चाहिए.
  • आवेदक इन जिलों में से किसी एक का निवासी होना चाहिए: भोजपुर, गोपालगंज, जहानाबाद, सारण, सिवान, सुपौल, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, गया, कटिहार, किशनगंज, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पश्चिम चंपारण, पटना, पूर्वी चंपारण, पूर्णिया, समस्तीपुर और वैशाली.
  • आवेदक के पास कम से कम 0.25 एकड़ (0.1 हेक्टेयर) और अधिकतम 10 एकड़ (4 हेक्टेयर) कृषि भूमि होनी चाहिए.
  • आवेदक का DBT पोर्टल पर पंजीकरण होना आवश्यक.

कैसे करें आवेदन

इस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक को पहले DBT पोर्टल के रजिस्ट्रेशन करना होता है.

  • DBT पोर्टल के रजिस्ट्रेशन पेज पर जाएं.
  • आधार वेरिफिकेशन का प्रकार चुनें – OTP / BIO-AUTH / IRIS.
  • अपना आधार नंबर और आधार के अनुसार नाम दर्ज करें और “Authentication” पर क्लिक करें.
  • प्राप्त OTP दर्ज करें और “Validate OTP” पर क्लिक करें.
  • “Kisan Credit Card (KCC)” की जानकारी की पुष्टि करें और “Farmer Registration” पर क्लिक करें.
  • रजिस्ट्रेशन पेज में किसान की डिटेल्स, जमीन की जानकारी, बैंक खाता विवरण आदि सही-सही भरें और “Submit” पर क्लिक करें.
  • OTP वेरिफाई कर “Register” पर क्लिक करें. इससे आपका रजिस्ट्रेशन आईडी बन जाएगा.

ध्यान रहे कि रजिस्ट्रेशन के 48 घंटे बाद किसान 13 अंकों के रजिस्ट्रेशन नंबर की सहायता से योजना के लिए आवेदन कर सकते हैं.

ऐसे करें अप्लाई

  • योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं.
  • नीचे स्क्रॉल करके चेकबॉक्स पर टिक करें और “Proceed to apply” पर क्लिक करें.
  • “Type of Applicant” चुनें और “DBT Registration Number of Kisan” दर्ज कर “Get details” पर क्लिक करें.
  • आवश्यक जानकारी जैसे पता, भूमि से जुड़ी जानकारी आदि भरें और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें.
  • चेकबॉक्स पर टिक कर “Submit” पर क्लिक करें.
  • आवेदन संख्या (Application Number) जनरेट होगी, इसे भविष्य के लिए सुरक्षित रखें.
  • आवेदन का प्रिंटआउट भी निकाल सकते हैं.